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Heatwave Health Risks: गर्मी में 5 लीटर पानी पीने के कुछ ही घंटों बाद ICU में पहुंचा युवक, डॉक्टर ने बताया कारण

2 months ago

Heatwave Health Risks: इस भीषण गर्मी और तेज धूप में आपने अक्सर सुना होगा कि एक व्यक्ति को रोज कम से कम 3 से 4 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो. लेकिन क्या होगा अगर आपको पता चलें कि,  कोई 5 लीटर पानी पीने के बाद भी अस्पताल के ICU तक पहुंच गया? ऐसे में ये हैरान होने वाली बात है. दिल्ली से सामने आया एक मामला यही सवाल खड़ा करता है,  कि सिर्फ पानी पीना ही काफी नहीं होता. जहां ज्यादा पानी पीने के बावजूद एक युवक की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे तुरंत भर्ती कराना पड़ा. एक 25 साल का युवक पूरे दिन करीब 5 लीटर पानी पीता रहा, फिर भी कुछ ही घंटों में उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे ICU में भर्ती कराना पड़ा. यह घटना दिखाती है कि गर्मी में शरीर को सही तरीके से हाइड्रेट करना कितना जरूरी है?

क्या हुआ उस युवक के साथ?

रिपोर्ट के अनुसार, 25 साल का युवक दिनभर तेज गर्मी में बाइक से काम कर रहा था. कई युवा लोगों की तरह उसे भी लगता था कि ज्यादा पानी पीना सही है.  इसलिए वह बार-बार अपनी बोतल भरता था और पूरे दिन में करीब 5 लीटर पानी पी लेता था, लेकिन उसने कुछ भी ठोस नहीं खाया. न फल, न कोई इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक और न ही नमक वाला पेय लिया. जिसके कारण शाम तक उसे चक्कर आने लगे, उल्टी जैसा महसूस होने लगा जिसे उसने थकान समझ कर नजरअंदाज कर दिया फिर धिरे-धिरे उसकी हालत ओर बिगड़ने लगी. उसकी बोली भी धीमी हो गई और वह कन्फ्यूज होने लगा, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने जांच में पाया कि युवक के शरीर में सोडियम का स्तर काफी कम हो गया था. सामान्य स्तर 135–145 mEq/L होता है, लेकिन उसका स्तर 124 तक गिर गया था. इस स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है. यह तब होता है जब पसीने के जरिए शरीर से नमक निकल जाता है और उसकी भरपाई सिर्फ पानी से की जाती है. इससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है. 

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असली वजह: शरीर में नमक की कमी

डॉक्टरों ने जांच में पाया कि युवक के शरीर में सोडियम का स्तर काफी कम हो गया था. सामान्य स्तर 135–145 mEq/L होता है, लेकिन उसका स्तर 124 तक गिर गया था. इस स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है. यह तब होता है जब पसीने के जरिए शरीर से नमक निकल जाता है और उसकी भरपाई सिर्फ पानी से की जाती है. इससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है. यह यह सिर्फ एक व्यक्ति की बात नहीं है. पूरे भारत में, जहां गर्मियों में तापमान अक्सर 44 से 47 डिग्री तक पहुंच जाता है, अस्पतालों में गर्मी से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ रही हैं.  

क्यों खतरनाक है यह स्थिति?

पसीना आना शरीर का खुद को ठंडा रखने का तरीका है. जब पसीना त्वचा से सूखता है, तो शरीर की गर्मी कम होती है और तापमान नियंत्रित रहता है. लेकिन पसीना सिर्फ पानी नहीं होता. इसमें नमक और जरूरी खनिज जैसे सोडियम, पोटेशियम और क्लोराइड भी होते हैं. सोडियम शरीर में पानी के संतुलन और दिमाग के सही काम के लिए जरूरी होता है. जब इसकी मात्रा कम हो जाती है, तो पानी कोशिकाओं में जाने लगता है, जिससे दिमाग की कोशिकाएं सूज सकती हैं. शुरुआत में सिरदर्द, थकान, चक्कर और उल्टी जैसे लक्षण दिखते हैं, लेकिन हालत गंभीर होने पर बेहोशी, दौरे और कोमा तक हो सकता है.

हाइड्रेशन का सही तरीका क्या है?

अगर शरीर में पानी की कमी को सही तरीके से पूरा नहीं किया जाए, तो समस्या और बढ़ सकती है.  भारत में गर्मियों में अक्सर कहा जाता है कि “ज्यादा पानी पिएं”, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है.  सिर्फ पानी पीने से शरीर में जरूरी नमक और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा नहीं करता है. अगर आप ज्यादा पानी पीते हैं लेकिन नमक नहीं लेते, तो खून में सोडियम कम हो सकता है, जो खतरनाक हो सकता है. इसलिए सिर्फ पानी नहीं, बल्कि ऐसे पेय भी जरूरी हैं जिनमें इलेक्ट्रोलाइट्स हों, ताकि शरीर का संतुलन बना रहे. जैसे नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ, ORS, फलों का जूस जिससे शरीर को नमक और मिनरल्स मिलते रहें.  साथ ही समय पर खाना और धूप से बचाव भी जरूरी है.

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