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ओटीटी रिव्यू: मिसेज देशपांडे:दमदार आइडिया, ढीली पटकथा और बिखरा हुए निर्देशन ने सीरीज को बनाया औसत

7 months ago

मिसेज देशपांडे एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर के रूप में खुद को पेश करती है, जिसकी शुरुआत रहस्य और तनाव के वादे के साथ होती है। मुंबई में हो रही सिलसिलेवार हत्याएं और उनका 25 साल पुराने केस से जुड़ाव कहानी को अतीत और वर्तमान के बीच ले जाता है। कहानी कहानी का केंद्र मिसेज देशपांडे है, जो इन्हीं पुराने हत्याकांडों की दोषी रही है और फिलहाल हैदराबाद की सेंट्रल जेल में बंद है। मौजूदा हत्याओं को कॉपीकैट अपराध मानते हुए पुलिस उसे जांच में शामिल करती है। बाहर से सहयोग करती दिखने वाली मिसेज देशपांडे के इरादे पूरे समय संदेह के घेरे में रहते हैं। कहानी उसके बचपन, मानसिक असंतुलन और अपराध की मानसिकता को दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन पटकथा इन पहलुओं को ठोस रूप देने में चूक जाती है। कई मोड़ पहले से अनुमानित लगते हैं और सस्पेंस बार-बार टूटता है। अभिनय माधुरी दीक्षित का किरदार उनके करियर के अलग दौर का प्रतिनिधित्व करता है। वह सादगी और ठंडे भावों के जरिए खौफ पैदा करने की कोशिश करती हैं, लेकिन लेखन की कमजोरी उनके अभिनय को सीमित कर देती है। सिद्धार्थ चांदेकर युवा पुलिस अधिकारी के रूप में ईमानदार लगते हैं, पर उनके किरदार को पर्याप्त गहराई नहीं दी गई। प्रियांशु चटर्जी अनुभवी अफसर के रूप में संतुलित प्रदर्शन करते हैं, लेकिन उनका रोल भी स्क्रिप्ट की कमजोरी में दब जाता है। कविन दवे अपने अजीब और रहस्यमय किरदार में संभावनाएं दिखाते हैं, पर उनका ट्रैक अधूरा सा लगता है। बाकी सहायक कलाकार कहानी का बोझ उठाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें यादगार बनने का मौका नहीं मिलता। निर्देशन और तकनीकी पक्ष निर्देशन में स्पष्टता और कसाव की कमी साफ नजर आती है। जहां कहानी को तेज और धारदार होना चाहिए था, वहां कई दृश्य खिंचे हुए लगते हैं। सिनेमैटोग्राफी और लोकेशन चयन माहौल रचने में मदद करते हैं, लेकिन कमजोर संपादन, असमान गति और ढीली पटकथा इस अच्छाई को दबा देती है। कई जगह तार्किक चूकें कहानी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। कमियां और कुछ अच्छाइयां सबसे बड़ी कमी इसकी सुस्त रफ्तार, सपाट संवाद और कमजोर चरित्र-निर्माण है। सस्पेंस को अनावश्यक रूप से खींचा गया है। सकारात्मक पक्ष में सीरीज का मूल विचार नया है और फ्लैशबैक वाले हिस्से अपेक्षाकृत ज्यादा असर छोड़ते हैं, लेकिन वे भी अधूरे लगते हैं। संगीत पृष्ठभूमि संगीत माहौल बनाने की कोशिश करता है, पर डर और रोमांच को उभारने में असफल रहता है। संगीत कहानी के साथ चलता है, पर याद नहीं रहता। फाइनल वर्डिक्ट मिसेज देशपांडे एक ऐसी वेब सीरीज है, जिसमें संभावनाएं बहुत थीं, लेकिन कमजोर लेखन और बिखरे निर्देशन ने इसे साधारण बना दिया। माधुरी दीक्षित और बाकी कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद यह शो थ्रिलर के स्तर पर खरा नहीं उतरता।
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