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Chhath Puja: छठ पूजा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए इस पावन पर्व के पीछे की सच्ची कहानी

9 months ago

Chhath Puja 2025: छठ पूजा की सजावट हर तरफ दिखाई दे रही है. हर कोई अब तैयारी में लगा हुआ है. छठी मैया और सूर्यदेव की उपासना के इस महापर्व का खास महत्व होता है. आम जीवन पर भी इसका गहरा असर पड़ता है. सूर्य की उपासना से हर मनोकामना पूरी होती है.

लोग खोया हुआ मान सम्मान, धन वैभव, नौकरी और संतान की इच्छा के लिए इस त्योहार को करते हैं. शुद्धता और पवित्रता से छठ पूजा की जाती है. छठ पूजा का जिक्र महाभारत समेत कई ग्रंथों में है. इसकी शुरुआत को लेकर कई कहानी प्रचलित है, जो इसके महत्व को दर्शाती है. तो आइए जानें इस पावन पर्व के पीछे की सच्ची कहानी.

छठ पूजा की शुरूआत कैसे हुई?
मान्यता के मुताबिक, एक कथा प्रचलित है कि छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल के दौरान हुई थी. इस पर्व को सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य की पूजा करके शुरू किया था. कहा जाता है कि कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे.

वे रोज बहुत देर तक पानी में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देते थे. सूर्य की कृपा से ही वे महान योद्धा बने. वहीं से पानी में खड़े होकर अर्घ्य देने की परंपरा शुरू हुई.

पांडवों ने भी किया था छठ
महाभारत काल से जुड़ी एक और कथा प्रचलित है. जिसमें पांडवों और द्रौपदी ने अपना खोया हुआ मान सम्मान, धन दौलत और अपने राजपाट को वापस पाने के लिए छठ किया था. इसके बाद सभी हस्तिनापुर को लौटे. इस व्रत के जरिए पांडवों को राजपाट भी वापस मिला.

रामायण काल में भी हुआ था छठ
पौराणिक कथाओं के अनुसार 14 वर्ष वनवास के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूय यज्ञ करने का फैसला लिया.

मुग्दल ऋषि ने मां सीता को गंगाजल छिड़क कर पवित्र किया एवं कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने का आदेश दिया. इसके बाद माता सीता ने भी छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की थी.

सपने में आई माता षष्ठी
पुराणों के अनुसार, प्रियव्रत नामक एक राजा की कोई संतान नहीं थी. इसके लिए उसने हर जतन कर डाला, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. राजा आत्महत्या करने का मन बना चुका था.

तभी सपने में षष्ठी देवी प्रकट हुई और सूर्य उपासना के लिए कहा. राजा ने ऐसा ही किया और संतान की प्राप्ति हुई. इसके बाद से ही राजा ने अपने राज्य में यह त्योहार मनाने की घोषणा कर दी.

कलयुग में यहां हुआ था छठ
कलयुग में छठ को लेकर यह कहानी सबसे ज्यादा प्रचलित है कि सबसे पहले बिहार के पुराने गया जिले के ‘देव’ में छठ पर्व किया गया था. ‘देव’ अब औरंगाबाद में स्थित है. कहा जाता है कि किसी जमाने में एक व्यक्ति को कुष्ठ रोग हुआ था.

इस रोग के निवारण के लिए उसने कार्तिक महीने की षष्ठी तिथि को भगवान सूर्य की उपासना की थी. इससे वह शीघ्र ही ठीक हो गया. उसी समय से इस पर्व को आस्था के साथ मनाया जाने लगा.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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