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ट्रेन में जनरल टिकट का प्रिंट रखना जरूरी नहीं:रेलवे ने कहा- मोबाइल पर डिजिटल टिकट दिखाना काफी, वंदेभारत में मिलेगा पारंपरिक व्यंजन

7 months ago

ट्रेन में सफर के लिए जनरल का प्रिंट रखना जरूरी नहीं है। भारतीय रेलवे ने जनरल यानी अनरिजर्व्ड टिकट को लेकर फैले एक कन्फ्यूजन को दूर कर दिया है। रेलवे ने कहा कि UTS (अनरिजर्वड टिकटिंग सिस्टम) मोबाइल एप से बुक किए गए टिकट का प्रिंटआउट लेना जरूरी नहीं है। यात्री सफर के दौरान अपने मोबाइल पर एप में 'शो टिकट' (Show Ticket) ऑप्शन का इस्तेमाल करके टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) को दिखा सकते हैं और यह पूरी तरह से वैलिड है। यह सफाई एक वायरल वीडियो के बाद आई है, जिसमें एक TTE एक यात्री से UTS एप से बुक किए गए टिकट का प्रिंटेड कॉपी मांगता दिख रहा था। इस वीडियो के कारण कई यात्रियों में यह भ्रम फैल गया था कि क्या अब उन्हें मोबाइल टिकट का भी प्रिंटआउट लेकर चलना होगा। रेलवे मंत्रालय ने कहा- एप में टिकट दिखाना ही काफी रेल मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी किया। मंत्रालय ने बताया कि UTS एप के 'शो टिकट' सेक्शन में दिखाया गया अनरिजर्वड टिकट यात्रा के लिए एक वैध प्रमाण (Valid Authority) है। यात्री उसी डिवाइस पर डिजिटल कॉपी दिखा सकते हैं, जिससे टिकट बुक किया गया है। हालांकि, अगर किसी यात्री ने खिड़की या ऑनलाइन बुकिंग के बाद उसका प्रिंट निकाल लिया है, तो उसे सफर के दौरान वह फिजिकल टिकट साथ रखना होगा। ऐसा कोई नियम नहीं है जो यात्री को इसका प्रिंटआउट लेने के लिए कहता हो। रेलवे ने यह भी कहा कि TTE द्वारा प्रिंटेड कॉपी की मांग करना गलत है। वंदे भारत में अब मिलेंगी रीजनल डिश वहीं, रेलवे यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए वंदे भारत ट्रेनों में 'रीजनल डिश' (क्षेत्रीय व्यंजन) की शुरुआत कर रहा है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, इस पहल का मकसद यात्रियों को उनके रूट के हिसाब से स्थानीय और पारंपरिक स्वाद उपलब्ध कराना है। अब ट्रेन में सफर के दौरान आपको महाराष्ट्र का कांदा पोहा से लेकर बिहार का मशहूर चंपारण चिकन और पनीर तक सर्व किया जाएगा। मेन्यू में चंपारण चिकन और मेथी थेपला शामिल नई लिस्ट के मुताबिक, पटना-रांची वंदे भारत में 'चंपारण पनीर' और पटना-हावड़ा रूट पर 'चंपारण चिकन' मिलेगा। गुजरात के रूट पर चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों को मेथी थेपला और मसाला लौकी परोसी जा रही है। वहीं, केरल की वंदे भारत ट्रेनों में अप्पम, केरल पराठा और पालाडा पायसम जैसे पारंपरिक व्यंजन मिलेंगे। पश्चिम बंगाल के रूट पर कोशा पनीर और आलू पोतोल भाजा का स्वाद लिया जा सकेगा। सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने की कोशिश रेलवे का कहना है कि भारत की खान-पान की विविधता को दिखाने के लिए यह कदम उठाया गया है। दक्षिण भारत की ट्रेनों में दोंडाकाया करम पोडी फ्राई और आंध्र कोडी कूरा जैसे डिशेज शामिल किए गए हैं। ओडिशा जाने वाली ट्रेनों में आलू फूलकोपी उपलब्ध होगी। रेलवे का मानना है कि इससे न केवल यात्रियों को घर जैसा खाना मिलेगा, बल्कि स्थानीय संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।
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