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पैपराजी को मीडिया नहीं मानतीं जया बच्चन:भूतनाथ के डायरेक्टर ने बताया घातक, बोले- पैप्स के अंदर कोई मान मर्यादा नहीं होती है

7 months ago

ये काफी अजीब है। मेरा मीडिया से रिश्ता बहुत अच्छा है, मैं मीडिया की देन हूं, लेकिन पैपराजी से मेरा रिश्ता जीरो है। क्या इन लोगों ने कोई ट्रेनिंग ली है, जो ये देश के लोगों को रिप्रेजेंट कर रहे हैं। क्या आप इन्हें मीडिया कहते हैं। मैं मीडिया से आती हूं, मेरे फादर एक जर्नलिस्ट थे। मैं उन लोगों का बहुत सम्मान करती हूं। लेकिन ये जो बाहर गंदे तंग कपड़े पहनकर, हाथ में मोबाइल लेकर, उन्हें लगता है कि उनके पास मोबाइल है, तो वो आपकी पिक्चर ले लेंगे, और कुछ भी कह देंगे, ये जिस तरह के कमेंट करते हैं, ये किस तरह के लोग हैं, कहां से आते हैं, किस तरह का एजुकेशन है, क्या बैकग्राउंड है। क्या ये हमें रिप्रेजेंट करेंगे। ये बयान एक्ट्रेस और सपा सासंद जया बच्चन ने पैपराजी को लेकर दिया है। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां कुछ ने उन्हें घमंडी और क्लासिस्ट कहा, जबकि अन्य ने उनके फ्रैंक अंदाज की तारीफ की। ये पहली बार नहीं है, जब जया ने पैपराजी को लेकर कुछ कहा है। वो पहले भी कई मौकों पर उन्हें फटकारते नजर आ चुकी हैं, जिसमें से उनका "बदतमीजी मत करो" जैसे कमेंट वायरल हो चुके हैं। इस मामले में हमने फिल्म इंडस्ट्री के लोगों, मीडियाकर्मी और से बातचीत की, और अब जानते हैं उनकी राय। पैपराजी से बचने के लिए स्टार्स को बाउंसर्स की जरूरत पड़ती है। भूतनाथ के डायरेक्टर विवेक शर्मा कहते हैं- जर्नलिस्ट और पैपराजी में बिल्कुल फर्क है। पैपराजी के अंदर किसी प्रकार की मान मर्यादा नहीं होती है। यह लोग बहुत तंग करते हैं। ये न्यू बॉन्ड जैसी नई जनरेशन की भीड़ है। इनके पास कोई आत्म-सम्मान या मर्यादा नहीं होती। ये एयरपोर्ट के बाहर खड़े रहते हैं और जैसे ही कोई निकलता है, उनकी फोटो खींचते और वीडियो बनाते हैं। बेसिकली ये प्लांटेड होते हैं। जो पीआर डिजाइन करते हैं उनके द्वारा प्लांडेट होते हैं। मतलब ये लोग कंपनियों या सेलिब्रिटी के प्रचार के लिए जानबूझकर वहां भेजे जाते हैं। जब कोई एयरपोर्ट या जिम से निकलता है, तो ये फटाफट फोटो खींच लेते हैं। जैसे कोई हीरोइन जिम से निकल रही हो, तो उसके वीडियो और फोटो लेकर मीम्स बनाते हैं। यह बहुत ही गलत और अपमानजनक बात है, जो पूरी तरह से मान मर्यादा तोड़ती है। मीडिया और पैपराजी में बहुत बड़ा फर्क है। मीडिया वे लोग होते हैं जो पढ़े-लिखे होकर जर्नलिज्म करते हैं। वे ऐसी बेहूदा हरकतें नहीं करते। जबकि पैपराजी ऐसी ही गंदी हरकतें करते हैं, जिससे सितारों को बचने के लिए बाउंसर्स की जरूरत पड़ती है। मैं सतीश शाह के अंतिम संस्कार में गया था। वहां लोग चिता के सामने शूट करने की बात कर रहे थे। मैं और फराह खान बात कर रहे थे, तभी कोई आकर रिकॉर्ड करने लगा। किसी का जबरदस्ती वीडियो बनाना सही नहीं है। कई बार तो सितारे भी ऐसे पैपराजी को हायर करते हैं। वो किसी के अंतिम संस्कार में जाकर उनके चलते हुए शॉट्स भी डालते हैं। जो सांत्वना देने गए हों, उन्हें ही पीआर करने में बदल देते हैं। ये पैपराजी बहुत ज्यादा घातक हैं। इनको कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। इन लोगों की हरकतों को रोकना बहुत अहम है। पैपराजी का तरीका गलत एड गुर और फिल्ममेकर प्रभाकर शुक्ल कहते हैं- जया बच्चन जी ने जो सवाल उठाया है, वह उनके अनुसार सही हो सकता है। लेकिन मीडिया के कई पहलू हैं। पैपराजी भी एक पहलू है, जो आज की दुनिया में बहुत जल्दी वायरल होता है। यह सनसनीखेज होता है। इसके अलावा अखबार, टीवी चैनल और पोर्टल अपनी अपनी गति से काम करते हैं। अखबार में खबरें कल आएंगी, न्यूज चैनल पर आपको चीजें लाइव या शाम तक दिखेंगी। लेकिन पैपराजी और सोशल मीडिया आपकी खबरों को तुरंत वायरल कर देते हैं, जिसका फायदा और नुकसान दोनों होता है। मुझे लगता है कि पैपराजी भी एक तरह का मीडिया है। भले ही आप इसे मीडिया न मानें, यह मीडिया कहलाता है, चाहे संगठित हो या असंगठित। पैपराजी मीडिया होता है, लेकिन तरीका गलत हो सकता है। पैपराजी का शिक्षित होना जरूरी बॉलीवुड हेल्पलाइन के जर्नलिस्ट