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होलाष्टक 2026 शुरू: 8 दिन क्यों माने जाते हैं अशुभ? जानें क्या करें और क्या नहीं?

5 months ago

Holashtak: 24 फरवरी से होलाष्टक शुरू हो चुका है, जो 3 मार्च तक रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, होलाष्टक के 8 दिन किसी भी तरह के शुभ कार्यों को करना वर्जित माना जाता है. शादी, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य इस दौरान नहीं किए जाते हैं.

कुछ परंपराओं में माना जाता है कि, इस दौरान वातावरण में अस्थिरता और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है, इसलिए सतर्क रहने की सलाह दी जाती है.

लोक मान्यताओं के मुताबिक, जिन घरों में छोटे बच्चे या गर्भवती महिलाएं हो, उन्हें इन आठ दिनों में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. हालांकि इन दावों का कोई वैज्ञानिर आधार स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं है, फिर भी परंपरागत मान्यताओं का पालन करने वाले लोग एहतियात को प्राथमिकता देते हैं. 

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किन बातों का रखें विशेष ध्यान?

परंपरागत मान्यताओं के मुताबिक, होलाष्टक के दौरान बाहर निकलते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए. जैसे कुछ मीठा खाकर तुरंत घर से बाहर न निकलें, बाल खुले में न रखें, तेज खुशबू वाले परफ्यूम लगाने से बचें या हल्की सुगंध का ही इस्तेमाल करे.

यदि कोई अनजान व्यक्ति बाहर मीठा खिलाने की कोशिश करे, खासकर सफेद रंग की मिठाई तो उसे स्वीकार करने से बचें.

बच्चों के कपड़े खुले में सुखाने से पहले इस बात का विशेष ध्यान रखें और उन्हें लंबे समय तक बिना निगरानी के न छोड़ें. देर रात बाहर जाने से परहेज करना चाहिए. चौराहों या सुनसान जगहों से जाते समय सतर्कता बरतें. कुछ मान्यताओं के मुताबिक, यदि पीछे से अचानक आवाज आए तो तुरंत पलटकर प्रतिक्रिया देने से बचें.

होलाष्टक के दौरान सावधानी ही सुरक्षा

धार्मिक आस्थाओं और लोक परंपराओं में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए यह समय आत्म-संयम और सतर्कता का माना जाता है. विशेशज्ञों का मानना है कि, अंधविश्वास से बचते हुए सामान्य सुरक्षा के नियमों का पालन करना ही सबसे बेहतर उपाय है. 

होलाष्टक के दौरान मुख्य रूप से साधना, संयम और मानसिक शु्द्धि का माना गया है. ऐसे में डरने की बजाए जागरूक रहना और व्यावहारिक सावधानी बरतना ही समझदारी है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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