Language Settings
Select Website Language
newshunt
newshunt

कौन थे 'भारत के एडिसन' जीडी नायडू? फिल्म 'GDN' में जिनका किरदार निभाकर सुर्खियां बटोर रहे हैं आर माधवन

1 week ago

बॉलीवुड के पॉपुलर एक्टर आर माधवन इन दिनों फिल्म 'जीडीएन' को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं. उनकी ये फिल्म फाइनली 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. इस बायोपिक ड्रामा फिल्म की कहानी लोगों को खूब पसंद रही है. वहीं,  माधवन की एक्टिंग की भी दर्शक काफी तारीफ कर रहे हैं. फिल्म में माधवन ने जीडी नायडू का किरदार निभाया है. ऐसे में आइए जानते हैं आखिर जीडी नायडू कौन थे, जिनका रोल निभाकर माधवन सुर्खियां बटोर रहे हैं.

कौन थे जीडी नायडू?
जीडी नायडू भारत के एक जाने-माने इंजीनियर, आविष्कारक और उद्योगपति थे. उन्हें 'भारत का एडिसन' भी कहा जाता है. उनका जन्म 23 मार्च 1893 को कोयंबटूर के पास कलंगल में हुआ था. उन्हें पढ़ाई में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन मशीनों को समझने का जुनून बचपन से था. उन्होंने स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं की, लेकिन मशीनों में उनकी दिलचस्पी इतनी ज्यादा थी कि उन्होंने खुद ही इंजीनियरिंग की बारीकियां सीख लीं. 

जीडी नायडू से जुड़ा दिलचस्प किस्सा
न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, जीडी नायडू से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी उनकी मोटरसाइकिल को लेकर है. बताया जाता है कि होटल में काम करके उन्होंने पैसे बचाए और एक मोटरसाइकिल खरीदी. इसके बाद उन्होंने ये समझने के लिए मोटरसाइकिल को खोल दिया कि आखिर ये काम कैसे करती है. खास बात ये है कि उन्होंने बाद में उसके सभी हिस्सों को फिर से जोड़ भी दिया.

बस चलाने से शुरू हुआ कारोबार
साल 1920 में जीडी नायडू ने एक बस खरीदी और पोलाची से पलानी के बीच बस सेवा शुरू की. धीरे-धीरे उनका ये काम बढ़ता गया और बाद में यूनिवर्सल मोटर सर्विस (UMS) एक बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी बन गई. उस समय भारत में बस और सड़क परिवहन अभी ज्यादा विकसित नहीं था. नायडू ने इसे बेहतर तरीके से चलाने पर ध्यान दिया. हालांकि, उन्हें सिर्फ कारोबार में ही नहीं, बल्कि नई मशीनें बनाने और कुछ नया करने में भी काफी दिलचस्पी थी.

 
 
 
 
 
View this post on Instagram
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

A post shared by R. Madhavan (@actormaddy)

इसलिए कहा गया 'भारत का एडिसन'
जीडी नायडू ने इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में भी कई तरह के प्रयोग किए. साल 1937 में उन्होंने डी. बालासुंदरम नायडू के साथ मिलकर एक देसी इलेक्ट्रिक मोटर बनाई. इसके अलावा उन्होंने ड्राई सेल से चलने वाला मोटराइज्ड रेजर, पतले शेविंग ब्लेड, जूस निकालने की मशीन, फिल्म कैमरे में दूरी तय करने वाली मशीन और केरोसिन से चलने वाला पंखा भी बनाया. उन्होंने वोटिंग में गड़बड़ी रोकने के लिए एक वोट रिकॉर्डिंग मशीन भी तैयार की थी. 

साल 1952 में जीडी नायडू ने करीब 2,000 रुपये की कीमत वाली दो-सीटर पेट्रोल कार भी बनाई. मशीनों और तकनीक के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने की वजह से उनकी तुलना अमेरिका के मशहूर आविष्कारक थॉमस एडिसन से की जाने लगी. इसी वजह से उन्हें 'भारत का एडिसन' कहा गया.

