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विष्णु के 10 अवतार के पीछे श्राप या धर्म की स्थापना! जानिए इसके पीछे का चौंकाने वाला रहस्य?

5 months ago

Lord Vishnu 10th incarnation curse story: हम सभी जानते हैं भगवान विष्णु के 10 अवतार हैं, जिसमें मत्सय, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और अंतिम अवतार कल्कि है. आपने कभी सोचा है भगवान विष्णु बार-बार क्यों अवतरित हुए? क्या उन्होंने खुद को कोई श्राप दिया था? या इसके पीछे कोई गहरा रहस्य छिपा है? आइए जानते हैं इसके बारे में. 

पवित्र धार्मिक ग्रंथों में भगवान विष्णु कहते हैं,

"यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।त्र परिणय साधूनां विनाशाय च दुष्कृतम् धर्मसं स्थापनार्थाय संभावनामि युगे युगे।"

भगवान विष्णु के अवतार के पीछे श्राप की कहानी कितनी सच!

विष्णु जी के दशावतारों से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं, जिन्में उन्हें अलग-अलग वजहों से श्राप दिए गए. इसमें सबसे मुख्य महर्षि भृगु का श्राप था, जिसकी वजह से उन्हें पृथ्वी पर जन्म लेकर कई तरह के कष्टों को सहना पड़ा, और यही कारण हैं कि, उन्होंने राम और कृष्ण जैसे मानव अवतार लिए, जिन्में उन्हें पत्नी वियोग (सीता) और कई तरह के सांसारिक दुखों को भोगना पड़ा. वृंदा के श्राप से ही राम को सीता का वियोग का सामना करना पड़ा.

विष्णु जी के दशावतारों से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं, जिन्में उन्हें अलग-अलग वजहों से श्राप दिए गए. इसमें सबसे मुख्य महर्षि भृगु का श्राप था, जिसकी वजह से उन्हें पृथ्वी पर जन्म लेकर कई तरह के कष्टों को सहना पड़ा, और यही कारण हैं कि, उन्होंने राम और कृष्ण जैसे मानव अवतार लिए, जिन्में उन्हें पत्नी वियोग (सीता) और कई तरह के सांसारिक दुखों को भोगना पड़ा. वृंदा के श्राप से ही राम को सीता का वियोग का सामना करना पड़ा.

भगवान विष्णु कहते हैं कि, जब भी धर्म का पतन और अधर्म का राज होता है, तब मैं अवतरित लेता हूं अच्छे लोगों की रक्षा करने, दुष्टों को मिटाने और धर्म की स्थापना करने के लिए मैं प्रकट होता हूं. सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि, विष्णु के जन्म लेने के पीछे कोई विवशता या शापित की कहानी नहीं है?

बल्कि अवतरित होना उनकी खुद की प्राथमिकता है क्योंकि संसार की व्यवस्था और धर्म स्थापना के लिए उनका अवतार लेना जरूरी है. 

भगवान विष्णु ने दस अवतार ही क्यों लिए उससे ज्यादा या कम क्यों नहीं? सबसे पहले इसकी एक वजह दस अंक पूर्णता का अंक है. भारतीय चिंतन में दस आमतौर पर एक चक्र, एक संपूर्ण मानचित्र का संकेत दर्शाता है. अवतरण का चरण देखा जाए तो सबसे पहले मछली से कछुए, फिर सूअर, इसके बाद अर्ध सिंह, मानव योद्धा और राजनेता, भगवान श्री विष्णु का अवतार न केवल अस्तित्व को दर्शाता है, बल्कि  दुख, चुनौती, जिम्मेदारी और चेतना से जुड़े कई भावों को भी चित्रित करता है. 

यदि कोई विष्णु के बार-बार अवतार लेने के लिए श्राप वाली थ्योरी की बात करता है, तो यह कहना कोई गलत नहीं होगा कि, श्राप खुद धर्म का पतन है. जब नैतिक व्यवहार खत्म होने लगते हैं, लोभ, क्रूरता, स्वार्थ और कर्तव्य का विध्वंस होता है तो प्रत्येक व्यक्ति का जीवन प्रभावित होता है. 

विष्णु के हर अवतार क्या संदेश देते हैं?

विष्णु के प्रत्येक अवतार जीवन में कुछ न कुछ संदेश देते हैं-

मत्सय (मछली)- जड़ता से जागने का समय, जीवन के ज्ञान और आंतरिक शक्ति को जागृति का उदय होता है. 

कछुआ- जब जीवन में चीजें उथल पुथल से भरी हो तो खुद को स्थिर करना बेहद जरूरी है. 

वराह (सूअर)- आप उस गहराई में गोता लगाते हैं, जहां व्यक्तिगत विफलता और नैतिक मूल्यों का पतन क्यों न हो? लेकिन आप खोई हुई चीजों को वापस पाने की इच्छा रखते हैं.

नरसिंह- चीजें काफी जटिल अपने पुराने रूप से स्थिति संभल नहीं सकती, तुम्हें अपनी बौद्धिक क्षमता से नए रूप को जन्म देना ही होगा. 

वामन (बौना ब्राह्माण)- हमेशा विनम्रता की जीत होती है. अंहकार पतन की ओर ले जाता है. 

परशुराम (योद्धा ऋषि)- जब व्यवस्था चरमरा जाए तो नवीनीकरण व्यवस्था के लिए लड़ना जरूरी होता है. 

राम और कृष्ण- हमेशा अपने कर्तव्य, ज्ञान और समर्पण की भावना को भूलना नहीं चाहिए.

बुद्ध/बलराम- अंतर्मुखी जो मुक्ति, स्वरूपों और करुणा का त्याग करना जानता है. 

कल्कि (भविष्य का योद्ध)- आखिरी बदलाव, पुराना ध्वस्त होगा तभी तो नए का उदय होगा. न केवल किसी व्यक्ति के लिए बल्कि पुरे जगत के लिए.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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