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चीन-अमेरिका के बीच और बढ़ेगा तनाव? ट्रंप प्रशासन के अगले कदम को लेकर एक्सपर्ट्स की वॉर्निंग

7 months ago

China-US Trade Tensions: टैरिफ को लेकर दुनिया की दो आर्थिक महाशक्ति अमेरिका और चीन के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. अमेरिका अब चीन के ऊपर दबाव बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है और इसको लेकर वह कड़े फैसले भी ले सकता है. बीजिंग की तरफ से 155 प्रतिशत तक टैरिफ की धमकी के बाद वाशिंगटन अब चीन के खिलाफ अगले कदम की योजना बना रहा है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन चीन के हालिया कदमों का जवाब देने की तैयारी कर रहा है, जिसमें दुर्लभ धातुओं (Rare Earth Metals) के एक्सपोर्ट पर रोक शामिल है. इसके बाद अमेरिका, चीन को एक्सपोर्ट होने वाले सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स पर कटौती करने जैसे कदम उठाने पर विचार कर रहा है.

चीन-यूएस आमने-सामने

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि लैपटॉप से लेकर जेट इंजन तक कई वस्तुओं पर रोक लगाई जा सकती है. इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप के 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर दिए गए बयान को लागू करना है, जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन से आयातित सामानों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है.

इसके अलावा, एक नवंबर तक किसी भी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर के एक्सपोर्ट को नियंत्रित करने पर भी विचार किया जा रहा है. हालांकि, अधिकारियों ने यह भी कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावों को कैसे लागू किया जाएगा. यह योजना सिर्फ संकेत देती है कि चीन और अमेरिका के व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ चुका है.

क्या होगा ट्रंप का अगला कदम?

योजना यह है कि अमेरिका उन सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी पर रोक लगाएगा जिसमें यूएस टेक्नोलॉजी या सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ हो, जैसे कि 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद बाइडेन प्रशासन ने लागू किया था. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका इन प्रतिबंधों को पूरी तरह लागू करता है, तो चीन के साथ व्यापार संबंध पूरी तरह बिगड़ सकते हैं, और इसका आर्थिक प्रभाव अमेरिका पर भी पड़ सकता है.

चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने अमेरिकी प्रस्तावित कदमों के खिलाफ सीधे कोई टिप्पणी नहीं की. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वाशिंगटन किसी भी तरह की कार्रवाई करता है, तो बीजिंग ऐसी एकतरफा कार्रवाई का विरोध करेगा और अपने वैधानिक अधिकारों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा.

ये भी पढ़ें: अमेरिकी एक्शन और रूसी तेल की खरीदारी में भारत की कटौती की रिपोर्ट से क्रूड ऑयल की कीमतों में लगी आग

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