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मुंबई के डॉक्टर के खाते से उड़ गए 11 लाख रुपये! e-SIM अपग्रेड के नाम पर हुई हाई-टेक ठगी, जानिए क्या है बचने का तरीका

7 months ago

e-SIM Upgrade Fraud: मुंबई में एक डॉक्टर के साथ हुई साइबर ठगी ने फिर साबित कर दिया है कि डिजिटल फ्रॉड अब किसी को भी निशाना बना सकता है. दक्षिण मुंबई के एक डॉक्टर से e-SIM अपग्रेड स्कैम के ज़रिए लगभग 11 लाख रुपये की ठगी की गई. यह घटना सितंबर में हुई थी जिसके बाद मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया. इस मामले ने यह भी दिखाया कि कैसे लोग OTP जैसी संवेदनशील जानकारी साझा करके अनजाने में ठगों को अपने बैंक अकाउंट तक पहुंच दे देते हैं.

कैसे हुआ पूरा e-SIM फ्रॉड?

डॉक्टर को एक कॉल आया जिसमें व्यक्ति खुद को टेलीकॉम कंपनी का प्रतिनिधि बता रहा था. उसने डॉक्टर से कहा कि उनकी कंपनी अब e-SIM अपग्रेड सर्विस दे रही है जिससे उन्हें फिजिकल सिम की जरूरत नहीं पड़ेगी. सुविधा की बात सुनकर डॉक्टर ने अपने मोबाइल नेटवर्क की ऑफिशियल ऐप खोली और कॉलर के बताए निर्देशों का पालन किया.

थोड़ी देर में उनके फोन पर एक OTP आया, जिसे उन्होंने बिना सोचे-समझे कॉलर को बता दिया. कॉलर ने भरोसा दिलाया कि 24 घंटे के भीतर पुराना सिम बंद होकर नया e-SIM एक्टिवेट हो जाएगा. लेकिन दो दिन बाद जब डॉक्टर ने देखा तो उनका ईमेल पासवर्ड बदल चुका था और बैंक खाते से 10.5 लाख रुपये से अधिक रकम कई खातों में ट्रांसफर हो चुकी थी.

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह रकम एक अस्पताल के ऑफिस बॉय के अकाउंट में ट्रांसफर की गई थी जिसने अपनी बैंक डिटेल्स ठगों को किराए पर दी थीं.

क्या है e-SIM और कैसे होता है इसका इस्तेमाल?

e-SIM (Embedded SIM) एक डिजिटल सिम होती है जो आपके फोन या स्मार्टवॉच में पहले से ही इनबिल्ट होती है. इसे एक्टिवेट करने के लिए किसी फिजिकल सिम कार्ड की जरूरत नहीं होती. यह तकनीक खासकर फ्रीक्वेंट ट्रैवलर्स और डुअल-सिम यूज़र्स के बीच लोकप्रिय है. हालांकि, इसी सुविधा का फायदा ठग भी उठा रहे हैं.

कैसे काम करता है e-SIM अपग्रेड स्कैम?

इस तरह की ठगी में स्कैमर्स खुद को टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी बताकर यूज़र से संपर्क करते हैं. वे कहते हैं कि आपके सिम में कोई दिक्कत है और उसे “अपग्रेड” करना ज़रूरी है.

जैसे ही यूजर OTP शेयर करता है या फेक लिंक पर क्लिक करता है ठग उसी OTP से एक डुप्लिकेट e-SIM अपने फोन पर एक्टिवेट कर लेते हैं. इससे पीड़ित का मूल सिम डीएक्टिवेट हो जाता है और फ्रॉडस्टर को बैंक अकाउंट, ईमेल, वॉलेट और OTP-आधारित सभी सर्विसेज़ का एक्सेस मिल जाता है.

कैसे बचें e-SIM स्कैम से?

भारत सरकार की Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने ऐसे मामलों से बचने के लिए कुछ सावधानियां बताई हैं.

  • OTP किसी को भी शेयर न करें, चाहे कॉल करने वाला खुद को कंपनी का प्रतिनिधि ही क्यों न बताए.
  • अज्ञात लिंक या e-SIM अपग्रेड संदेशों पर क्लिक न करें.
  • यदि आपके नेटवर्क में कोई असामान्यता दिखे या सिम अचानक बंद हो जाए तो तुरंत अपने टेलीकॉम ऑपरेटर से संपर्क करें.
  • किसी भी साइबर अपराध की शिकायत तुरंत cybercrime.gov.in पर दर्ज करें.

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