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धुरंधर-2 रिव्यू; रणवीर की फिर दमदार परफॉर्मेंस:नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म

3 months ago

रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ यानी धुरंधर 2 पहले पार्ट की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद बड़े स्केल पर लौटी है। इस बार फिल्म सिर्फ गैंगवार या बदले की कहानी नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी से लेकर देश की कई बड़ी घटनाओं को जोड़ते हुए एक बड़ा नैरेटिव पेश करती है। उम्मीदें जितनी ऊंची थीं, फिल्म कई जगह उन्हें पूरा करती है, तो कुछ जगह थोड़ा चूक भी जाती है। फिल्म की कहानी कहानी जसकीरत सिंह रांगी के अतीत से शुरू होती है, जो अपने परिवार के साथ हुए अन्याय के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखता है। जेल से निकलकर वह भारत के लिए काम करने का मौका पाता है और पाकिस्तान में हमजा अली मजारी बनकर अंडरकवर मिशन पर जाता है। पहले पार्ट के बाद अब कहानी ल्यारी की सत्ता और गैंगवार के इर्द-गिर्द घूमती है। रहमान डकैत (अक्षय खन्ना के किरदार) की मौत के बाद खाली हुई गद्दी पर कब्जा, दुश्मनों का सफाया और अपने असली मिशन तक पहुंचना यही फिल्म का मूल है। इस बार कहानी में नोटबंदी, अतीक अहमद जैसे मुद्दों के संदर्भ और देश-विदेश की राजनीतिक कड़ियों को जोड़ा गया है। सबसे बड़ा सस्पेंस बड़े साहब का है, जिसके इर्द-गिर्द पूरी कहानी घूमती है। हालांकि यह खुलासा जितना बड़ा बनाया गया, उतना प्रभाव छोड़ नहीं पाता। फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा धीमा और खिंचा हुआ लगता है, लेकिन इंटरवल के बाद कहानी पकड़ बनाती है और क्लाइमैक्स तक आते-आते असर छोड़ती है। फिल्म में एक्टिंग रणवीर सिंह पूरी फिल्म की जान हैं। जसकीरत और हमजा दोनों किरदारों में उन्होंने अलग-अलग बॉडी लैंग्वेज और एटीट्यूड दिखाया है। एक्शन, गुस्सा और इमोशन, हर जगह वो स्क्रीन पर छाए रहते हैं। राकेश बेदी इस बार भी सरप्राइज पैकेज हैं। आर. माधवन जब भी स्क्रीन पर आते हैं, फिल्म को मजबूती देते हैं। संजय दत्त का प्रेजेंस अच्छा है, लेकिन सीमित है। अर्जुन रामपाल का किरदार इस बार उतना खतरनाक नहीं बन पाया। सारा अर्जुन को स्क्रीन टाइम कम मिला है, लेकिन अपने हिस्से में वो असर छोड़ती हैं। उनके किरदार में और गहराई लाई जा सकती थी। फिल्म में डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष आदित्य धर ने फिल्म का स्केल और बड़ा किया है। रिसर्च और डिटेलिंग में मेहनत दिखती है, खासकर जब फिल्म असली घटनाओं को छूती है, लेकिन यही कोशिश कई जगह फिल्म को भारी और थोड़ी डॉक्यूमेंट्री जैसी भी बना देती है। पहले पार्ट की टाइट कहानी यहां थोड़ी ढीली पड़ती है। कई सीन लंबे लगते हैं और कुछ ट्विस्ट का पहले से अंदाजा हो जाता है। हालांकि सेकंड हाफ में डायरेक्शन संभलता है और क्लाइमैक्स मजबूत बनता है। सिनेमैटोग्राफी और एक्शन सीक्वेंस शानदार हैं। बैकग्राउंड स्कोर खासकर क्लाइमैक्स में प्रभावशाली है, लेकिन एडिटिंग और टाइट हो सकती थी। फिल्म का म्यूजिक म्यूजिक इस बार फिल्म की कमजोर कड़ी है। पहले पार्ट जैसा असर नहीं बन पाता। कुछ जगह पुराने गानों का इस्तेमाल किया गया है, जबकि ‘आरी आरी’ और 'जान से गुजरते' जैसे एक-दो गाने ही याद रह जाते हैं। बैकग्राउंड स्कोर जरूर माहौल बनाने में सफल रहता है। फिल्म पर फाइनल वर्डिक्ट धुरंधर 2 एक बड़ी और महत्वाकांक्षी फिल्म है, जो एक्शन, पॉलिटिक्स और रियल इवेंट्स को जोड़कर अलग तरह का सिनेमाई अनुभव देने की कोशिश करती है। हालांकि इसकी लंबाई, ढीली पटकथा और कुछ अधूरे किरदार इसे पहले पार्ट जितना दमदार नहीं बनने देते। वहीं, फिल्म के दूसरे पार्ट में अक्षय खन्ना की कमी भी खली है। फिर भी, रणवीर सिंह की शानदार परफॉर्मेंस, मजबूत सेकंड हाफ और असरदार क्लाइमैक्स इसे एक अच्छा थिएटर एक्सपीरियंस बनाते हैं। अगर आपने पहला पार्ट पसंद किया था, तो यह फिल्म जरूर देखें, बस उम्मीदें थोड़ी बैलेंस रखकर।
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