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Mini Stroke: मौत के करीब ले जाएगी रातभर जागने की आदत, बढ़ रहा मिनी स्ट्रोक का खतरा, एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

1 week ago

How Sleep Deprivation Increases Mini Stroke Risk: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में रात का समय भी पहले जैसा नहीं रहा. आधी रात के बाद तक मोबाइल की स्क्रीन चमकती रहती है, बिस्तर पर लेटे-लेटे लोग ऑफिस के ईमेल चेक करते हैं और सोशल मीडिया स्क्रॉल करते-करते पता ही नहीं चलता कि कब रात बीत गई. खासकर युवा प्रोफेशनल्स के लिए यह अब सामान्य लाइफस्टाइल बन चुकी है. लेकिन न्यूरोलॉजिस्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि यह आदत सिर्फ थकान ही नहीं, बल्कि मिनी स्ट्रोक जैसे गंभीर खतरे को भी बढ़ा सकती है.

क्या होता है मिनी स्ट्रोक?

मिनी स्ट्रोक, जिसे मेडिकल भाषा में ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक कहा जाता है, तब होता है जब कुछ समय के लिए ब्रेन के किसी हिस्से में ब्लड फ्लो रुक जाता है. इसके लक्षण कुछ मिनटों में खत्म हो सकते हैं, लेकिन इसे हल्के में लेना बड़ी गलती साबित हो सकता है. अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ  के अनुसार, जिन लोगों को ट्रांजिएंट इस्केमिक होता है, उनमें से लगभग हर तीन में एक व्यक्ति को आगे चलकर स्ट्रोक हो सकता है और इनमें से करीब आधे मामले एक साल के भीतर सामने आते हैं. 

नींद से क्यों होती है ये दिक्कत?

 डॉ. चंदना आर गौड़ा ने TOI को बताया कि नींद की कमी तेजी से न्यूरोलॉजिकल और हार्ट संबंधी समस्याओं का बड़ा कारण बनती जा रही है. उनका कहना है कि लगातार कम नींद लेने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का स्तर ऊंचा रहता है, ब्लड प्रेशर प्रभावित होता है, सूजन बढ़ती है और मेटाबॉलिज्म बिगड़ता है. ये सभी कारक मिलकर मिनी स्ट्रोक और बाद में स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकते हैं.

अच्छी नींद क्यों है जरूरी?

एक्सपर्ट के अनुसार, अच्छी नींद सिर्फ शरीर को आराम नहीं देती बल्कि ब्लड वेसल्स की मरम्मत, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और सूजन कम करने में भी मदद करती है. जब लगातार नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर के ये जरूरी सिस्टम प्रभावित होने लगते हैं. नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट की रिसर्च भी बता चुकी है कि लंबे समय तक नींद की कमी हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ाती है, जो स्ट्रोक के प्रमुख कारण माने जाते हैं.

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रिवेंज बेडटाइम प्रॉक्रैस्टिनेशन  क्या होता है?

हाल के वर्षों में एक नया शब्द भी चर्चा में आया है, जिसे रिवेंज बेडटाइम प्रॉक्रैस्टिनेशन कहा जाता है। इसका मतलब है काम के लंबे दिन के बाद अपने लिए समय निकालने के चक्कर में जानबूझकर देर तक जागना, जबकि शरीर को आराम की जरूरत होती है. डॉ. गौड़ा के मुताबिक, देर रात तक फोन चलाना, लगातार स्क्रीन देखना और सिर्फ कुछ घंटे की नींद लेना आज कई युवाओं की आदत बन चुकी है, जो भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकती है.

क्या होते हैं इसके लक्षण?

मिनी स्ट्रोक की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके संकेत अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं. शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में दिक्कत, चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना, चेहरे का एक तरफ झुक जाना या कुछ मिनटों तक भ्रम की स्थिति बने रहना इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसे किसी भी संकेत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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