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Ram Navami in Jodhpur: जोधपुर में रामनवमी की भव्यता, उमड़ा जनसैलाब, झांकियों में दिखी आस्था और 'पहलगाम' का कड़ा संदेश

4 months ago

Ram Navami in Jodhpur: जोधपुर की गलियों में इस बार रामनवमी का उल्लास सिर्फ एक त्योहार भर नहीं रहा, बल्कि यह आस्था, साहस और सामाजिक एकजुटता का एक महाकुंभ बन गया. राजस्थान के 'ब्लू सिटी' ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब बात मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की हो, तो पूरा शहर एक सूत्र में बंध जाता है.

भक्ति और भव्यता का संगम

जोधपुर में रामनवमी का महोत्सव इस बार अपनी भव्यता के नए कीर्तिमान स्थापित कर गया. शहर के हर कोने से निकली शोभायात्राओं में जनसैलाब उमड़ पड़ा. जय श्री राम के उद्घोषों से गूंजते वातावरण में हजारों श्रद्धालु केसरिया ध्वज थामे नाचते-गाते नजर आए. हिंदू संगठनों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को एक सामूहिक उत्सव का रूप दे दिया, जहां परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल देखने को मिला.

पहलगाम झांकी: आस्था के साथ वीरता का संदेश

इस वर्ष की शोभायात्रा में सबसे अधिक चर्चा का विषय रही 'पहलगाम आतंकी हमले' पर आधारित विशेष झांकी. जहां एक ओर भगवान राम के जीवन प्रसंगों की मनमोहक झांकियां मन को शांति प्रदान कर रही थीं, वहीं पहलगाम की इस झांकी ने लोगों के भीतर राष्ट्रवाद की भावना को उद्वेलित कर दिया.

इस झांकी के माध्यम से निर्दोषों पर हुए कायरतापूर्ण हमले के प्रति रोष और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का कड़ा संदेश दिया गया. यह प्रयास केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि एक प्रखर सामाजिक संदेश था, जिसने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया और आयोजन में एक नई गंभीरता जोड़ दी.

घंटाघर: आस्था का केंद्र 

शहर का ऐतिहासिक घंटाघर इस पूरे आयोजन का मुख्य केंद्र रहा. रामनवमी महोत्सव समिति द्वारा आयोजित विशेष पूजा-अर्चना के बीच, यहां का माहौल तब और अधिक ऊर्जावान हो गया जब प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा वहां पहुंचे.

मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद रहे. दोनों नेताओं ने भगवान रामलला की विधिवत आरती की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की. मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने न केवल स्थानीय लोगों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि इस महोत्सव की गरिमा को भी नई ऊंचाइयां प्रदान कीं.

इतनी बड़ी संख्या में जुटी भीड़ और प्रमुख राजनेताओं की उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा. पुलिस बल की तैनाती और अधिकारियों की सतर्कता की वजह से पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. संकरी गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक, सुरक्षा व्यवस्था ऐसी थी कि भक्तों की आस्था में कोई व्यवधान नहीं आया.

जोधपुर की यह रामनवमी न केवल अपनी भव्य झांकियों के लिए याद रखी जाएगी, बल्कि उस 'पहलगाम संदेश' के लिए भी याद की जाएगी जिसने समाज को जागरूक करने का काम किया. आस्था के इस सैलाब ने यह स्पष्ट कर दिया कि जोधपुर की संस्कृति में धर्म और देशप्रेम एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.

ये भी पढ़ें: भुवनेश्वर में रुकुणा रथ यात्रा आस्था का अद्भुत संगम! जानें इस 'पाप बिनाशी यात्रा' का रहस्य और महत्व

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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