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नेपोटिज्म बनाम आउटसाइडर पर किरण राव बोलीं:बाहरी कलाकारों के लिए इंडस्ट्री में पहचान बनाना आसान, नेपो किड्स को प्रिविलेज के चश्मे से देखा जाता

7 months ago

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों स्टार्स की बढ़ती फीस बहस का टॉपिक बना हुआ है। ऐसे में आमिर खान की एक्स वाइफ और ‘लापता लेडीज’ फिल्म की डायरेक्टर किरण राव ने कलाकारों की बढ़ती फीस डिमांड, स्टार सिस्टम के खत्म होने और नेपो किड्स पर बात की है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि स्टार की बढ़ती फीस डिमांड के कारण वो नए कलाकारों के साथ काम करने को मजबूर हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, किरण ने न्यू कमर के साथ काम करने पर कहा- ‘स्वाभाविक रूप से न्यू कमर इंडिपेंडेंट फिल्म के परिदृश्य में फिट बैठते हैं और मैं उसी तरह की फिल्में बनाती हूं। भले ही धोबी घाट से लेकर लापता लेडीज तक बजट बढ़ गया हो, लेकिन मूल रूप से, मेरी फिल्म मेकिंग बहुत इंडिपेंडेंट है, जिसका मकसद यह है कि सेट पर सभी के साथ समान व्यवहार किया जाए। हम काम के घंटे को लेकर निष्पक्ष होने में विश्वास रखते हैं। लेकिन काम को सख्ती से, कम से कम संसाधनों के साथ और फिजूलखर्ची से बचने की कोशिश करते हैं। नए कलाकारों के लिए इन नियमों का पालन करना ज्यादा आसान होता है।’ किरण से जब उनकी फिल्म ‘लापता लेडीज’ में तीन नए कलाकारों के लॉन्च और एक्स हसबैंड आमिर खान के बेटे जुनैद का उसी समय डेब्यू करने पर पूछा गया कि क्या उन्हें दर्शकों के परसेप्शन में कोई अंतर महसूस हुआ? इस पर वो कहती हैं- 'जब कोई तथाकथित ‘नेपो किड्स’ इंडस्ट्री में आते हैं, तो उसके सामने एक खास तरह का बोझ होता है, जिससे वह बच नहीं सकते। उन्हें हमेशा प्रिविलेज के चश्मे से देखा जाता है कि वे हर तरह के शॉर्टकट के इंडस्ट्री में पहुंचे रहे हैं, जो बाकी बच्चों के पास नहीं हैं। मैं यह समझती हूं। लेकिन अधिकांश मामलों में, अब जब मैं इतने सारे फिल्मी परिवारों को जानती हूं, तो मैंने देखा है कि उनकी जर्नी कितनी मुश्किल और कभी-कभी आउटसाइडर जितनी ही कठिन होती है। उनके सामने जो चुनौतियां हैं वे अलग हैं। वे बदतर या बेहतर नहीं हो सकती हैं, लेकिन उनके सामने परसेप्शन की चुनौतियां हैं। किरण इस बात को समझाते हुए आगे कहती हैं- ‘किसी भी न्यू कमर्स के मामले में कोई धारणा नहीं होती है और लोग आपके साथ बढ़ने के लिए तैयार रहते हैं, आपकी ताकत को समझते हैं और आपकी कमजोरियों के लिए आपसे प्यार करते हैं। जबकि एक नेपो किड्स के लिए उनकी धारणा और अपेक्षा अलग होती हैं। तो ये वो चीजें हैं जिनसे किसी भी फिल्मी परिवार के बच्चे को जूझना पड़ता है।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि किसी बाहरी व्यक्ति के लिए फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना किसी स्टार किड्स से कहीं अधिक आसान है तो किरण ने इसका जवाब हां में दिया। वो कहती हैं- ‘मैं वास्तव में इससे सहमत हूं। मुझे भी लगता है कि आज की दुनिया में लोग प्रतिभाओं को खोजना चाहते हैं। उन्हें यह सुनना पसंद नहीं करते कि यह इंसान मौजूद है। उन्हें स्टार और उनके बच्चों के बारे में जिज्ञासा होती है, लेकिन किसी व्यक्ति को स्टार बनाने के लिए वे एक जिम्मेदारी भी महसूस करते हैं।’ हालांकि, किरण का ये भी मानना है कि आज के समय में स्टार सिस्टम खत्म हो चुका है। अब स्टार किसी रील, सीरीज, फिल्म या डायरेक्टर कहीं से भी आ सकते हैं।
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