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धर्मेंद्र की दरियादिली:लुधियाना में 19 कनाल से ज्यादा जमीन भतीजों के नाम कर दी; कहा- पुरखों की है, संभालकर रखना

11 months ago

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बॉलीवुड के 'ही-मैन' धर्मेंद्र का अपने पैतृक गांव डांगो और रिश्तों से कितना गहरा लगाव था, इसकी गवाही आज भी उनके गांव के लोग देते हैं। अभिनेता का जन्म भले ही नसराली में हुआ था लेकिन उनके दिल में हमेशा डांगो बसा रहा। जहां उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती 3 साल बिताए। बाप-दादा की जमीन से धर्मेंद्र को विशेष लगाव था। धर्मेंद्र के पिता के हिस्से की जमीन की देखभाल उनके चाचा व चाचा के बेटे कर रहे थे। धर्मेंद्र के चाचा गांव में पैदा होने वाली फसल में से कुछ हिस्सा व अन्य सामान अक्सर मुंबई लेकर जाते थे। धर्मेंद्र को उनके पिता ने कहा था कि पुरखों की जमीन को संभालकर रखना। इसी वजह से धर्मेंद्र ने अपने पैतृक गांव की जमीन अपने चाचा के पोतों के नाम कर दी ताकि वो गांव में रहकर पुरखों की जमीन को संभालकर रख सकें। पिता के तबादलों के कारण अलग-अलग जगह रहे धर्मेंद्र धर्मेंद्र के पिता केवल कृष्ण देओल एक टीचर थे। उन्होंने धर्मेंद्र को हमेशा अपने साथ रखा ताकि वह स्कूल में पढ़ाई कर सके। जब वो नसराली में थे तो धर्मेंद्र का जन्म वहां हुआ। उसके बाद पिता ने धर्मेंद्र व उनकी मां को अपने गांव डांगों में रखा। धर्मेंद्र तीन साल के हुए तो तब वो साहनेवाल स्कूल में थे तो परिवार को लेकर साहनेवाल चले गए। 19 कनाल 11 मरले जमीन भतीजों के नाम की धर्मेंद्र अपने भतीजों को अपना खून और जड़ समझते थे। इसी भावना के चलते उन्होंने अपने पैतृक गांव की 19 कनाल 11 मरले जमीन अपने भतीजों के नाम कर दी थी। उनके भतीजे बूटा सिंह जो लुधियाना की एक कपड़ा मिल में काम करते हैं, उन्होंने बताया कि कोई किसी को आधा किला भी नहीं देता लेकिन धर्मेंद्र उन्हें अपना खून समझते थे और इतनी बड़ी जमीन सौंप गए। दादा मिलने जाते थे मुंबई बूटा सिंह ने बताया कि जब धर्मेंद्र फिल्मों में काम करने के लिए बंबई मुंबई चले गए थे तब उनके दादाजी हर महीने उन्हें मिलने जाते थे। वे घर से खोया (मावा) निकालकर ले जाते थे। ट्रेन से बंबई पहुंचने में उन्हें 24 घंटे लग जाते थे। वे कभी बर्फी तो कभी साग बनाकर ले जाते थे। जिसे धर्मेंद्र बहुत चाव से खाते। धर्मेंद्र हमेशा कहते थे कि जब भी आना घर का खोया जरूर लेकर आना। बूटा सिंह ने बताया कि एक बार वह भी दादा के साथ मुंबई गए थे और एक महीना उनके यहां ही रहे। धर्मेंद्र अक्सर दादाजी से कहते थे कि "चाचा जी, इसको यहीं छोड़ जाओ, इसकी जिंदगी बना देंगे, लेकिन दादाजी नहीं माने। बूटा सिंह को इस बात का अफसोस है कि अगर दादाजी मान जाते तो वह भी आज फिल्मों में होते। गांव वालों से मांगी माफी और खूब रोए धर्मेंद्र स्टार बनने के बाद शूटिंग के लिए 2013 में अपने पैतृक गांव डांगो आए थे, उस वक्त वह 78 वर्ष के थे। उनके आने की खबर से पूरा गांव खिल उठा था लेकिन धर्मेंद्र खुद मायूस नजर आ रहे थे। गांव आते ही वह सबसे पहले मिट्टी के घर में गए और गेट के पास से मिट्टी उठाकर माथे पर लगाई। घर के अंदर रुकने पर वह 10-15 मिनट तक फूट-फूटकर रोते रहे। मैं बहुत देर से आया मुझे माफ कर दो ग्रामीणों ने बताया कि जब धर्मेंद्र गांव आए थे तो उन्होंने सबसे पहले सभी गांव वालों से माफी मांगी और कहा, मैं बहुत देर से आया हूं, मुझे माफ कर दो। उस वक्त लोगों में उनसे मिलने और फोटो खिंचवाने की उत्सुकता थी। वह एक घंटा रुकने के बाद वापस चले गए थे। इसके बाद वह 2015 में दूसरी बार गांव आए और इसी दौरान उन्होंने अपनी 19 कनाल 11 मरले जमीन अपने भतीजों के नाम करवा दी। साहनेवाल को मिली प्रसिद्ध डांगो रह गया गुमनाम वहीं गांव के मास्टर जी ने बताया की धर्मेंद्र जब मुंबई गए तो उनके साथ साहनेवाल का नाम जुड़ गया। लोग धर्मेद्र का पैतृक घर साहनेवाल बताने लग गए। साहनेवाल को खूब प्रसिद्ध मिली और उनका पैतृक गांव डांगो गुमनाम रह गया। लेकिन बाद में धर्मेंद्र ने खुद कहा था कि लोग मुझे साहनेवाल का कहते हैं जबकि मेरा गांव डांगो है। वीडियो कॉल के जरिए करते थे गांव के लोगों से बात डांगो गांव के सरपंच हरदीप सिंह ने भी धर्मेंद्र अक्सर गांव में लोगों के साथ वीडियो कॉल के जरिए बात करते रहते थे और लोगों के बारे में पूछते थे। उन्होंने बताया कि उनकी चाची व भतीजे आज भी गांव में रहते हैं। उनके निधन से पूरा गांव शोक में है। धर्मेंद्र की चाची की उम्र 95 साल से ज्यादा हैं और अब वो ज्यादा बोल नहीं पाती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जब भी वो वीडियो कॉल करते थे तो चाची के बारे में सबसे पहले पूछते थे। उन्होंने बताया कि चाची ने जब से धर्मेंद्र की मौत के बारे में सुना है तब से बेहद दुखी हैं। जब वो गांव आए थे तो चाची ने उन्हें गले से भी लगाया था। ------------------- यह खबर भी पढ़ें- सोनीपत में एक्टर धर्मेंद्र की पूजा करता है पेंटर: अपना नाम धर्मेंद्र, बेटे का हीमेंद्र रखा; दुकान पर 350 से ज्यादा पोस्टर लगाए बॉलीवुड के 'हीमैन' कहे जाने वाले एक्टर धर्मेंद्र का हरियाणा के सोनीपत में एक जबरा फैन है, जिसके घर से लेकर दुकान तक हर जगह धर्मेंद्र की तस्वीरें लगी हुई हैं। उन्होंने दुकान में बने मंदिर में भी धर्मेंद्र की तस्वीर रखी है और वे रोजाना उनकी पूजा करते हैं। पेशे से पेंटर विनोद को बचपन से ही धर्मेंद्र के प्रति ऐसी दीवानगी रही कि उन्होंने अपना नाम बदलकर धर्मेंद्र रख लिया। पूरी खबर पढ़ें
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