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Ideas of India 2026: 'सक्सेस और फैल्युअर तो चलता रहता है', अनिल कपूर ने अपनी 49 सालों की जर्नी पर की बात

3 months ago

मुंबई में चली रही दो दिवसीय आईडिया ऑफ इंडिया समिट के दूसरे दिन बॉलीवुड एक्टर अनिल कपूर भी इसमें शामिल होने पहुंचे. इस दौरान अनिल कपूर ब्लैक सूट में बेहद हैंडसम लग रहे थे. सेशन की शुरुआत में अनिल की अपकमिंग फिल्म 'सूबेदार' का ट्रेलर भी दिखाया गया. आइये बताते हैं अनिल ने यहां क्या- क्या बात की है.

'सूबेदार' फिल्म के अपने किरदार पर बात करते हुए अनिल कपूर ने कहा कि ये किरदार उनके लिए खास है. उन्होंने इस किरदार के लिए कहा क ये एक आर्मी अफसर का किरदार है और उन्होंने इसे उसी गंभीरता के साथ निभाया है. फिल्म 'सूबेदार' की शूटिंग के बारे में बात करते हुए अनिल कपूर ने कहा कि, 'हमने केवल बीहड़ में ही नहीं बल्कि यूपी के लखनऊ, सुल्तानपु जैसी जगहों पर भी शूट किया. हमने पूरी कोशिश की कि फिल्म में सबकुछ ओरिजिनल रहे. हमने इसमें कम से कम ही जीएफएक्स का इस्तेमाल किया है. क्योंकि हम चाहते थे कि लोग इस फिल्म से कनेक्ट करें'.

एआई का फिल्मों में रोल
अनिल कपूर से जब एआई के फिल्मों में रोल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि, 'मुझे लगता है ये बहुत जल्दी है, एआई एक रिवोल्यूशन है और हमें इसे इस्तेमाल करना चाहिए. ये हमारा भविष्य है और यूजफुल भी है. कुछ भी नया इवेंशन या इवोल्यूशन होता है वो देश के लिए होता है, हमें इसे अच्छी तरह से इस्तेमाल करना चाहिए. फिल्मों में भी हमें इसे अच्छी तरह से इस्तेमाल करना चाहिए'.

अपनी जर्नी को कैसे देखते हैं
अनिल कपूर से जब बात की गई उनकी जर्नी के बारे में तो उन्होंने बताया, 'मैं वैसे काफी खुशनसीब रहा हूं, मेरी कई फिल्में ऐसी हैं जो बहुत अच्छी हैं. मैं वैसे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता हीं क्योंकि सक्सेस और फैल्युअर तो चलता रहता है लेकिन फिल्मों के दौरान जो लोगों से बातचीत होती है वो अहम होती है. मैंने बहुत सारे दोस्त यहां बनाए हैं. मैं चाहता हूं कि मेरी दोस्ती सबसे बनी रहे, मैं अपनी तरफ से पूरी करता हूं कि सबसे मिलता जुलता रहूं'.

बॉलीवुड में सबसे अच्छा दोस्त
अनिल कपूर सालों से फल्म इंडसट्री में हैं, ऐसे में उनसे जब उनके दोस्तों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया, 'मेरे ख्याल से बहुत सारे हैं, मुझे इस इंडस्ट्री में बहुत साल हो गए हैं. 1977 से अब तक 49 साल मुझे इंडस्ट्री में हो गए हैं और ऐसे में कई लोगों के साथ मैंने काम किया है. कई लोग हैं कई लोग चले गए हैं. अभी सूबेदार में भी मैंने बहुत सारे लोगों के साथ काम किया है. मैं अपने आपको बहुत खुशकिस्मत समझता हूं कि मुझे लोगों ने, दर्शकों ने फैंस ने बहुत प्यार दिया है'.

अनिल कपूर ने बताया कि फिल्म 'रूप की रानी चोरों का राज' भले ही फ्ल़प रही थी, लेकिन उन्होंने उससे बहुत कुछ सीखा है. वो कभी भी फैल्युअर को लेकर बैठते नहीं हैं बल्कि उससे सीखकर आगे बढ़ते हैं. आगे उन्होंने अपने बदलते रूप के बारे में कहा कि मुझे लगता है कि मैंने हर दौर में अपने आपको बेस्ट साबित करने की कोशिश की है. इतने सालों से मैंने सर्वाइव करने की कोशिश की है.

जब अनिल से फिल्म नायक की तरह एक दिन का सीएम बनने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'मैं बिलकुल नहीं बनना चाहूंगा, मैं इस बारे में सोचता भी नहीं हूं. पर मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा कि मैं देश की सेवा कर सकूं'.

बेटी को क्या सलाह देते हैं
अनिल ने बताया कि वो भी एक साधारण पिता ही हैं, उन्होंने कहा, 'मैं वही करता हूं जो हर पिता अपने बच्चों के साथ करता है, मैं भी वैसे ही करता हूं. जब वो कुछ अच्छा करते हैं तो हम खुश हो जाते हैं. वो जब थोड़े उदास होते हैं तो हम भी उदास हो जाते हैं. मैं कभी भी डॉमिनेटिंग और स्ट्रिक्ट पिता नहीं रहा, मैं चाहूंगा कि वो खुद अपनी गलतियां करें और उससे सीखें'.

सफलता का श्रेय दिया पत्नी को
अनिल कपूर ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी को देते हुए कहा, '52 साल से हम साथ हैं तो और मैं क्या कहूं, आज मैं जहां हूं, लोग मुझे कहते हैं कि मैं फिट लगता हूं, एनर्जेटिक लगता हूं तो ये परिवार का साथ है. आप बाहर निकलें और आपके घर में एसी डेडिकेटेड वाइफ हो तो ये कुछ अलग ही है, इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता है. वो भी आम पत्नियों की तरह ही मेरे बाहर जाने पर पूछती हैं कहां जा रहा हूं.

फिल्मों के लिए सलाह कौन देता है?
फिल्मों के चयन की बात करते हुए उन्होंने बताया कि, 'देखिए ये तो पहले मेरे ऊपर है. मैं सुनता सबकी हूं लेकिन करता मन की ही हूं. मैं अपने मन की बात सुनता हूं. लोगों को गलत फहमी है कि कई लोगों पता है कि कौनसी फिल्म चलेगी, कौनसी नहीं. लेकिन ऐसाबिलकुल नहीं है, ये किसी को नहीं पता होता है. इसलिए मैं अपने मन की करता हूं.'

सफलता का मंत्र
अनिल कपूर से जब उनकी सफलता का मंत्र पूछा गया तो उन्होंने बड़ा ही मजेदार जवाब दिया. उन्होंने कहा, 'यार एक तो मुझे ज्ञान देना नहीं आता, मैं जेन जी से सीखना चाहता हूं, मैं ये मानता हूं कि जेन जी को हमसे बहुत ज्यादा आता है. उनसे हमें सीखना चाहिए. मैं खुद जेन जी हूं तो मैं कैसे एडवाइज दूं. आपने गलत इंसान से गलत सवाल कर लिया. बस इतना कहूंगा कि, 'कोई आपको 2 रुपये दे तो उसके लिए आप 200 का काम करके दें'.

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