Language Settings
Select Website Language
newshunt
newshunt

'भैया UPI कर दूं?', 10 रुपए की चाय से 314 लाख करोड़ तक, QR कोड ने कैसे बदल दी छोटे दुकानदारों की जिंदगी?

1 month ago

''भैया 2 चाय कर दीजिए.
20 रुपए छुट्टे नहीं है, UPI कर दूं?
हां QR कोड स्कैन कर लीजिए.''

कुछ साल पहले तक यह बातचीत भारत की चाय की दुकानों, सब्जी मंडियों और रेहड़ी पटरी वालों के बीच आम नहीं थी, लेकिन आज देश के हर छोटे-बड़े दुकानदार के पास भी एक QR कोड टंगा या दीवार पर चिपका दिखाई देता है.

हमारे देश में छुट्टे पैसे की समस्या रोज़मर्रा का हिस्सा थी और आज 10 रुपए की चाय से लेकर 20 रुपए की सब्जी तक UPI के जरिए खरीदी जा रही है.

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के जरिए 24 हजार 161 करोड़ से अधिक लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत 314 लाख करोड़ रुपये रही.  भारत में होने वाले कुल डिजिटल भुगतान का लगभग 85% हिस्सा अब UPI के जरिए होता है.

साल 2016 के अप्रैल महीने में यूपीआई की शुरुआत के समय देश के सिर्फ 21 बैंक इससे जुड़े थे और पहले महीने महज 373 ट्रांजैक्शन हुए थे. आज 700 से ज्यादा बैंक यूपीआई का हिस्सा हैं.



सबसे बड़ा बदलाव छोटे कारोबारियों के लिए हुआ

  • UPI ने सबसे ज्यादा असर उन व्यापारियों की जिंदगी पर डाला है, जो पहले पूरी तरह नकद लेनदेन पर निर्भर थे.
  • बाजारों, रेलवे स्टेशनों के बाहर लगी चाय की दुकानों, सब्जी बेचने वालों, फल बेचने वालों और रेहड़ी-पटरी लगाने वालों के लिए QR कोड अब उतना ही जरूरी हो गया है जितना उनका तराजू या चूल्हा.

यूपीआई ने दूर की व्यापारियों की कई दिक्कतें

  • छुट्टा नहीं है, बाद में ले लीजिए या फिर ग्राहक बिना खरीदारी किए आगे बढ़ जाते थे.
  • UPI ने इस समस्या को लगभग खत्म कर दिया.
  • कैश रखने का जोखिम कम हुआ.
  • छोटे दुकानदारों के लिए UPI का एक बड़ा फायदा यह भी है कि अब उन्हें दिनभर की कमाई नकद के रूप में साथ लेकर चलने की जरूरत कम पड़ती है.
  • नकदी गुम होने, चोरी होने या गलत हिसाब-किताब का जोखिम कम हुआ है. कई दुकानदार अब सीधे बैंक खाते में भुगतान प्राप्त करते हैं और उसी पैसे से थोक बाजार में सामान खरीद लेते हैं.

डिजिटल रिकॉर्ड ने बढ़ाई पहचान..

  • UPI ट्रांजैक्शन का एक डिजिटल रिकॉर्ड बनता है. इससे छोटे कारोबारियों को अपनी आय और कारोबार का दस्तावेजी प्रमाण मिलने लगा है.
  • फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी और डिजिटल कॉमर्स से जुड़े कई मॉडल अब छोटे कारोबारियों के लिए इसी डिजिटल लेनदेन के आधार पर ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं के रास्ते खोल रहे हैं.

गांव और छोटे शहर भी पीछे नहीं

  • PayNearby की MSME Digital Index Report के अनुसार, ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत के 73% सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने डिजिटल तकनीकों को अपनाने के बाद कारोबार में वृद्धि दर्ज की है, जिसमें UPI सबसे पसंदीदा भुगतान माध्यम बनकर उभरा है.
  • इसका मतलब यह है कि डिजिटल भुगतान अब सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गया है.
  • UPI छोटी रकम के भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बना.
  • RBI और NPCI के आंकड़े बताते हैं कि UPI भारत में भुगतान की संख्या के हिसाब से सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है. इसकी सबसे बड़ी ताकत यही है कि इसका इस्तेमाल रोजमर्रा के छोटे खर्चों चाय, नाश्ता, सब्जी, दूध, दवा और ऑटो किराए के लिए हो रहा है.

लेकिन चुनौतियां अब भी मौजूद हैं

  • हालांकि तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है.
  • कई बुजुर्ग ग्राहक अब भी नकद भुगतान को प्राथमिकता देते हैं.
  • इंटरनेट और नेटवर्क की समस्या छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में बाधा बनती है.
  • कुछ छोटे व्यापारी कर संबंधी चिंताओं या तकनीकी समझ की कमी के कारण अभी भी पूरी तरह डिजिटल नहीं हुए हैं.




भारत के आर्थिक बदलाव की सबसे बड़ी तस्वीर है यूपीआई!

  • UPI की सफलता केवल तकनीक की कहानी नहीं है.
  • यह उस चाय वाले की कहानी है, जिसने छुट्टे पैसे की चिंता छोड़ दी.
  • यह उस सब्जी वाले की कहानी है, जिसके ग्राहक अब 'पैसे नहीं हैं' कहकर आगे नहीं बढ़ते.
  •  यह उस रेहड़ी वाले की कहानी है, जिसकी दुकान पर लगा एक छोटा सा QR कोड उसे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ देता है.

शायद यही वजह है कि भारत की डिजिटल क्रांति को समझना हो तो किसी बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी के बोर्डरूम में नहीं, बल्कि किसी चाय की दुकान पर टंगे QR कोड को देखना चाहिए.

Click here to Read More
Previous Article
सपनों का शहर या खर्चों की भट्टी? दिल्ली के PG-फ्लैट में रहने वाले युवाओं की हर महीने कितनी ढीली होती है जेब?
Next Article
Lalit Modi: 16 साल बाद भारत लौटेंगे ललित मोदी, ED केस में ट्रिब्यूनल से मिली बड़ी राहत, बोले- नाना बनूंगा फिर...

Related व्यापार Updates:

Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

Comments (0)

    Leave a comment

    //