Language Settings
Select Website Language
newshunt
newshunt

AI बनाम इंसान, टेक लीडर्स बच्चों के लिए चिंतित:एंथ्रोपिक की प्रेसिडेंट समेत दिग्गज बोले- वही बच्चे सफल होंगे जो रिश्ते जोड़ सकें; गहरी सोच, दया व ​नैतिकता ही उन्हें मशीनों से आगे रखेगी

2 months ago

एंथ्रोपिक की को-फाउंडर एवं प्रेसिडेंट डेनिएला अमोडेई संभावित ग्राहकों और पार्टनर्स से मिलती हैं, तो मीटिंग के बाद लोग उनसे एक सवाल जरूर पूछते हैं- मेरा बच्चा कॉलेज में क्या पढ़े?’ डेनिएला कहती हैं, ‘एआई मॉडल तेजी से नौकरियों का स्वरूप बदल रहे हैं, ऐसे में माता-पिता की चिंता स्वाभाविक है। एआई की दुनिया के दिग्गज मानते हैं कि टेलॉजी से जुड़ी स्किल जल्द पुरानी हो सकती हैं, पर घबराना समाधान नही हैं। इंसान के व्यवहार में शामिल लचीलापन, आलोचनात्मक सोच, नैतिकता और जिम्मेदारी जैसे गुण असली ताकत हैं। शीर्ष एआई लीडर अपने बच्चों को इन्हीं गुणों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करते हैं। जानिए उनकी परवरिश का तरीका… मेलजोल और जुड़ाव अहम डेनिएला कहती हैं,‘जैसे-जैसे एआई बढ़ेगा, सहानुभूति, दयालुता और दूसरों से जुड़ने की क्षमता का महत्व बढ़ता जाएगा। ‘मशीनें संवाद कर सकती हैं, पर वे इंसान की तरह महसूस नहीं कर सकतीं। डेनिएला कहती हैं, ‘भविष्य में वही बच्चा सफल होगा जो लोगों के साथ रिश्ता बनाना जानता हो।’ इंसान हमेशा इंसानों के साथ रहना पसंद करता है, अकेलापन दुख देता है। इसलिए मैं चाहती हूं कि मेरे बच्चे ज्यादा मेलजोल बढ़ाएं व अपनी अनोखी पहचान के साथ लोगों को समझें। इंसान की रचनात्मकता और समूह में रहने की चाह कभी खत्म नहीं होगी। इंसानी विशेषज्ञता की जरूरत रहेगी पेड एआई के को-फाउंडर मैनी मेडिना के (4, 9, 19, 26 साल उम्र) चार बच्चे हैं। वे मानते हैं भविष्य में दो क्षेत्र एनर्जी व हेल्थकेयर सबसे वाइब्रेंट रहेंगे। मेडिना कहते हैं,‘कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए इंसानी विशेषज्ञता हमेशा जरूरी रहेगी। वे कहते हैं,‘परोपकार और पर्यावरण की देखभाल जैसे काम मशीनें दिल से नहीं कर सकतीं। बच्चे एआई को खतरा नहीं टूल की तरह देखें।’ लचीलापन और तर्कशक्ति महत्वपूर्ण एसएपी में एआई वर्क ट्रांसफॉर्मेशन एक्सपर्ट कैरोलिन हैंके का 15 साल का बेटा फुटबॉलर बनना चाहता है। कैरोलिन इसे सही मानती हैं। उनका कहना है कि आज के टेक स्किल दो साल बाद पुराने हो जाएंगे, इसलिए लचीलापन और बदलाव स्वीकार करने की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण है। वे अपने बेटे को गणित व तार्किक सोच पर ध्यान देने को कहती हैं क्योंकि एआई के दौर में लॉजिकल थिंकिंग ही मजबूत आधार होगी। हरफनमौला बनना जरूरी व्हार्टन स्कूल के प्रोफेसर एथन मॉलिक के दो बच्चे (16 व 19 साल) हैं। एआई पर बात तो करते हैं, पर बहुत ज्यादा नहीं सोचते। वे बच्चों को ‘हरफनमौला’ बनने की सलाह देते हैं। जैसे डॉक्टर का काम बीमारी पकड़ना नहीं, बल्कि मरीज को समझना और ढांढस बंधाना भी है। वे कहते हैं कि लिबरल आर्ट्स पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है ताकि बच्चे हर परिस्थिति में खुद को ढाल सकें।​ जिम्मेदारी लेना सीखना अहम माइक्रोसॉफ्ट की चीफ साइंटिस्ट जेमी टीवन कहती हैं,‘एआई सुझाव तो दे सकता है, पर फैसले की जिम्मेदारी नहीं ले सकता।’ इसलिए वे बच्चों को कानून या अकाउंटिंग जैसे क्षेत्रों जाने के लिए कहती हैं, जहां फैसलों की जवाबदेही इंसान की होती है। वे मानती हैं, गहराई से सोचने व मुश्किल काम करने की आदत ही बच्चों को मशीनों से आगे रखेगी।
Click here to Read More
Previous Article
एपल का सस्ता स्मार्टफोन आईफोन 17e लॉन्च:48MP फ्यूजन कैमरा और A19 चिपसेट, M4 प्रोसेसर वाला आईपैड एयर भी पेश
Next Article
महिंद्रा XEV 9e सिनेलक्स एडिशन लॉन्च, कीमत ₹29.35 लाख:फुल चार्ज पर 500km की रेंज और 3 स्क्रीन वाला केबिन; सेफ्टी के लिए ADAS फीचर्स

Related प्रौद्योगिकी Updates:

Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

Comments (0)

    Leave a comment