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Holi 2026 Warning: सिंथेटिक रंगों से स्किन-आंखों और फेफड़ों को कैसे हो सकता है नुकसान? जानें इनसे बचने का तरीका

5 months ago

इस बार होली तीन और चार मार्च को मनाई जाने वाली है. वहीं होली पर देश भर में सड़कों पर रंग और गुलाल की बौछार दिखाई देती है. लेकिन इन चमकीले रंगों के पीछे छिपे खतरे अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं. दरअसल बाजार में बिकने वाले कई सिंथेटिक होली के रंगों में भारी धातुएं, इंडस्ट्रियल डाई और खतरनाक रसायन पाए जाते हैं जो स्किन, आंखों और फेफड़ों के लिए खतरनाक समस्याएं पैदा कर सकते हैं. डॉक्टरों का कहना है की होली के रंगों से होने वाले साइड इफेक्ट, मामूली खुजली से लेकर गंभीर सांस संबंधी दिक्कतों तक पहुंच सकते हैं. अस्थमा, एलर्जी या संवेदनशील स्किन वाले लोगों के लिए यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है. 

स्किन पर कैसे असर डालते हैं सिंथेटिक रंग?

सिंथेटिक रंगों में अक्सर सीसा, पारा, क्रोमियम और सिलिका जैसे तत्व मिलाए जाते हैं. यह रसायन स्किन पर जलन, लाल चकते, खुजली और कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं, जिन लोगों को पहले से एक्जिमा या अन्य स्किन प्रॉब्लम है उनमें रिएक्शन ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं. वहीं बार-बार संपर्क में आने से स्किन रूखी और ज्यादा संवेदनशील हो सकती है. कुछ मामलों में लंबे समय तक निशान भी रह सकते हैं. 

आंखों के लिए कितना खतरनाक रंग?

होली खेलते समय रंग आंखों में चले जाने से जलन, सूजन और लालपन हो सकता है. कई मामलों में कंजंक्टिवाइटिस या कॉर्नियल एब्रेशन की शिकायत सामने आती है. रंगों में मौजूद एसिड, क्षारीय तत्व और जहरीली डाई आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है. अगर समय पर इलाज न मिले तो इन्फेक्शन या नजर पर असर पड़ने का खतरा भी रहता है. काॅन्टैक्ट लेंस पहनने वालों के लिए खतरा ज्यादा है, क्योंकि पाउडर लेंस के पीछे फंस सकता है. इस तरह के मामलों में पहले भी कुछ गंभीर इन्फेक्शन देखे गए हैं. 

रंगों का फेफड़ों और सांस पर असर 

होली पर सूखा लाल रंग आसानी से हवा में उड़ता है और सांस के जरिए शरीर में चला जाता है. कई रंगों में कीटनाशक, एस्बेस्टस या भारी धातुएं में पाई जाती है. इन्हें सांस के साथ अंदर लेने पर अस्थमा अटैक, ब्रोंकाइटिस, राइनाइटिस, घरघराहट और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं हो सकती है. वहीं लगातार कांटेक्ट से श्वसन नलिका सूज सकती हैं और क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों को सूखे रंगों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा गलती से रंग निगल लेने या ज्यादा मात्रा में सांस के जरिए शरीर के अंदर जाने पर यह रसायन किडनी और लीवर को भी प्रभावित कर सकते हैं. वहीं होली पर कुछ इंडस्ट्रियल डाई वाले रंग के लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा भी हो सकता है. इसके अलावा प्रेग्नेंट महिलाओं को रंग से विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है. 

सुरक्षित तरीके से कैसे मनाएं होली?

  • सुरक्षित तरीके से होली मनाने के लिए नेचुरल या हर्बल गुलाल का यूज करें.
  • होली खेलने से पहले स्किन और बालों पर तेल या मॉइश्चराइजर लगाएं. 
  • होली पर फुल स्लीव कपड़े पहनें और आंखों की सुरक्षा का ध्यान रखें. 
  • इसके अलावा होली पर काॅन्टैक्ट लेंस न पहनें. 
  • होली का रंग लगने के बाद साफ पानी से तुरंत धो लें. 
  • वहीं होली खेलने के लिए ज्यादा धूल वाली और भीड़ भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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