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पंजाब की लेडी ड्रग अफसर बनीं ब्यूटी क्वीन:मिसेज नेशनल में फर्स्ट रनरअप रहीं; सिंगल मदर, चोट लगी तो 6 महीने बेड पर रहीं

5 months ago

पंजाब की लेडी ड्रग कंट्रोलर अफसर नवदीप कौर ने ड्यूटी के साथ-साथ फैशन की दुनिया में भी पंजाब के साथ ही देश को पहचान दिलाई है। उन्होंने गोवा में हुए सुप्रा मिसेज नेशनल 2025 कांटेस्ट में भारत को रिप्रजेंट करते हुए फर्स्ट रनर-अप का खिताब अपने नाम किया है। उनका दावा है कि यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह भारतीय महिला है। उनका यह सफर काफी संघर्षपूर्ण और चुनौतीपूर्ण रहा है। एक समय ऐसा भी आया जब वह पूरी तरह बेड पर आ गई थीं। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें छह महीने तक बेड पर रहना पड़ा। डॉक्टरों का कहना था कि शायद वह दोबारा चल भी न सकें, लेकिन उन्होंने खुद को पाजीटिव बनाए रखा, दोगुनी ताकत के साथ खुद को फिर से तैयार किया और आज पूरी तरह उत्साहित हैं। 25 देशों से आए थे प्रतियोगी नवदीप कौर बताती हैं कि यह मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण था। इसमें पूरी दुनिया से 25 देशों के प्रतियोगी शामिल हुए थे, जबकि फाइनल में 12 देशों के प्रतियोगी पहुंचे थे। इसमें पहले नंबर पर रूस, दूसरे नंबर पर भारत और तीसरे नंबर पर उराल का रहा। आज खुशी होती है कि वह इस स्तर पर पहुंची। छह साल की उम्र में बनी RJ नवदीप कौर बताती हैं कि वह एक फौजी परिवार से आती हैं। उनके पिता भारतीय वायुसेना में अधिकारी हैं, जबकि माता शिक्षिका हैं। चुनौतियों से लड़ने का जज्बा उन्हें विरासत में मिला है। बचपन में पठानकोट, केरल, राजस्थान, मेघालय और गुजरात के अलावा भारत के विभिन्न हिस्सों में वायुसेना स्टेशनों पर उनका परिवार रहा। इसी दौरान उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। उनका पहला बड़ा अवॉर्ड बाल चित्र रत्न अवॉर्ड रहा, जो भारत सरकार की ओर से दिया गया। इसके बाद उन्होंने यूनेस्को और ओलंपियाड की परीक्षाएं भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कीं। वह मात्र 6 वर्ष की उम्र में ऑल इंडिया रेडियो की सबसे कम उम्र की रेडियो जॉकी (RJ) बनी थीं। परिवार ने गुजरात से अकेले पंजाब भेजा नवदीप कौर बताती हैं कि जब कॉलेज जाने का समय आया, तो परिवार ने उन्हें पंजाब भेजा, ताकि वह अपने मूल स्थान की संस्कृति को समझ सकें। यहीं से जीवन की पहली बड़ी परीक्षा शुरू हुई। उन्हें अकेले ही गुजरात से पंजाब भेजा गया, ताकि वह मजबूत और आत्मनिर्भर बन सकें। माता-पिता के शब्द आज भी उनके साथ हैं- “अगर तुम अकेले पंजाब पहुंच गईं, तो जीवन में जरूर सफल होगी"। यहीं उन्होंने सीखा कि खुद पर विश्वास हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। कॉलेज के अंतिम वर्ष में उन्होंने पंजाब पब्लिक सिविल सर्विस परीक्षा उत्तीर्ण की और पंजाब सरकार के ड्रग्स विभाग में ड्रग्स कंट्रोल अफसर के रूप में सबसे कम उम्र की अधिकारियों में शामिल हुईं। कई चैनलों में किया काम नवदीप बताती हैं कि नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपने एक्टिंग के जुनून को भी जिंदा रखा। एक वर्ष के ब्रेक में वह मुंबई गईं और टेलीविजन इंडस्ट्री में किस्मत आजमाई। इस दौरान उन्होंने कलर्स टीवी और सोनी टीवी जैसे चैनलों के साथ काम किया। इसके बाद अपने बचपन और माता-पिता के सपने एक जिम्मेदार अधिकारी बनने को पूरा करने के लिए वह दोबारा सेवा में लौट आईं। उन्होंने अपने कर्तव्यों को पूरे समर्पण के साथ निभाया और पंजाब सरकार से चार बार उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित हुईं। रीढ़ की हड्‌डी में चोट से बदला जीवन हालांकि जीवन में कई उतार-चढ़ाव भी आए। नवदीप कौर बताती हैं कि वर्ष 2024 में वह घर में सीढ़ियों से गिर गई थीं। यह चोट काफी गंभीर थी और उन्हें छह महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा। डॉक्टरों का कहना था कि वह अब चल नहीं पाएंगी। उस समय वह हिम्मत हारने लगी थीं कि अब जीवन कैसे चलेगा, लेकिन उन्होंने खुद को सकारात्मक रखा। योग किया, जिम शुरू किया और धीरे-धीरे फिर से खड़ी हो गईं। जब प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का समय आया, तो उन्हें लगा कि कहीं खुद को ही खो न दूं। वह एक बेटी हैं, एक मां हैं और एक ड्रग कंट्रोल ऑफिसर हैं, इसलिए उन्होंने इस प्रतियोगिता में भाग लिया। सिंगल मदर ही जीवन की स्ट्रेंथ नवदीप बताती हैं कि उनका निजी जीवन में भी कई उतार-चढ़ाव आए। पति से तलाक हो गया। मगर, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वह एक सिंगल मदर हैं और मानती हैं कि यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उनका कहना है कि जब जीवन में मुसीबतें आती हैं, तो इंसान और ज्यादा मजबूती से खड़ा होता है। उन्हें लगता हैं कि अपने बच्चे के लिए ऐसा उदाहरण बनना है कि कल को वह गर्व से कह सके- “मुझे अपनी मां जैसा बनना है”। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने बच्चे के लिए एक मिसाल कायम करने का फैसला किया।
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