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Eggs Safety Concern: सावधान! क्या आप भी रोजाना अंडे खाते हैं? मिले नाइट्रोफ्यूरान्स, FSSAI की जांच जारी

6 months ago

Daily Egg Consumption Safety: एक कहावत है कि संडे और या मंडे रोज खाओ अंडे. खैर अब यह कहावत पुरानी हो गई है, क्योंकि अब अंडों को लेकर सवाल उठने लगे हैं. पहले जिसको रोग प्रोटीन के लिए भरभर कर खाते थे, अब उन्हीं अंडों की गुणवत्ता को लेकर उठे विवाद के बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने सख्त कदम उठाया है. सोमवार को FSSAI ने देशभर के अपने क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिया कि वे ब्रांडेड और बिना ब्रांड वाले अंडों के सैंपल इकट्ठा करें और उन्हें जांच के लिए 10 मान्यता प्राप्त लैब में भेजें. इन सैंपलों में खास तौर पर नाइट्रोफ्यूरान्स की मौजूदगी की जांच की जाएगीय

यह कार्रवाई एग ब्रांड एगोज के अंडों की क्वालिटी को लेकर उठे सवालों के बाद की गई है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि इन अंडों में नाइट्रोफ्यूरान्स के अंश हो सकते हैं. नाइट्रोफ्यूरान्स ऐसे एंटीबायॉटिक्स का समूह है, जिनका इस्तेमाल फूड-प्रोड्यूसिंग जानवरों में पूरी तरह प्रतिबंधित है. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अगर पोल्ट्री फार्मिंग में इन दवाओं का अवैध रूप से इस्तेमाल किया जाए, तो उनके अवशेष अंडों तक पहुंच सकते हैं. इसी आशंका के चलते देशभर में सैंपलिंग का फैसला लिया गया.

अंडों की क्वालिटी पर सवाल

यह मामला तब सामने आया, जब एक ऑनलाइन रिपोर्ट में अंडों की क्वालिटी पर सवाल उठाए गए. इसके बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया और सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया और नियामक एजेंसियों की निगरानी बढ़ गई. विवाद बढ़ने पर एगोज ने सफाई जारी करते हुए अपने उत्पादों को सुरक्षित बताया. कंपनी ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि "जैसा हमने वादा किया था, 25 दिसंबर के हमारे ताजा लैब टेस्ट रिपोर्ट्स अब उपलब्ध हैं और सभी के संदर्भ के लिए हम इन्हें सार्वजनिक रूप से साझा कर रहे हैं. हमारे लिए उपभोक्ताओं की सुरक्षा और भरोसा सबसे अहम हैय हम अपने फार्म और प्रक्रियाओं में उच्चतम मानकों का पालन जारी रखेंगे."

एक्सपर्ट का क्या है कहना?

हालांकि, मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि पोल्ट्री सेक्टर में एंटीबायॉटिक्स के दुरुपयोग की समस्या अब भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है. डॉ. जैनिथ लोववंशी ने इसको लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि अगर आप रिश्क नई लेना चाहते हैं,तो आप देशी अंडे ट्राई कर सकते हैं.

 

 
 
 
 
 
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A post shared by Dr. Jainith Lowvanshi | MBBS•MD•DNB (India 🇮🇳) (@jainith_lowvanshi)

कई अन्य एक्सपर्ट का कहना है कि नाइट्रोफ्यूरान्स को दुनियाभर में प्रतिबंधित किया गया है, क्योंकि इनके अवशेष पकाने के बाद भी अंडों में बने रह सकते हैं. उन्होंने बताया कि लंबे समय तक ऐसे दूषित अंडों का सेवन करने से, पशुओं पर किए गए स्टडी में जेनेटिक डैमेज और कैंसर के बढ़े हुए खतरे के संकेत मिले हैं। इसके अलावा इससे लिवर और किडनी को भी नुकसान पहुंच सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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