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आठवें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, कितना लग सकता है फिटमेंट फैक्टर, पूरी डिटेल्स

8 months ago

Eighth Pay Commission Updates: केंद्र सरकार ने आखिरकार आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का औपचारिक गठन कर दिया है. यह आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पेंशन और भत्तों की समीक्षा करेगा और संशोधन की सिफारिश करेगा. आयोग की सिफारिशों का असर एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ने की उम्मीद है.

क्या है आठवें वेतन आयोग का काम?

सरकार ने आयोग के साथ उसका टर्म ऑफ रेफरेंस (Terms of Reference – ToR) भी अधिसूचित किया है. इसके तहत आयोग —

मौजूदा वेतन ढांचे, सेवा शर्तों और रिटायरमेंट लाभों की समीक्षा करेगा.

देश की वित्तीय स्थिति, महंगाई दर और आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर नई सिफारिशें देगा.

वेतन संशोधन के दौरान सरकारी वित्तीय बोझ और कर्मचारियों की आय में संतुलन बनाए रखने पर ध्यान देगा.

वेतन आयोग हर दस साल में गठित किया जाता है ताकि महंगाई और अन्य आर्थिक कारकों के अनुरूप सरकारी कर्मचारियों का वेतन तय किया जा सके.

कब लागू होगा आठवां वेतन आयोग?

सातवां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से लागू किया गया था. इसी क्रम में, आठवां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है. अगर आयोग की रिपोर्ट या लागू करने में देरी होती है, तो कर्मचारियों को एरियर (arrears) के साथ बढ़ा हुआ वेतन मिल सकता है. सरकार ने आयोग को 18 महीने का समय दिया है ताकि वह विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और कर्मचारी संगठनों से विमर्श के बाद अपनी रिपोर्ट दे सके.

कितना बढ़ेगा वेतन और पेंशन?

सबसे अहम फैक्टर रहेगा फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor)- यानी पुराने और नए वेतन ढांचे के बीच का अनुपात. सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था. जानकारों के मुताबिक, आठवें वेतन आयोग में यह 2.8 से 3.0 के बीच रह सकता है. इसका मतलब है कि कर्मचारियों के बेसिक पे (Basic Pay) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है. हालांकि, वेतन और पेंशन में वास्तविक बढ़ोतरी इस बात पर भी निर्भर करेगी कि महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), और अन्य भत्तों (Allowances) में क्या संशोधन किए जाते हैं.

आठवें वेतन आयोग का लक्ष्य है कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी आर्थिक रूप से टिकाऊ (fiscally sustainable) हो, जिससे न तो सरकारी बजट पर अत्यधिक दबाव पड़े और न ही कर्मचारियों की वास्तविक आय पर असर पड़े. कुल मिलाकर, यह फैसला केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी राहत और उत्साहजनक खबर माना जा रहा है, जिससे 2026 से उनकी आय में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

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