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रात अकेली है 2: द बंसल मर्डर्स’ रिव्यू:नवाजुद्दीन सिद्दीकी की दमदार वापसी, जहां खामोशी, सत्ता और अपराध मिलकर रचते हैं एक सिहरन भरी कहानी

7 months ago

नेटफ्लिक्स की चर्चित क्राइम-थ्रिलर रात अकेली है एक बार फिर लौटती है, लेकिन इस बार कहानी का दायरा और तेवर दोनों पहले से ज्यादा गंभीर हैं। इंस्पेक्टर जटिल यादव (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) के जरिए यह फिल्म सत्ता, पैसा, मीडिया और सच को दबाने वाली व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी करती है। यह सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं, बल्कि हमारे समय की सामाजिक और राजनीतिक सच्चाइयों का आईना भी है। कहानी कहानी उत्तर प्रदेश के रसूखदार बंसल परिवार से शुरू होती है, जहां एक ही रात में परिवार के कई सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है। इससे पहले मरे हुए कौवों का दिखना आने वाले खतरे का संकेत देता है। शक की सुई नशेड़ी बेटे, चालाक रिश्तेदार, रहस्यमयी गुरुमां और परिवार की बची हुई महिला नीरा बंसल (चित्रांगदा सिंह) पर घूमती है। पुलिस प्रशासन केस को जल्द निपटाना चाहता है, लेकिन इंस्पेक्टर जटिल यादव को मामले में कुछ और गहरा और खतरनाक नजर आता है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, अमीरी-गरीबी की खाई, सत्ता का दुरुपयोग और दबा हुआ सच सामने आने लगता है। अभिनय नवाजुद्दीन सिद्दीकी (जटिल यादव) संयमित और प्रभावशाली अभिनय से पूरी फिल्म को संभालते हैं। बिना जरूरत से ज्यादा संवाद बोले, उनकी आंखें और बॉडी लैंग्वेज बहुत कुछ कह जाती है। चित्रांगदा सिंह (नीरा बंसल) एक डरी हुई लेकिन रहस्यमयी मां के किरदार में जमी हुई दिखती हैं। दीप्ति नवल (गुरु मां) हर सीन में असहजता और शक पैदा करती हैं। रेवती (फॉरेंसिक प्रमुख) बेहद सधी हुई और विश्वसनीय लगती हैं। राधिका आप्टे (राधा) की भूमिका सीमित है, लेकिन उनकी मौजूदगी कहानी को भावनात्मक गहराई देती है। सहायक कलाकारों ने भी ईमानदारी से काम किया है। निर्देशन और तकनीकी पक्ष हनी त्रेहन का निर्देशन गंभीर और आत्मविश्वास से भरा है। फ़िल्म का माहौल डार्क और सस्पेंस से भरपूर है, जिसे सिनेमैटोग्राफी अच्छी तरह सपोर्ट करती है। एडिटिंग कसी हुई है, लेकिन किरदारों की अधिकता के कारण कुछ हिस्सों में कहानी थोड़ी उलझती है। क्लाइमैक्स संतोषजनक है, हालांकि उसमें और ज्यादा प्रभाव डाला जा सकता था। संगीत फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक सस्पेंस को मजबूत करता है और ज़रूरत से ज़्यादा उभरकर सामने नहीं आता। साइलेंस का इस्तेमाल भी कई जगह असर छोड़ता है। फाइनल वर्डिक्ट रात अकेली है 2: द बंसल मर्डर्स एक गंभीर, परतदार और सोचने पर मजबूर करने वाली क्राइम थ्रिलर है। दमदार अभिनय और सामाजिक संकेत इसे मजबूत बनाते हैं, भले ही कहानी कुछ जगह जटिल हो जाए। मर्डर मिस्ट्री और सधी हुई थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म देखी जा सकती है
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