खेती में भी किए कई प्रयोग
जीडी नायडू ने सिर्फ मशीनों के क्षेत्र में ही काम नहीं किया, बल्कि खेती में भी कई प्रयोग किए. उन्होंने हाइब्रिड खेती के साथ-साथ कपास, मक्का और पपीते जैसी फसलों की बेहतर किस्में तैयार करने पर भी काम किया. उनके खेती से जुड़े काम को देखने के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सी.वी. रमन और मशहूर इंजीनियर एम. विश्वेश्वरैया भी उनके फार्म पर पहुंचे थे. 

 
 
 
 
 
View this post on Instagram
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

A post shared by Padmashri_Dr_R Madhavan_Maddy (@actormaddygram)

ये भी पढ़ेंः अदनान सामी के 'लिफ्ट करादे' गाने को म्यूजिक लेबल ने कहा था सड़क छाप, बिना बजट के हुआ शूट

फोटोग्राफी का भी रहा शौक
नायडू को घूमने और फोटोग्राफी का भी शौक था. विदेश यात्राओं के दौरान उन्होंने कई मशहूर लोगों और ऐतिहासिक घटनाओं को अपने कैमरे में कैद किया. वो जर्मनी में एडोल्फ हिटलर से भी मिले थे. इसके अलावा, लंदन में उन्होंने किंग जॉर्ज पंचम के अंतिम संस्कार को कैमरे में रिकॉर्ड किया था. भारत में उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसी कई बड़ी हस्तियों की तस्वीरें भी खींचीं.

शिक्षा को लेकर भी थी अलग सोच
खुद ज्यादा पढ़ाई नहीं करने वाले जीडी नायडू ने बाद में शिक्षा के क्षेत्र में भी काम किया. उन्होंने कोयंबटूर में आर्थर होप पॉलिटेक्निक और आर्थर होप कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की शुरुआत में अहम भूमिका निभाई. बाद में इस इंजीनियरिंग कॉलेज का नाम बदलकर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी कर दिया गया. साल 1945 में नायडू इस कॉलेज के प्रिंसिपल बने. उनका मानना था कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई चार साल की बजाय कम समय में और ज्यादा प्रैक्टिकल तरीके से कराई जानी चाहिए. ब्रिटिश सरकार ने उनके इस सुझाव को मंजूरी नहीं दी, जिसके बाद उन्होंने प्रिंसिपल के पद से इस्तीफा दे दिया.

 
 
 
 
 
View this post on Instagram
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

A post shared by Varghese Moolans Pictures (@varghesemoolans_pictures)

कारोबार के बाद समाजसेवा पर दिया ध्यान
साल 1944 तक जीडी नायडू ने अपने ट्रांसपोर्ट के कारोबार से दूरी बना ली थी. इसके बाद उन्होंने अपना ज्यादा समय समाजसेवा और रिसर्च के कामों में लगाना शुरू कर दिया. उन्होंने रिसर्च के लिए स्कॉलरशिप दी, जरूरतमंद लोगों की मदद की और अपने कर्मचारियों के लिए भी कई सुविधाएं शुरू कीं. कोयंबटूर के विकास में भी उनका योगदान रहा. शहर में सिरुवानी का पानी पहुंचाने के काम में भी उन्होंने मदद की थी. नायडू ने कुछ समय राजनीति में भी काम किया, लेकिन उनका ज्यादा ध्यान इंजीनियरिंग, उद्योग, शिक्षा और समाजसेवा पर ही रहा.

'जीडीएन' के बारे में जानिए 
'जीडीएन' को कृष्णकुमार रामाकुमार ने डायरेक्ट किया है. उन्होंने माधवन के साथ मिलकर इस फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखा है.इस फिल्म में सत्यराज, जयराम, प्रियामणि और दशहरा विजयन जैसे कलाकारों ने भी अहम भूमिका निभाई है. ये फिल्म तमिल, तेलुगु और हिंदी भाषा में रिलीज हुई है.

ये भी पढ़ेंः साड़ी में नयनतारा तो व्हाइट गाउन में कियारा, ट्रेलर लॉन्च में 'टॉक्सिक' की लेडी स्टार्स ने लूटी लाइमलाइट

Click here to Read More
Previous Article
'पैसा मेरे पीछे आता है' वाले बयान पर रवि किशन ने तोड़ी चुप्पी, बोले- रेप्यूटेशन ही सबसे जरूरी है
Next Article
'सुहानी रात ढल चुकी', सोनू निगम ने सर्जरी के दौरान गाया गाना

Related बॉलीवुड Updates:

Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

Comments (0)

    Leave a comment