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दीपिका पादुकोण की 8 घंटे शूट की डिमांड जायज:डायरेक्टर आदित्य सरपोतदार बोले– अच्छी प्लानिंग व मैनेजमेंट से कम वक्त में भी बेहतर काम संभव

6 months ago

‘मुंज्या’ की सफलता के बाद डायरेक्टर आदित्य सरपोतदार ने ‘थामा’ में इंसान और बेतालों की काल्पनिक दुनिया के बीच की रेखा को तोड़ने का साहस दिखाया। अब उनकी अगली फिल्म ‘शक्ति शालिनी’ में चर्चित अभिनेत्री अनीत पड्डा की एनर्जी और नए किरदार की चर्चा है, जबकि ‘महा मुंज्या’ के सीक्वल की तैयारियां भी जारी हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान आदित्य ने सेट पर टीम की कमिटमेंट और कलाकारों की सपोर्टिंग अप्रोच को सराहा। इस दौरान उन्होंने दीपिका पादुकोण की 8 घंटे की शूटिंग शिफ्ट वाली बात का समर्थन करते हुए ने कहा कि अच्छी प्लानिंग और मैनेजमेंट से कम समय में भी बेहतर काम संभव है।पेश है आदित्य सरपोतदार से हुई बातचीत के कुछ प्रमुख अंश.... सवाल- ‘मुंज्या’ हिट रही और अब ‘थामा’ भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। जब ‘थामा’ की स्क्रिप्ट आपके पास आई, तो आपके लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या थी? आपने उस चुनौती को किस तरह बेहतर ढंग से संभाला? जवाब- हर फिल्म में मैं अलग और नई दुनिया दिखाना चाहता हूं। ‘मुंज्या' में कोंकण की अनदेखी दुनिया थी।‘थामा’ में बेतालों की दुनिया बनानी थी। इस बार मुश्किल यह थी कि ‘स्त्री 2’, ‘मुंज्या', और ‘भेड़िया’की कहानियां एक साथ यूनिवर्स में कैसे आगे बढ़ें, यह सोचना पड़ा। ‘थामा’ में इंसान और बेतालों की दो अलग-अलग दुनिया को जोड़ना और उसे असली दिखाना चुनौती था। कुछ सीन बहुत मुश्किल थे, लेकिन अच्छी टीम होने से काम आसान हो गया। ‘थामा’ में स्केल बड़ा करना था और दिवाली जैसे बड़े मौके पर रिलीज करना भी चुनौती थी। सवाल- जब बेताल की कहानियों को विजुअल रूप में पेश किया गया, तो उसका माहौल और प्रभाव को कैसे तैयार किया गया? जवाब- जब मैं पहली बार कहानी पढ़ता हूं, तो सोचता हूं क्या मुझे वह दुनिया साफ दिख रही है। अगर नहीं दिखती, तो मैं फिल्म नहीं करता। जब दिमाग में तस्वीर बन जाती है, तो मैं टीम को समझाने के लिए एआई के जरिए इमेज और वीडियो बनाता हूं। इससे आर्ट डायरेक्टर और डीओपी को समझना आसान होता है। फिर सब मिलकर उस दुनिया को तैयार करते हैं। इस प्रक्रिया में प्री-प्रोडक्शन, शूटिंग और पोस्ट-प्रोडक्शन तीन मुख्य चरण होते हैं। वीएफएक्स टीम और बाकी तकनीकी लोग मिलकर कल्पना को परदे पर उतारते हैं। मेरा काम होता है सबको एक दिशा में रखकर विजन को पूरा कराना। सवाल- आपने जो काल्पनिक किरदार सोचे, उन्हें पर्दे पर निभाने के लिए कलाकार कैसे चुने? जवाब- जब मैं कहानी पढ़ता हूं, तब अपने आप कुछ चेहरे