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Transmissible Cancer: मछलियों में फैला दुर्लभ कैंसर, वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता

1 week ago

Lake Memphremagog Transmissible Cancer: कैंसर को आमतौर पर ऐसी बीमारी माना जाता है, जो किसी इंसान या जानवर के शरीर के अंदर ही विकसित होती है. शरीर की अपनी सेल्स जब अनकंट्रोल तरीके से बढ़ने लगती हैं, तब कैंसर की शुरुआत होती है. लेकिन साइंटिस्ट को एक ऐसा दुर्लभ कैंसर मिला है, जो केवल एक जीव के शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक मछली से दूसरी मछली में फैल सकता है.नेचर जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने ब्राउन बुलहेड कैटफिश में इस तरह के कैंसर का पता लगाया है. ये मछलियां अमेरिका के वर्मोंट और कनाडा के क्यूबेक तक फैली लेक मेम्फ्रेमागॉग में पाई जाती हैं.

क्या है इन मछलियों में खास?

साइंटिस्ट के मुताबिक, इन मछलियों में पाया गया मेलानोमा हर मछली के शरीर में अलग-अलग विकसित नहीं हो रहा है. इसके बजाय कैंसर की सेल्स एक मछली से दूसरी मछली तक पहुंच रही हैं और वहां बढ़ रही हैं. इसे मछलियों में मिला पहला ज्ञात ट्रांसमिसिबल यानी फैलने वाला कैंसर माना जा रहा है. साथ ही यह पहली बार है, जब किसी मीठे पानी के इकोसिस्टम में इस तरह का कैंसर मिला है.

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कब होता है कैंसर?

आमतौर पर कैंसर तब होता है, जब किसी व्यक्ति या जानवर की स्वस्थ सेल्स में समय के साथ जेनेटिक बदलाव होने लगते हैं. इसके बाद सेल्स अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं. ये कैंसर सेल्स उसी शरीर में रहती हैं और शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकती हैं. लेकिन ट्रांसमिसिबल कैंसर इससे अलग है. इसमें कैंसर की जीवित सेल्स एक जीव के शरीर से निकलकर दूसरे जीव में प्रवेश कर जाती हैं और वहां बढ़ने लगती हैं. इस तरह कैंसर की एक ही सेल्स अलग-अलग जीवों के शरीर में जाकर लगभग किसी परजीवी की तरह जीवित रह सकती है.




इसकी पुष्टि करने के लिए साइंटिस्ट ने प्रभावित मछलियों के ट्यूमर और स्वस्थ टिश्यू के जीनोम का एनालिसिस किया. जांच में सामने आया कि अलग-अलग कैटफिश से लिए गए ट्यूमर जेनेटिक रूप से एक-दूसरे से काफी मिलते-जुलते थे. वहीं, वे उन मछलियों के स्वस्थ टिश्यू से अलग थे, जिनके शरीर में ट्यूमर मौजूद था. ट्यूमर में लाखों में से कई जेनेटिक वेरिएंट ऐसे मिले, जो अलग-अलग मछलियों के ट्यूमर में समान थे, लेकिन हेल्दी सेल्स में मौजूद नहीं थे. इससे साइंटफिक को मजबूत सबूत मिला कि ये ट्यूमर अलग-अलग पैदा होने के बजाय एक ही कैंसर सेल लाइन से निकले हैं.

साइंटिस्ट का कहना है कि ब्राउन बुलहेड मेलानोमा जानवरों में प्राकृतिक रूप से पाए गए ट्रांसमिसिबल कैंसर के दुर्लभ उदाहरणों में शामिल हो गया है. इससे पहले कुत्तों, तस्मानियन डेविल और समुद्र में रहने वाली शेलफिश की कुछ प्रजातियों में ऐसे कैंसर पाए जा चुके हैं.

दूसरे मछलियों तक कैसे पहुंच रहा कैंसर?

हालांकि, यह कैंसर एक मछली से दूसरी मछली तक कैसे पहुंच रहा है, इसका सटीक तरीका अभी पता नहीं चला है. साइंटिस्ट ने ब्राउन बुलहेड कैटफिश के व्यवहार को देखते हुए कुछ संभावनाएं बताई हैं. इनमें एक संभावना प्रजनन के मौसम से जुड़ी है. इस दौरान मछलियां बड़ी संख्या में एक जगह इकट्ठा होती हैं और एक-दूसरे के काफी करीब आती हैं. ऐसे में कैंसर की जीवित कोशिकाओं को एक मछली से दूसरी मछली तक पहुंचने का मौका मिल सकता है.



दूसरी संभावना पानी से जुड़ी है. मछलियों की त्वचा, गलफड़े और मुंह लगातार पानी के संपर्क में रहते हैं. ऐसे में अगर कैंसर सेल्स पानी में मौजूद हों, तो वे इन रास्तों से दूसरी मछली के शरीर में प्रवेश कर सकती हैं. ब्राउन बुलहेड झील की तलहटी के आसपास रहती हैं और इनके शरीर पर सुरक्षा देने वाले स्केल्स भी नहीं होते. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर कैंसर कोशिकाएं झील के तल की मिट्टी में कुछ समय तक जीवित रहती हैं, तो वहां से गुजरने वाली मछलियां उनके संपर्क में आ सकती हैं. हालांकि, अभी ये केवल संभावनाएं हैं और स्टडी में इंफेक्शन का कोई निश्चित रास्ता साबित नहीं हुआ है.

क्या इंसानों में भी फैल सकता है कैंसर?

इस खोज के बाद लोगों के मन में यह सवाल भी उठ सकता है कि क्या यह कैंसर इंसानों में फैल सकता है. मौजूदा साइंटफिक जानकारी के अनुसार इसका कोई सबूत नहीं है. स्टडी केवल ब्राउन बुलहेड कैटफिश पर केंद्रित थी और रिसर्चर ने इंसानों में इसके फैलने का कोई खतरा नहीं बताया है. इंसानों का इम्यून सिस्टम आमतौर पर दूसरे व्यक्ति से आने वाली बाहरी कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट कर देता है. यही कारण है कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों को इम्यून सिस्टम दबाने वाली दवाएं देनी पड़ती हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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