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Sleep Deprivation Heart Risk: कहीं धीरे-धीरे आपकी नींद तो कम नहीं हो रही, जानिए हार्ट अटैक के कितना करीब पहुंच गए हैं आप?

8 months ago

 Sleep timing health impact: अगर आप सही समय पर नींद लेते हैं और भरपूर नींद लेते हैं, तो आप कई तरह की बीमारियों से दूर रह सकते हैं. लेकिन आजकल लोग फोन के इस्तेमाल के चलते रात में देर तक जागते हैं, जिससे डेली रूटीन पर असर पड़ रहा है. कई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है. चलिए आपको विस्तार से बताते हैं कि किस रिसर्च रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है और क्या-क्या रिसर्च में सामने आया है.

क्या निकला है रिसर्च में

European Heart Journal में पब्लिश एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, रात 10 से 11 बजे के बीच सोने वाले लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी कम रहता है. इसी वजह से इस समय को "गोल्डन आवर" के नाम से जाना जाता है.

रिसर्च में बताया गया है कि एक्सरसाइज और डाइट का सेहत पर जितना असर होता है, उतना ही असर नींद का भी होता है. जो लोग देर रात तक काम करते हैं या जागते रहते हैं, उनके अंदर नेचुरल क्लॉक (जिसे 'सर्केडियन रिदम' कहा जाता है) बिगड़ जाता है. एक बार इसमें दिक्कत आने पर शरीर के दूसरे फंक्शन भी प्रभावित होते हैं, क्योंकि यह हार्ट बीट, ब्लड प्रेशर और हार्मोनल बैलेंस को कंट्रोल करता है. नींद का नेचुरल क्लॉक डिस्टर्ब होने पर इसका असर दिल और दिमाग दोनों पर पड़ता है.

इतने लोग शामिल हुए रिसर्च में

इस रिसर्च में 43 से 74 साल की उम्र के लोगों को शामिल किया गया था. प्रतिभागियों को एक स्पेशल ट्रैकर डिवाइस पहनाई गई थी, जिससे उनकी नींद की आदतों पर नज़र रखी गई. करीब 5.7 साल तक चले इस रिसर्च में नींद के पैटर्न और हार्ट डिजीज के खतरे को जोड़ा गया.

नतीजे ये निकले

  • जो लोग रात 10:00 से 10:59 बजे के बीच सोते थे, उनमें हार्ट की दिक्कत सबसे कम थी.
  • जो लोग 11:00 से 11:59 बजे के बीच सोते थे, उनमें हार्ट डिजीज का खतरा लगभग 12 प्रतिशत तक बढ़ गया.
  • जो लोग रात 12 बजे के बाद सोते थे, उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 25 प्रतिशत तक बढ़ गया.
  • हैरानी की बात यह थी कि जो लोग रात 10 बजे से पहले सोते थे, उनमें भी रिस्क 24 प्रतिशत तक बढ़ गया.

रिसर्च ने यह भी दिखाया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर नींद के बदलाव का असर सबसे ज्यादा पड़ा, क्योंकि उनके बायोलॉजिकल क्लॉक और हार्मोन साइकिल पर नींद का असर अधिक होता है.

क्या करें

इससे बचाव के लिए जरूरी है कि आप सही समय पर नींद लें. सोने से पहले डिजिटल डिटॉक्स करें, डिनर जल्दी और हल्का करें.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. 

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