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Fainting On Standing: अचानक खड़े होते ही आने लगता है चक्कर, यह किस बीमारी का संकेत?

5 months ago

Diabetes And Orthostatic Hypotension: अचानक कुर्सी से उठते ही चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छा जाना या गिरने जैसा महसूस होना, अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो इसे हल्के में लेने की गलती न करें. यह एक आम समस्या जरूर है, लेकिन इसके पीछे एक मेडिकल कारण हो सकता है. इस स्थिति को ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन या पोश्चर हाइपोटेंशन कहा जाता है. यह तब होता है, जब बैठी या लेटी हालत से अचानक खड़े होने पर शरीर ब्लड प्रेशर को जल्दी से एडजस्ट नहीं कर पाता और दिमाग तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता. इसी वजह से चक्कर, धुंधला दिखना या बेहोशी जैसा अहसास होने लगता है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक कुमार के अनुसार, जैसे ही हम खड़े होते हैं, ग्रेविटी की वजह से खून पैरों की ओर चला जाता है. आमतौर पर शरीर की ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम तुरंत नसों को सिकोड़कर और दिल की धड़कन बढ़ाकर इसकी भरपाई कर लेती है. लेकिन अगर यह प्रतिक्रिया धीमी हो जाए, तो चक्कर आ सकता है. डायटीशियन और वेट मैनेजमेंट एक्सपर्ट के अनुसार, खड़े होते समय पैरों में खून जमा हो जाता है, जिससे ब्रेन तक ऑक्सीजन कम पहुंचती है. पर्याप्त पानी पीना, इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना और धीरे-धीरे खड़ा होना इस समस्या को कम कर सकता है.

किस कारण से होता है ऐसा?

डिहाइड्रेशन, खून की कमी, लंबे समय तक बिस्तर पर रहना, कुछ दवाएं और उम्र बढ़ने के साथ शरीर की प्रतिक्रिया क्षमता कम होना भी चक्कर की वजह बन सकते हैं. रिसर्च में यह भी सामने आया है कि खड़े होते ही पहले एक मिनट में ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना डिमेंशिया के खतरे से जुड़ा हो सकता है. जिन लोगों में खड़े होने के 30 सेकंड के भीतर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 20 mmHg या उससे ज्यादा गिरा, उनमें भविष्य में डिमेंशिया का जोखिम ज्यादा पाया गया.

कब डॉक्टर से दिखाना होता है जरूरी?

एक्सपर्ट का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति बार-बार खड़े होते ही चक्कर महसूस करता है, तो डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए और खड़े होकर ब्लड प्रेशर की जांच करानी चाहिए. खासकर बुजुर्गों में यह गिरने, हड्डी टूटने और गंभीर चोट का खतरा बढ़ा सकता है. इससे बचाव के लिए धीरे खड़े होना, पर्याप्त पानी पीना, पैरों की एक्सरसाइज करना, घर में फिसलन से बचाव के इंतजाम करना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से दवाओं की समीक्षा कराना जरूरी है. समय रहते ध्यान दिया जाए, तो इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ हम इसपर काबू पा सकते हैं. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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