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    निर्मला सीतारमण बोलीं भारत के व्यापक आर्थिक आधार मजबूत, वैश्विक चुनौतियों पर भी दिया जबाव

    2 weeks ago

    Economic Survey 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि भारत का व्यापक आर्थिक आधार अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गया है. उन्होंने कहा कि देश ने वैश्विक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है, जिसके चलते भारत की संभावित जीडीपी वृद्धि दर बढ़कर सात प्रतिशत तक पहुंच गई है.

    वित्त मंत्री ने संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश करने के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि भू-राजनीतिक विखंडन और आर्थिक उथल-पुथल से भरी दुनिया में भारत एक वैश्विक चमकते सितारे के रूप में उभर कर सामने आया है जो मजबूत, स्थिर और लगातार आगे बढ़ने वाला है.

    पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभर रहा भारत

    वित्त मंत्री ने कहा कि हमारे व्यापक आर्थिक आधार पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं. वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारत को उच्च विकास पथ पर बनाए रखा गया है. हमने अपनी संभावित जीडीपी वृद्धि दर को सुधारकर सात प्रतिशत तक पहुंचाया है. आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत रफ्तार बनाए रखी है. समीक्षा में अगले वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान जताया गया है.

    राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुमानों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. भारत लगातार चौथे वर्ष दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है. समीक्षा में देश के संभावित वृद्धि अनुमान को तीन वर्ष पहले के 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर अब सात प्रतिशत कर दिया गया है.

    100 अरब डॉलर तक एक्सपोर्ट

    आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि मूल्य के लिहाज़ से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कृषि उत्पादक देश अगले चार वर्षों में कृषि, समुद्री तथा खाद्य एवं पेय पदार्थों के निर्यात को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा सकता है.

    साथ ही, इसमें चेतावनी दी गई है कि बार-बार किए जाने वाले नीतिगत बदलाव आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा पैदा कर सकते हैं, अनिश्चितता बढ़ा सकते हैं और विदेशी खरीदारों को वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख करने के लिए मजबूर कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में खोए हुए निर्यात बाजारों को दोबारा हासिल करना कठिन हो जाएगा.

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