नसीम खान कहते हैं- पैपराजी खासतौर से मुंबई की चॉल से आते हैं और ज्यादा पढ़े लिखे नहीं होते। आर्थिक रूप से भी मजबूत नहीं होते। पैपराजी के लिए सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि जिनके लिए वह काम कर रहे हैं उनकी जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें इतना शिक्षित करें कि किसके साथ किस तरह का बर्ताव करना चाहिए। पैपराजी कल्चर की शुरुआत कैसे हुई? पैपराजी कल्चर की शुरुआत 1960 में इटालवी फिल्म 'ला डोल्से विटा' से मानी जाती है, जहां एक किरदार 'पैपराजो' नामक फोटोग्राफर सितारों का पीछा करता दिखाया गया, जिससे यह शब्द प्रसिद्ध हुआ। इससे पहले 19वीं सदी में ही घुसपैठिए फोटो पत्रकारिता प्रचलित थी, लेकिन पोर्टेबल कैमरों के आविष्कार ने इसे बढ़ावा दिया। भारत में पैपराजी कल्चर 2000 के दशक की शुरुआत में उभरा, जब डिजिटल मीडिया और वेबसाइट्स जैसे सांताबांता, ग्लैमशाम ने बॉलीवुड सितारों की तस्वीरों की मांग बढ़ाई। योगेन शाह को भारत का पहला पैपराजी माना जाता है, जिन्होंने 2002 में सुभाष घई की बेटी मेघना की शादी के बाहर सितारों की तस्वीरें लेकर इसकी नींव रखी। मानव मंगलानी, विरल भयानी और वरिंदर चावला जैसे फोटोग्राफरों ने मुंबई में इस संस्कृति को आगे बढ़ाया, जो एयरपोर्ट, जिम और इवेंट्स पर सितारों का पीछा करते हैं। 2016 में तैमूर अली खान के जन्म ने इसे चरम पर पहुंचाया, जिससे स्टार किड्स की तस्वीरें वायरल होने लगीं। अब यह सोशल मीडिया से जुड़कर ब्रांड प्रमोशन का माध्यम बन गया है। पैपराजी कल्चर ने गोपनीयता का उल्लंघन किया है, जैसा 1997 में प्रिंसेस डायना की मौत के बाद वैश्विक बहस हुई। बॉलीवुड में आलिया भट्ट, करीना कपूर जैसे सितारों ने बच्चों की तस्वीरों पर आपत्ति जताई, लेकिन भारत में अभी सख्त कानून नहीं हैं। यह सेलिब्रिटी इमेज बनाने में सहायक है, पर मानसिक दबाव भी बढ़ाता है। रणबीर के बॉडीगार्ड ने पैपराजी को रोका हाल ही में रणबीर कपूर फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली के ऑफिस के बाहर स्पॉट किए गए। एक्टर अपनी अपकमिंग फिल्म 'लव एंड वॉर' की शूटिंग के सिलसिले में भंसाली से मिलने पहुंचे थे। रणबीर जैसे ही वहां पहुंचे, पहले से मौजूद पैपराजी उन्हें क्लिक करने के लिए आवाज देने लगी। इस बीच, रणबीर के बॉडीगार्ड और सुरक्षाकर्मी उन्हें एक तरफ हटने के लिए कहते देखे गए। बॉडीगार्ड का रवैया देख वहां मौजूद पैपराजी बुरी तरह चिढ़ गए। उन्होंने दावा किया उन्हें एक्टर की फोटो लेने के लिए बुलाया गया था। उनमें से एक ने कहा कि उनके पास सबूत के तौर पर मैसेज है। वायरल वीडियो में एक पैपराजी को कहते सुना जा सकता है- ‘अरे भाई बुलाया है... क्या कर रहे हो। अरे मैसेज है हम सबके पास। ऐसा क्या कर रहे हो।’ हालांकि, कुछ ही मिनट बाद रणबीर अपनी कार से बाहर निकलते हैं और अंदर जाने से पहले पैपराजी के लिए पोज देते हैं। सनी देओल ने पैपराजी का कैमरा छीना धर्मेंद्र के निधन (24 नवंबर 2025) के बाद सनी देओल पैपराजी पर भड़के। अस्पताल डिस्चार्ज के समय घर के बाहर निजी पलों को रिकॉर्ड करने पर उन्होंने "शर्म नहीं आती?" कहा। 3 दिसंबर 2025 को हरिद्वार में अस्थि विसर्जन के दौरान भी सनी ने चुपके से वीडियो बनाने वाले पैपराजी का कैमरा छीन लिया।​ निकितिन धीर ने पैपराजी को गिद्धों जैसा बताया जैकी श्रॉफ ने नवंबर 2025 में धर्मेंद्र स्वास्थ्य खबरों पर पैपराजी की कवरेज से नाराजगी जताई। निकितिन धीर ने उन्हें "गिद्धों जैसा" बताकर आलोचना की। आलिया भट्ट ने अगस्त 2025 में अपनी बिल्डिंग में घुसने पर पैपराजी को "निकलो बाहर" कहकर भगाया। इसके अलावा सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अप्रैल 2025 में प्रेग्नेंट कियारा आडवाणी की फोटो खींचने पर पैपराजी पर गुस्सा निकाला।​ करण जौहर, मधुर भंडारकर, अमीषा पटेल ने भी पैपराजी के असभ्य व्यवहार पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी।
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फिर पैपराजी पर भड़के सनी देओल:दावा-हरिद्वार में धर्मेंद्र के अस्थि विसर्जन के दौरान पैप्स पर हुए नाराज, कैमरा पकड़कर पूछा- कितने पैसे चाहिए?

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