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Petrol-Diesel: पूरे 22 रुपये सस्ता हो गया पेट्रोल और डीजल, सरकार ने घटाए दाम तो लोगों ने ली राहत की सांस

2 months ago

Petrol-Diesel Price Cut: ईरान-अमेरिका में लड़ाई, होर्मुज की नाकेबंदी और पश्चिम एशिया में टेंशन के बीच एक तरफ जहां भारत सहित दुनिया के तमाम हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं. वहीं, भारत के ही पड़ोसी देश पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार घट रहे हैं.

सरकार ने दिया ईद का तोहफा

पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार ने बीते 29 मई को पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत में भारी कटौती का ऐलान किया है. यहां सरकार ने ईद-अल-अजहा के मौके पर देश की जनता को राहत देते हुए पेट्रोल-डीजल के दाम पहले के मुकाबले और कम कर दिए हैं और इसे 'ईद का तोहफा' बताया है. कल पाकिस्तान में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल दोनों के दाम सीधे 22 रुपये घटा दिए गए. 

लगातार तीसरी बार कम हुई कीमत

  • सबसे पहले 15 मई को पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई.
  • फिर 22 मई को साप्ताहिक समीक्षा के तहत पेट्रोल के दाम 6 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल 6.80 रुपये प्रति लीटर कम किए गए. 
  • ईद के मौके पर 29 मई को तीसरी बार सबसे बड़ी कटौती की गई. सरकार ने दोनों के ही दाम 22 रुपये कम कर दिए. 

कुल मिलाकर पाकिस्तान में मई के महीने में पेट्रोल कुल 33 रुपये प्रति लीटर सस्ता हुआ है. वहीं, डीजल के दाम कुल 33.80 रुपये कम किए गए हैं.

क्यों कम किए गए रेट?

पाकिस्तान की आवाम महंगाई से परेशान थी. मार्च और अप्रैल में यहां ईंधन की कीमतें पहली बार 414 रुपये प्रति लीटर के पार चली गई थीं. इसके चलते माल ढुलाई से लेकर ट्रांसपोर्ट बेहद महंगा हो गया था.लोग सड़कों पर उतर आए थे. जगह-जगह विरोध प्रदर्शन होने लगे. अपनी सरकार को बचाने और घरेलू राजनीतिक स्थिरता के लिए सरकार ने दाम कम किए. इस क्रम में सरकार ने ईद के मौके पर अधिकारियों को तेल कंपनियों को होने वाले मुनाफे या टैक्स का कुछ हिस्सा घटाकर सीधे जनता को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए.  

कीमतें कम करने की एक और वजह भी है. पाकिस्तान इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नियमों पर चल रहा है. IMF ने प्रति लीटर तेल पर एक निश्चित लेवी वसूलने की शर्त रखी थी. अब चूंकि सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए टैक्स कलेक्शन का अपना टारगेट पूरा कर पा रही है इसलिए बंतर्राष्ट्रीय बाजारदमें कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का लाभी टैक्स के रूप में खुद रखने के बजाय उपभोक्ताओं को दे रही है. 

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