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मारुति ने ग्रैंड विटारा की 39,506 गाड़ियां वापस बुलाईं:फ्यूल लेवल इंडिकेटर और वार्निंग लाइट सिस्टम में खराबी, फ्री में पार्ट्स बदलेगी कंपनी

7 months ago

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने तकनीकी खराबी के कारण 39,506 गाड़ियों को वापस बुलाया है। कंपनी के इस रिकॉल में 9 दिसंबर 2024 से 29 अप्रैल 2025 के बीच बनाई गई पॉपुलर SUV ग्रैंड विटारा के मॉडल शामिल हैं। इस रिकॉल का कारण फ्यूल लेवल इंडिकेटर और वार्निंग लाइट सिस्टम में संभावित तकनीकी खामी बताई गई है। मारुति सुजुकी ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी है। लो फ्यूल वार्निंग लाइट फ्यूल का लेवल गलत बता रही कंपनी का कहना है कि इन गाड़ियों के स्पीडोमीटर असेंबली में फ्यूल गेज और लो फ्यूल वार्निंग लाइट फ्यूल का लेवल सही ढंग से डिस्प्ले नहीं कर पा रही है। इससे चालक को गलत फ्यूल जानकारी मिल सकती है, जो लंबी दूरी या हाइवे ड्राइविंग के दौरान परेशानी का कारण बन सकती है। कंपनी ने कहा कि यह समस्या सीमित संख्या के वाहनों में देखी गई है, लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी प्रभावित यूनिट्स को जांच के लिए बुलाया जा रहा है। हम सभी ओनर्स को सलाह देंगे कि वह अपनी गाड़ी में पर्याप्त फ्यूल भरवा कर रखें और इस पार्ट को जल्दी से जल्दी बदलवा लें। कस्टमर से नहीं लिया जाएगा कोई चार्ज कंपनी ने बताया कि मारुति सुजुकी के अधिकृत वर्कशॉप मॉडल्स के ऑनर्स से संपर्क करेंगे, जहां डिफेक्ट को सही किया जाएगा। वाहन मालिकों को खराब पार्ट को बदलने की जानकारी दे दी जाएगी। डिफेक्ट सुधारने या पार्ट्स बदलने के लिए कस्टमर से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा, ओनर यहां क्लिक कर अपना व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर (VIN) डालकर भी पता लगा सकते हैं कि उनकी गाड़ी इस पार्ट से प्रभावित हुई है या नहीं। सीट बेल्ट में खराबी के कारण बुलाई थीं 11,177 गाड़ियां ग्रैंड विटारा के लिए यह पहला रिकॉल नहीं है। मारुति सुजुकी ने इससे पहले 24 जनवरी 2023 को इसकी 11,177 यूनिट्स को रिकॉल किया था। कंपनी ने 8 अगस्त 2022 से 15 नवंबर 2022 के बीच बनाए गए मॉडल्स के रियर सीट के सीट बेल्ट माउंटिंग ब्रैकेट में टेक्निकल डिफेक्ट आने के कारण रिकॉल किया था। पहले भी वापस बुलाई थीं कारें देश में गाड़ी रिकॉल के बड़े मामले रिकॉल क्या है और क्यों होता है? जब कोई कंपनी अपने बेचे गए प्रोडक्ट को वापस मंगाती है, तो इसे रिकॉल कहते हैं। किसी कंपनी के द्वारा रिकॉल का फैसला उस वक्त लिया जाता है जब उसके प्रोडक्ट में कोई खराबी होती है। रिकॉल की प्रोसेस के दौरान वो प्रोडक्ट की खराबी को दुरुस्त करना चाहती है। ताकि भविष्य में प्रोडक्ट को लेकर ग्राहक को किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। कंपनी के रिकॉल पर एक्सपर्ट की सलाह कार में खराबी को लेकर कंपनी को पहले सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (SIAM) को एक डेटा देना पड़ता है। इसमें कार की खराबी के साथ कितने प्रतिशत लोगों को प्रॉब्लम हो रही है, बताना पड़ता है। इसके बाद सियाम अप्रूवल देता है। कंपनी खराबी को ठीक करने के लिए एक टाइम तय करती है। यदि किसी ग्राहक की गाड़ी उसके खरीदे गए शहर से बाहर है, तब वो उस शहर के नजदीकी सर्विस सेंटर पर भी उसे ठीक करा सकता है।
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