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Sperm Survival After Death: पुरुष की मौत के बाद कितने घंटे तक जिंदा रहता है स्पर्म, क्या उससे भी मां बन सकती है महिला?

2 months ago

How Long Does Sperm Survive After Death: क्या किसी पुरुष की मौत के बाद भी उसका स्पर्म जिंदा रह सकता है? और क्या उससे महिला मां बन सकती है? यह सवाल जितना चौंकाने वाला है, उतना ही मुश्किल भी है. मेडिकल साइंस के अनुसार, मौत के बाद कुछ समय तक स्पर्म को शरीर से निकालकर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसके पीछे कई मेडिकल, कानूनी और नैतिक पहलू जुड़े होते हैं. 

क्या निकाला जा सकता है स्पर्म?

IVF Australia की रिपोर्ट के अनुसार, दरअसल, इस प्रक्रिया को पोस्टह्यूमस स्पर्म रिट्रीवल कहा जाता है, जिसमें पुरुष की मौत के बाद उसके शरीर से स्पर्म निकाला जाता है, ताकि उसकी पार्टनर भविष्य में प्रेग्नेंसी के लिए उसका इस्तेमाल कर सके. आज की आधुनिक प्रजनन तकनीकों की मदद से यह संभव हो पाया है, लेकिन हर मामले में यह आसान नहीं होता. 

कितनी देर तक जीवित रहता है स्पर्म?

सबसे अहम सवाल यही है कि मौत के बाद स्पर्म कितने समय तक जीवित रहता है. एक्सपर्ट के अनुसार, आमतौर पर 24 घंटे के भीतर स्पर्म को निकालना सबसे सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसी समय तक उसके जीवित रहने की संभावना ज्यादा होती है, हालांकि, कुछ मामलों में 36 घंटे तक भी स्पर्म मिलने की संभावना रहती है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, उसकी क्वालिटी और जीवित रहने की संभावना तेजी से घटती जाती है.

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यही वजह है कि इस प्रक्रिया में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. कई बार परिवार को कोर्ट की अनुमति लेनी पड़ती है, और इस दौरान हर गुजरता घंटा सफलता की संभावना को कम कर देता है. मेडिकल तौर पर स्पर्म निकालना संभव हो सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल करने की अनुमति मिलना हमेशा तय नहीं होता. कानूनी स्थिति भी इस मामले को और जटिल बना देती है. कई देशों में, जैसे ऑस्ट्रेलिया, इस विषय पर स्पष्ट कानून नहीं हैं. अगर पुरुष ने पहले से लिखित रूप में अपनी इच्छा जाहिर नहीं की है, तो यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि उसकी मौत के बाद स्पर्म का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एक स्टडी, जो ऑस्ट्रेलियन एंड न्यूज़ीलैंड जर्नल ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी में प्रकाशित हुई, उसमें IVF क्लीनिक्स के विशेषज्ञों से राय ली गई, ज्यादातर डॉक्टर इस प्रक्रिया के पक्ष में दिखे, लेकिन उन्होंने माना कि स्पष्ट कानून न होने के कारण फैसले लेना मुश्किल हो जाता है. एक्सपर्ट का मानना है कि जैसे लोग ऑर्गन डोनेशन पर पहले से चर्चा करते हैं, वैसे ही कपल्स को इस विषय पर भी बात करनी चाहिए. पुरुषों को यह तय करना चाहिए कि क्या वे अपनी मौत के बाद पिता बनना चाहेंगे, क्योंकि ऐसे बच्चे की परवरिश वह खुद नहीं कर पाएंगे.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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