दिमाग में आने लगते हैं। हर किरदार अपने आप में अलग चुनौती लेकर आता है। जैसे ‘मुंज्या' में मुझे एक नया लड़का चाहिए था क्योंकि उस किरदार की उम्र करीब 20-21 साल थी। ‘थामा’की कहानी के लिए ऐसे दो कलाकार चाहिए थे जिनसे दर्शक अपनेपन का भाव महसूस कर सकें। आयुष्मान में एक आम लड़के जैसी सादगी और प्यारा सा भाव है, और रश्मिका बहुत सच्ची और जमीन से जुड़ी हुई हैं। जब ऐसे कलाकार साथ में काम करते हैं, तो फिल्म में असलीपन आता है। परेश रावल,नवाजुद्दीन सिद्दीकी और गीता अग्रवाल, मेरी पहली पसंद थे।इन्होंने बिना सोचे तुरंत हां कर दी। इससे मेरा काम आसान हो गया क्योंकि मुझे बिल्कुल सही कलाकार मिल गए थे। इनके अनुभव से मुझे भी बहुत कुछ सीखने को मिला। सवाल- शूटिंग के दौरान सेट पर कैसा माहौल था? जवाब- सेट पर हर डिपार्टमेंट के लोग बहुत एक्साइटेड रहते थे और काम में मजा आता था। मुझे लगता है अगर टीम को फिल्म बनाने में मजा आएगा, तो वही एनर्जी स्क्रीन पर और ऑडियंस तक पहुंचेगी। डायरेक्टर के तौर पर मैं सबको मोटिवेट रखने की कोशिश करता हूं। जब‘थामा’ कॉलोनी का सेट बना और सबने देखा, तो सब बहुत एक्साइट हो गए थे, क्योंकि कुछ अलग और नया था। इसलिए ऐसी फिल्मों में हमेशा जोश और उत्साह बना रहता है। सवाल- जब आप सेट पर पहुंचे, तो सब आपकी उम्मीद के मुताबिक हुआ या कुछ दिक्कतें आईं? जवाब- नहीं, दिक्कतें तो हमेशा होती हैं। जैसे हैदराबाद में एक फिल्म की शूटिंग के वक्त रश्मिका का एक्सीडेंट हो गया था, तो शूट डेढ़-दो महीने रुक गया। ऐसे चैलेंज कभी प्लान नहीं होते, पर टीम मिलकर हल निकाल लेती है। ऊटी के शूट में मेरे DOP का हाथ कैमरे से घायल हो गया, फिर भी उन्होंने अगले दिन प्लास्टर लगाकर शूट जारी रखा। जब टीम का हर सदस्य इतनी लगन से काम करता है, तो सबको और मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है। सेट पर यही जोश माहौल को खास बनाता है। सवाल- रश्मिका की चोट और शूटिंग डिले होने से बाकी कलाकारों की डेट्स कैसे मैच की? जवाब- अगर कोई वास्तविक समस्या होती है तो सब समझते हैं और साथ देते हैं। रश्मिका की चोट के बाद भी किसी ने सवाल नहीं किया। सबने खुद आगे बढ़कर कहा कि डेट्स रीशेड्यूल करनी हों तो बता दो, हम फिल्म को प्रायोरिटी देंगे। जब पूरी टीम कमिटेड और एक्साइटेड होती है, तो हर चुनौती पार कर लेते हैं। प्रोड्यूसर और डायरेक्टर की जिम्मेदारी होती है टीम की एनर्जी हाई रखना, जिसे हमारी टीम ने बहुत अच्छे से किया। सवाल- ‘थामा’ के बाद आप ‘शक्ति शालिनी’ शुरू करेंगे या ‘मुंज्या’ का सीक्वल ‘महा मुंज्या’? जवाब- ‘मुंज्या’ मेरे दिल के बहुत करीब है। हमने सोचा नहीं था कि लोगों को इतना पसंद आएगा। उसके बाद से सब पूछ रहे हैं कि सीक्वल कब आएगा। शूटिंग के वक्त ही लगा था कि कहानी आगे बढ़ सकती