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Devuthani Ekadashi 2025: 1 या 2 नवंबर देवउठनी एकादशी व्रत कब, जानें डेट और पारण का समय

8 months ago

Devuthani Ekadashi 2025: कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. इस दिन को देवउठनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. यह तिथि इसलिए भी खास होती है, क्योंकि भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और चातुर्मास की समाप्ति होती है.

देवशयनी एकादशी के दिन श्रीहरि चार महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा के लिए चले जाते हैं और इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है. चातुर्मास के दौरान हिंदू धर्म में मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. लेकिन देवउठनी एकादशी पर श्रीहरि के जागते ही फिर से शुभ-मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं. आइये जानते हैं इस साल देवउठनी एकादशी कब पड़ेगी.

देवउठनी एकादशी 2025 तिथि (Devuthani Ekadashi 2025 Date)

एकादशी तिथि को लेकर अक्सर असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती है. इसका कारण यह है कि कई बार एकादशी तिथि दो दिन पड़ जाती है. इस साल भी देवउठनी एकादशी तिथि को लेकर लोगों के बीच कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है कि, देवउठनी एकादशी 1 नवंबर को होगी या फिर 2 नवंबर 2025 को.

आपको बता दें कि, कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 1 नवंबर को सुबह 09.11 पर होगी और समापन 2 नवंबर को सुबह 07.11 पर होगी. गृहस्थ लोग शनिवार, 1 नवंबर को एकादशी का व्रत रख सकते हैं. वहीं वैष्णव पंरपरा को मानने वाले उदयातिथि के आधार पर रविवार, 2 नवंबर को व्रत रखेंगे. खबरों की माने तो, वृंदावन इस्कॉन में भी देवउठनी एकादशी का पूजन और व्रत आदि 2 नवंबर को ही किए जाएंगे.

  • देवउठनी एकादशी तिथि- शनिवार, 1 नवंबर 2025 (गृहस्थ लोग), 2 नवंबर 2025 (वैष्णव संप्रदाय)
  • देवउठनी एकादशी व्रत पारण समय- 2 नवंबर 2025, दोपहर 01.11 से 03.23 मिनट तक.
  • हरि वासर समाप्ति का समय- 2 नवबंर 2025, दोपहर 12.55.
  • गौण एकादशी के लिए पारण मुहूर्त- 3 नवंबर 2025, सुबह 06.34 से 08. 46 मिनट तक.

देवउठनी एकादशी पूजन विधि (Devuthani Ekadashi 2025 Puja)

देवोत्थान या देवउठनी एकादशी की पूजा के लिए यहां हम आपको सबसे सरल पूजा विधि बता रहे हैं, जिसे आप घर पर भी आसानी से कर सकते हैं और भगवान विष्णु की पा सकते हैं.

एकादशी के दिन आपको सुबह जल्दी उठना है और सबसे स्नान करना है. स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें.

सबसे पहले सूर्य देव को जल से अर्घ्य दे और फिर पूजा घर में दीप जलाकर एकादशी व्रत का संकल्प लें और पूजा की तैयारी शुरू कर दें.

ईशान कोण में चौकी रखकर उसमें पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.

भगवान को रोली, चंदनस पीले फूल, फल, केसर, हल्दी, मिठाई, तुलसी आदि अर्पित करते हुए धूप-दीप जलाएं.

इसके बाद देवोत्थान एकादशी की व्रत कथा पढ़ें, विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु जी के मंत्रों का जप करें और आखिर में आरती कर भगवान से पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमा मांगे.

पूरे दिन व्रत का पालन करें और अगले दिन द्वादशी तिथि पर पारण कर अपना व्रत खोलें.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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