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Dark Neck Skin Diabetes: त्वचा का काला पड़ना दे सकता है डायबिटीज का इशारा, जानें कब हो जाएं सतर्क?

6 months ago

Vitamin B12 Deficiency Skin Symptoms: स्किन पर दिखने वाले कुछ बदलाव कई बार सिर्फ कॉस्मेटिक समस्या नहीं होते, बल्कि शरीर के अंदर चल रही किसी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकते हैं. हालिया रिसर्च में सामने आया है कि एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स त्वचा की स्थिति, खासतौर पर युवाओं में टाइप-2 डायबिटीज के खतरे से जुड़ी हो सकती है. स्टडी में केस-कंट्रोल एनालिसिस के जरिए ऐसे युवा ओवरवेट लोगों को शामिल किया गया, जिनकी त्वचा पर एएन के लक्षण मौजूद थे. रिसर्च के मुताबिक, जिन पार्टिसिपेट में एएन था, उनमें टाइप-2 डायबिटीज का खतरा उन मोटे लोगों की तुलना में करीब दोगुना पाया गया, जिनमें एए नहीं था. स्टडी से यह भी स्पष्ट हुआ कि इन लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस का मुख्य कारण एन ही बना.

क्या निकला रिसर्च में

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के डेटा में यह बात सामने आई कि गर्दन के आसपास एएन की गंभीरता सीधे तौर पर फास्टिंग इंसुलिन लेवल और इंसुलिन रेजिस्टेंस टेस्ट के नतीजों से जुड़ी हुई थी. ऐसे मामलों में डॉक्टर ब्लड शुगर और इंसुलिन से जुड़े टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, ताकि समय रहते समस्या को पकड़ा जा सके. हालांकि, हर बार त्वचा का काला पड़ना डायबिटीज से ही जुड़ा हो, ऐसा जरूरी नहीं है. कुछ मामलों में यह विटामिन बी12 की कमी की वजह से भी हो सकता है. मेडिकल रिव्यू बताते हैं कि बी12 की कमी से होने वाली हाइपरपिगमेंटेशन चेहरे, हथेलियों और त्वचा की सिलवटों में दिखाई दे सकती है, जो कई बार हार्मोनल समस्याओं से मिलती-जुलती लगती है.

बी12 की कमी से दिक्कत

बी12 की कमी के साथ थकान, हाथ-पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट, जीभ में दर्द और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति की त्वचा की सिलवटों में अचानक कालापन आ जाए, वह ज्यादातर प्लांट-बेस्ड डाइट लेता हो या उसे पाचन संबंधी दिक्कतें हों, तो डॉक्टर आमतौर पर बी12 लेवल की जांच करवाते हैं. कुछ लोगों में कोहनी या घुटनों का काला पड़ना लगातार रगड़ या दबाव की वजह से भी होता है. लंबे समय तक एक ही पोजिशन में बैठना, कोहनी को बार-बार किसी सख्त सतह पर टिकाना या घुटनों के बल बैठने से त्वचा पर फ्रिक्शन बढ़ता है. इससे मेलानिन ज्यादा बनने लगता है और त्वचा मोटी व रूखी हो जाती है. इस तरह का कालापन आमतौर पर मखमली नहीं होता और न ही गर्दन या बगल तक फैलता है

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसे मामलों में लैक्टिक एसिड और यूरिया युक्त क्रीम को कई महीनों तक इस्तेमाल करने से त्वचा की ऊपरी परत एक्सफोलिएट होती है और रंग हल्का पड़ सकता है. इसके साथ मॉइश्चराइजिंग और कोहनी पर लगातार दबाव से बचना भी जरूरी है. इसके अलावा एक्जिमा, सोरायसिस या कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस जैसी त्वचा की सूजन वाली बीमारियों के बाद भी काले धब्बे रह सकते हैं, जिसे पोस्ट-इन्फ्लेमेटरी हाइपरपिगमेंटेशन कहा जाता है, ऐसे मामलों में पहले सूजन का इलाज जरूरी होता है, फिर मेंटेनेंस के तौर पर मॉइश्चराइज़र और सन प्रोटेक्शन अपनाया जाता है.

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए

अगर त्वचा का कालापन तेजी से फैलने लगे, बहुत मोटा या खुजलीदार हो जाए, या फिर वजन कम होने, कमजोरी और पेट दर्द जैसे लक्षण साथ में दिखें, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए, कुछ दुर्लभ मामलों में एन का अचानक और गंभीर रूप से उभरना अंदरूनी कैंसर से भी जुड़ा हो सकता है, खासतौर पर बुजुर्गों में. CDC के अनुसार, एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स डायबिटीज से जुड़ी एक आम त्वचा स्थिति है. इसलिए जिन लोगों में इसके लक्षण दिखें, उन्हें ब्लड शुगर और इंसुलिन रेजिस्टेंस की जांच जरूर करानी चाहिए, ताकि समय रहते गंभीर बीमारी से बचा जा सके.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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