Language Settings
Select Website Language
newshunt
newshunt

Jaya Ekadashi Vrat Paran: जया एकादशी व्रत का पारण आज, जानिए विधि और नियम

3 months ago

Jaya Ekadashi Vrat Paran: माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आज 29 जनवरी 2026 को जया एकादशी का व्रत रखा गया है. यह व्रत सुख-समृद्धि दिलाता है और पाप कर्मों का नाश करता है. भगवान विष्णु की पूजा-पाठ के साथ आज व्रतधारियों ने नियम और विधिपूर्वक जया एकादशी का व्रत रखा है.

लेकिन शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब पारण भी सही तिथि, मुहूर्त और नियमानुसार किया जाएगा. अगर आज आपने भी जया एकादशी का व्रत रखा है तो यह जान लें कि, जया एकादशी व्रत का पारण कब किया जाएगा. साथ ही यह भी जान लें कि, एकादशी व्रत के पारण के क्या नियम हैं.  

जया एकादशी का पारण कब?

जया एकादशी व्रत का पारण शुक्रवार 30 जनवरी 2026 को किया जाएगा. शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद करना चाहिए. लेकिन यह भी ध्यान रखें कि, द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई हरि वासर होती है, जिसमें पारण नहीं करना चाहिए.

जया एकादशी पारण मुहूर्त (Jaya Ekadashi Paran Time)

पंचांग के अनुसार, 30 जनवरी को सुबह 07.10 पर सूर्योदय होगा और सुबह 11.09 पर एकादशी तिथि समाप्त हो जाएगी. जया एकादशी व्रत का पारण करने या व्रत खोलने के लिए 30 जनवरी को सुबह 07.10 से 09.20 के बीच का समय सबसे शुभ रहेगा. यदि किसी कारण आप इस समय के भीतर व्रत का पारण नहीं कर पाएं तो मध्यान्हकाल बीत जाने के बाद ही पारण करें.

एकादशी व्रत पारण के नियम

  • एकादशी व्रत के अगले दिन यानी द्वादशी पर सूर्योदय के बाद ही पारण करना चाहिए.
  • शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले ही करना ठीक रहता है.
  • किसी कारण तिथियों की घट-बढ़ के कारण द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाए, तो ऐसी स्थिति में भी पारण सूर्योदय के बाद ही करें.
  • द्वादशी तिथि के भीतर कभी भी पारण नहीं करना चाहिए, इससे व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता.

एकादशी व्रत पारण विधि

एकादशी व्रत खोलने से पहले स्नान जरूर करे. स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर सबसे पहले भगवान विष्णु की पूजा करें. साथ ही पूजाघर में दीप जलाकर देवी-देवताओं की भी पूजा करें. एकदाशी व्रत की पूजा में यदि कोई भूलचूक हुई हो तो भगवान से क्षमायाचना करें. इसके बाद ब्राह्मण को दान-दक्षिणा और फिर व्रत खोलें. व्रत खोलने के लिए सबसे पहले पूजा में चढ़ाए गए भोग खा सकते हैं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Click here to Read More
Previous Article
Shukra Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत पर पूजा के लिए 2 घंटे 38 मिनट का शुभ मुहूर्त, शिवलिंग पर जरूर अर्पित करें ये चीजें
Next Article
मोबाइल यूजर्स को चाहिए TRAI का साथ, लेकिन क्या रेगुलेटर सच में सुन रहा है?

Related जीवन शैली Updates:

Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

Comments (0)

    Leave a comment