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एक महीने पहले मिली गुलशन कुमार की हत्या की टिप:पुलिस ऑफिसर ने महेश भट्ट को कॉल कर कहा था- उनसे कहना घर से न निकलें

11 months ago

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12 अगस्त 1997 को टी-सीरीज के फाउंडर गुलशन कुमार की शिव मंदिर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। लंबे समय बाद पुलिस ऑफिसर राकेश मारिया ने बताया है कि गुलशन कुमार की हत्या से एक महीने पहले ही उन्हें मुखबिर से हत्या की साजिश होने की टिप मिल गई थी, जिसके बाद उन्होंने महेश भट्ट को कॉल कर कहा था कि वो गुलशन कुमार से कहें कि वो घर से न निकलें। इस चेतावनी के बाद गुलशन कुमार को पुलिस प्रोटेक्शन दी गई थी, लेकिन फिर एक महीने बाद उनकी हत्या हो गई। राकेश मारिया ने राज शमाणि के पॉडकास्ट में कहा, 'क्राइम ब्रांच में काम करते-करते, बॉम्ब ब्लास्ट वगैरह के मामलों में, मेरा एक अच्छा-खासा इन्फॉर्मर नेटवर्क बन गया था। 22 अप्रैल 1996, देर रात मुझे एक कॉल आया। उस समय मोबाइल फोन नहीं हुआ करते थे, कॉल लैंडलाइन पर आया था। उस व्यक्ति ने मुझसे कहा, “सर, गुलशन कुमार का विकेट जाने वाला है।” मैंने पूछा, “विकेट जाने वाला? कौन?”तब उसने बताया कि “अबू सलीम ये करवाने वाला है। वो (गुलशन कुमार) शिव मंदिर जाता है, और जैसे ही बाहर निकलेगा, ये लोग उसे मार देंगे।” आगे राकेश मारिया ने कहा, मैंने कहा, “कुछ और पता चले तो मुझे बताना।” यह कॉल लगभग रात के 2-3 बजे आया होगा। मैं सो नहीं पाया। मेरी पत्नी ने भी मेरे चेहरे के भाव देखकर पूछा, “क्या हुआ?” वह इन सब चीजों की आदी थी, पहले भी मेरे साथ ऐसा होता देख चुकी थी। मैंने कहा, “कुछ नहीं। किसी को मारने वाले हैं।” तो उसने बिल्कुल सामान्य ढंग से कहा, “क्यों न तुम किसी को इसकी जानकारी दे दो?” मैंने कहा, “हां, मैं करूंगा।” सुबह लगभग 6:30-7 बजे, मैंने महेश भट्ट को फोन किया। मैंने उनसे पूछा, “क्या आप गुलशन कुमार को जानते हैं?” उन्होंने कहा, “हां, मैं उनके लिए एक फिल्म डायरेक्ट कर रहा हूं।” मैंने कहा, “आप उन्हें कहिए कि आज घर से बाहर न निकलें। अगर वे शिव मंदिर जाते हैं, तो उन्हें रोकिए। मैं क्राइम ब्रांच से बात कर रहा हूं, उन्हें सुरक्षा दी जाएगी।” राकेश मारिया ने आगे बताया, 'कुछ देर बाद महेश भट्ट का मुझे वापस फोन आया। उन्होंने कहा, “हां, वह रोज शिव मंदिर जाते हैं।” मैंने फिर कहा, “उन्हें आज घर से बाहर न निकलने को कहिए।” मैंने क्राइम ब्रांच से भी बात की।' राकेश मारिया ने बताया कि उन्होंने इसकी सूचना क्राइम ब्रांच को दी और फिर गुलशन कुमार को सिक्योरिटी दी गई थी। आगे राकेश मारिया बताते हैं, 'मैंने वहां फोन कर बताया कि कुछ बहुत गंभीर होने वाला है, तुरंत सुरक्षा दी जाए। सुरक्षा उन्हें दे भी दी गई। उसके बाद मैं इस बात को भूल गया। फिर अगस्त में पता चला कि गुलशन कुमार को शिव मंदिर के बाहर गोली मार दी गई। मैं सन्न रह गया।' 'मैंने कहा, “ये क्या हुआ? उन्हें सुरक्षा तो दी गई थी।” फिर जानकारी मिली कि मुंबई पुलिस ने सुरक्षा दी थी, पर उनकी एक बड़ी फैक्ट्री नोएडा में थी, सुपर कैसेट्स या जो भी, वह नोएडा वाली यूपी पुलिस की सुरक्षा में रहते थे। लंबे समय तक सुरक्षा मिली, पर होता क्या है कि लोग सोचने लगते हैं, “अप्रैल में खतरा बताया था, अब तो अगस्त हो गया, कुछ हुआ नहीं” फिर सुस्ती आ जाती है, लापरवाही शुरू हो जाती है।' राकेश ने आगे कहा, 'मुझे लगता है कि कोई त्योहार था, शायद होली या कोई और त्योहार। तो उनके बॉडीगार्ड्स वगैरह ने कहा कि वे छुट्टी पर जा रहे हैं। तो उन्होंने (गुलशन कुमार ने) भी कहा,“ठीक है, अब तो कुछ है नहीं।” और बिना गार्ड के ही वे वहां (मंदिर) आए और वहीं उनकी हत्या कर दी गई।'
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