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Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि के बाद पूजन सामग्री का क्या करना चाहिए? जानें सही तरीका

7 months ago

Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि देवी दुर्गा की सम्मान में मनाया जाने वाला एक हिंदू पर्व है, जो आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नौ दिनों तक मनाया जाता है.

इस दौरान माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, उपवास रखे जाते हैं और गरबा व डांडिया जैसे पारंपरिक नृत्य किए जाते हैं. यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और जीवन में शुद्धिकरण, शक्ति और सदाचार अपनाने की प्रेरणा देता है.

शारदीय नवरात्रि खत्म हो गई है, ऐसे में बात आती है कि बची हुई पूजन सामग्री का क्या करें. तो आइए जानें विस्तार से..

नवरात्रि के बाद पूजन सामग्री का क्या करें?

नवरात्रि की बची हुई पूजन सामग्री को पवित्र स्थानों जैसे नदी में प्रवाहित कर सकते हैं, या जली हुई बाती का प्रयोग कर घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर करने वाली भस्म बना सकते हैं.

कलश के जल को घर में छिड़क सकते हैं और बचे हुए जल को तुलसी में अर्पित कर सकते हैं. कलश के नारियल को प्रसाद रूप में ग्रहण कर सकते हैं या धन स्थान में रख सकते हैं. जवारे किसी पवित्र स्थान पर रख सकते हैं या पेड़ के नीचे रख सकते हैं. 

पूजन सामग्री का सदुपयोग

जली हुई बाती
बची हुई बाती को कपूर और लौंग डालकर जलाएं. इससे बनी राख को घर के विभिन्न कोनों में छिड़कने से नकारात्मकता दूर होती है और इसे पौधे में भी डाला जा सकता है.

कलश का जल
कलश के जल को आम के पत्तों से घर के हर कोने में छिड़कें. बचे हुए जल को तुलसी के पौधे में डालें.

नारियल
कलश से निकाले गए नारियल को प्रसाद रूप में परिवार के सदस्यों को दे सकते हैं.

सिक्के और चावल
कलश में रखें सिक्कों को अपने पर्स में और चावल को तिजोरी या धन स्थान पर रख सकते हैं, इससे धन-धान्य बना रहता है.

पूजन सामग्री का विसर्जन या दान

नदी में प्रवाह
उपयोग न की गई सामग्री, जैसे फूल, धूप आदि को नदी में प्रवाहित कर सकते हैं. 

पवित्र स्थान पर रखना
अगर आप नदी में सामग्री प्रवाहित नहीं कर सकते, तो इसे किसी पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे सम्मानपूर्वक रख सकते हैं. 

जरूरतमंदों को दान
कुछ बची हुई सामग्री, जैसे कि कपड़े आदि, दान भी कर सकते हैं. 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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