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Alcohol Side Effects: लिवर को कब सड़ा देती है शराब? एक्सपर्ट्स ने बताया कि कभी नहीं करनी चाहिए ये गलतियां

7 months ago

Alcohol And Heart Medication Complications: डेली की दवाओं के साथ शराब का मेल कई बार ऐसा घातक कॉकटेल बना देता है, जो रिफ्लेक्स को धीमा करता है, लिवर पर बोझ डालता है और कभी-कभी बेहद खतरनाक प्रतिक्रियाएं शुरू कर देता है. तनाव कम करने वाली दवाओं से लेकर नींद की गोलियां, एलर्जी की दवाएं या फिर घर-घर में इस्तेमाल होने वाला पैरासिटामॉल, इनमें से किसी के साथ भी शराब का तालमेल बिगड़ सकता है. दिल, डायबिटीज और ब्लड-सर्कुलेशन से जुड़ी दवाओं के साथ तो इसका असर और भी मुश्किल हो जाता है.

हममें से कई लोग इसे सिर्फ एक ड्रिंक समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन शरीर को शराब और दवा  दोनों को एक साथ तोड़ने में काफी मेहनत करनी पड़ती है. यही वजह है कि कई बार एक सुरक्षित दवा भी शराब के साथ मिलकर अपने ही खिलाफ काम करने लगती है. Aakash Healthcare के सीनियर कंसल्टेंट व डायरेक्टर, सेंटर फॉर लिवर-GI डिजीज एंड ट्रांसप्लांटेशन, Dr. सौरभ सिंगल ने TOI को बताया  कि कुछ कॉम्बिनेशन इलाज को बिगाड़ सकते हैं या अचानक भारी रिएक्शन दे सकते हैं. इसी समझ को साफ तरीके से सामने लाना ज़रूरी है, ताकि दवाइयों के दौरान एक ड्रिंक लेने का फैसला गलती न बन जाए.

एंटी-एंग्जायटी दवाएं 

एंग्जायटी के लिए दी जाने वाली कई दवाएं जैसे बेंजोडायजेपिन्स दिमाग की गतिविधि को धीमा करती हैं. शराब भी ठीक यही काम करती है. दोनों एक साथ आकर ब्रेक को इतना ज़्यादा दबा देते हैं कि शरीर भारी-भारी लगने लगता है, रिएक्शन टाइम बहुत स्लो हो जाता है और हर काम सुस्ती से होता है. कई लोगों में सांस उथली पड़ जाती है, चलते या सीढ़ियां चढ़ते वक्त बैलेंस बिगड़ जाता है और डॉक्टरों के मुताबिक हल्की खुराक भी अचानक ब्लैकआउट या सांस रुकने जैसी स्थिति पैदा कर सकती है.

नींद की गोलियां

नींद की दवाएं दिमाग की जागने वाली सर्किट्स को शांत करती हैं. शराब भी इसी सिस्टम पर असर डालती है. दोनों मिल जाएं तो गहरी सुस्ती, कन्फ्यूजन, याददाश्त के ब्लैकआउट और ऐसी नींद जैसी अवस्था हो सकती है जिसमें शरीर अंदर-ही-अंदर सांस को संभालने की जद्दोजहद करता रहता है. थोड़ा सा शराब पीने पर भी अगले दिन तक चक्कर, सुस्ती और धीमी जजमेंट महसूस हो सकती है.

एंटीहिस्टामिन

जुकाम-खांसी या एलर्जी में ली जाने वाली पुरानी एंटीहिस्टामिन दवाएं वैसे ही नींद लाती हैं. शराब इसे और गहरा कर देती है, और पलकें उठाना भी मुश्किल लगने लगता है. ड्राइविंग, मशीन चलाना या घर के छोटे-छोटे काम भी खतरे में बदल जाते हैं. नए एंटीहिस्टामिन भले कम सुस्ती दें, लेकिन भारतीय घरों में अब भी पुराने, ज्यादा नींद लाने वाले वर्जन ही ज्यादातर मिलते हैं  और यही सबसे बड़ा जोखिम बनते हैं.

पेनकिलर्स

दो तरह की दर्द निवारक दवाओं से शराब खास तौर पर टकराती है.

 ओपिऑइड

शराब के साथ ये सांस और दिल की धड़कन पर इतना दबाव डाल सकते हैं कि स्थिति तुरंत गंभीर हो जाए.

 पैरासिटामॉल

घर-घर में भरोसे से ली जाने वाली यह दवा शराब के साथ सबसे ज्यादा टकराती है. दोनों का रास्ता लिवर में एक है. साथ-साथ लेने पर लिवर पर भारी बोझ पड़ता है, जहरीले बायप्रोडक्ट बढ़ जाते हैं और नुकसान का खतरा कई गुना हो जाता है. Dr. सिंगल बताते हैं कि लोग इसे हल्के में लेते हैं, पर लिवर नहीं.

 ऐंटीबायोटिक्स

सभी ऐंटीबायोटिक्स शराब में दिक्कत नहीं करते, लेकिन मेट्रोनिडाजोल और टिनिडाज़ोल जैसे कुछ नाम बेहद संवेदनशील हैं. इनके साथ शराब लेने पर तुरंत लालिमा, तेज हार्टबीट, उलटी, सिर घूमना शुरू हो सकता है. यहां तक कि माउथवॉस या फर्मेंटेड खाने में मौजूद थोड़ी सी शराब भी रिएक्शन ट्रिगर कर सकती है. यानी इनके कोर्स के दौरान शराब बिल्कुल ऑफ है.

इसे भी पढ़ें- Blood Formation Process: इंसान के शरीर में कैसे बनता है खून, इसमें हड्डियां कैसे करती हैं मदद?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

 

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