है। मुंज्या खत्म नहीं हुआ, वो फिर लौटेगा। अब ये कैसे होगा और बाकी किरदारों की कहानी कैसे बढ़ेगी, ये ‘महा मुंज्या’ में दिखेगा। उस पर काम चल रहा है और डेट भी तय है। फिलहाल ‘थामा’ के बाद ‘शक्ति शालिनी’ पर फोकस है। सवाल- ‘महा मुंज्या’ की कास्टिंग को लेकर ‘लापता लेडीज’ की अभिनेत्री प्रतिभा रांटा का नाम जुड़ने की खबरें थीं, क्या यह सच है? जवाब- नहीं, ये सिर्फ अफवाह है। हमारी टीम या प्रोड्यूसर ने कभी किसी नई कास्टिंग पर बात नहीं की। शर्वरी ही बेला का किरदार निभा रही हैं और आगे भी वही करेंगी। प्रतिभा अच्छी एक्ट्रेस हैं, पर फिलहाल ‘महा मुंज्या’ में नहीं हैं। सवाल- ‘शक्ति शालिनी’ में अनीत पड्डा को कैसे लिया गया? उनकी कास्टिंग कैसे हुई? जवाब- अनीत पड्डा पड्डा की कास्टिंग अभी-अभी अनाउंस हुई है। उन्होंने इस साल की बड़ी हिट दी है और साबित किया है कि वे बेहतरीन एक्ट्रेस हैं। इतने नए एक्टर्स के साथ उनकी फिल्म का चलना बड़ी बात है। अब वो ‘शक्ति शालिनी’ की दुनिया का हिस्सा हैं। अभी फिल्म के बारे में ज्यादा बताना जल्दी होगा, लेकिन अनीत पड्डा का जोश और एनर्जी इस रोल के लिए बिल्कुल सही है। ये फिल्म भी उसी हॉरर यूनिवर्स का हिस्सा है। सवाल- ‘सैयारा' देखी आपने? उसमें आपको क्या खास बात लगी? जवाब– फिल्म ‘सैयारा' की खासियत उसकी बढ़िया म्यूजिक और नए कलाकारों की शानदार एक्टिंग है। डायरेक्टर और टीम ने दोनों पर भरोसा करके बेहतरीन फिल्म बनाई। अहान और अनीत का काम बहुत अच्छा लगा। फिल्म देखकर मैं इमोशनल हो गया और लगता है जितनी तारीफ मिली, वह फिल्म की हकदार है। सवाल- फिल्म फेडरेशन 8 घंटे की शूटिंग शिफ्ट की मांग कर रहा है। अगर कोई 12 घंटे काम करे तो उसे डेढ़ शिफ्ट माना जाए। इस पर आपका क्या कहना है? जवाब- फिल्म इंडस्ट्री में सब मिलकर काम करते हैं, एक्टर, डायरेक्टर, टेक्नीशियन। हर रोल और शूट अलग होता है। कुछ लोग 8 घंटे में अच्छा काम कर लेते हैं, कुछ 12 घंटे तक कर सकते हैं। अगर कोई एक्टर कहे कि वह 8 घंटे ही काम करेगा, तो उसका सम्मान होना चाहिए। लेकिन कभी-कभी बजट व शूट की जरूरत से 12 घंटे काम जरूरी हो जाता है। 12 घंटे से ज्यादा काम करना सही नहीं है। सवाल- दीपिका पादुकोण कहती हैं कि काम 8 घंटे का होना चाहिए। इस बारे में आप का क्या कहना है? जवाब- हां, सही कहा। शुरू में उन्होंने 12 घंटे काम किया होगा। अगर अब उन्हें लगता है कि 12 घंटे काम करने वे अपने काम को सही नहीं ठहरा पा रही हैं, तो यह उनका व्यक्तिगत विचार है, और हमें उसे समझना चाहिए। अगर डायरेक्टर अच्छी प्लानिंग करे, तो 8 घंटे में भी काम हो सकता है। कई आर्टिस्ट सिर्फ 8 घंटे ही देते हैं और प्रोफेशनली काम पूरा कर लेते हैं। असली फर्क प्लानिंग और मैनेजमेंट का होता है।
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