Language Settings
Select Website Language
newshunt
newshunt

भारत या पाकिस्तान: किस मुल्क का मुसलमान है ज्यादा अमीर और खुशहाल? जानिए चौंकाने वाले आंकड़े

1 month ago

Indian Pakistani Muslim Economy: भारत और पाकिस्तान, दोनों जगह मुसलमान बड़ी तादाद में रहते हैं, लेकिन दोनों की माली हालत में जमीन-आसमान का फर्क है. ऐसे में जानिए आखिर किस मुल्क का मुसलमान ज्यादा खुशहाल है और वहां के सबसे रईस मुसलमान कारोबारियों की जेब में कितना पैसा है. बंटवारे के 78 साल बाद भी यह सवाल बार-बार उठता है कि भारत का मुसलमान बेहतर है या पाकिस्तान का? आंकड़े दोनों तरफ की तस्वीर साफ करते हैं और नतीजा हैरान करने वाला है.

पहले समझिए, कौनसा मुल्क आर्थिक तौर पर कितना मजबूत है

भारत की अर्थव्यवस्था आज करीब 4.15 ट्रिलियन डॉलर है यानी पाकिस्तान से तकरीबन 10 गुना बड़ी. भारत में प्रति व्यक्ति आय 2694 डॉलर सालाना है, जबकि पाकिस्तान में यह सिर्फ 1,478 डॉलर है, यानी लगभग आधी. महंगाई के मोर्चे पर भी पाकिस्तान बुरी तरह पिछड़ा है. वहां महंगाई दर 11.07% है, जबकि भारत में महज 4.38% महंगाई है.

भारत के मुसलमान की हकीकत गरीबी घटी, पर फासला बरकरार

  • भारत में मुसलमानों की आबादी करीब 25 करोड़ है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि यहां के मुसलमान राष्ट्रीय औसत खर्च का सिर्फ 87.9% ही खर्च कर पाते हैं और घर-संपत्ति के मामले में सिर्फ 79% के मालिक हैं, जबकि हिंदुओं का यह आंकड़ा क्रमश 100% और 93% है.
  • Gallup के एक सर्वे में सामने आया कि भारत के 51% मुसलमान अपनी जिंदगी के स्तर से खुश नहीं हैं, जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा 63% है. करीब 47% मुसलमानों ने माना कि घर चलाना उनके लिए मुश्किल है.
  • संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर तीसरा भारतीय मुसलमान आज भी “बहुआयामी गरीबी” यानी शिक्षा, सेहत और घर जैसी बुनियादी सुविधाओं से महरूम है. करीब 80% मुसलमान असंगठित क्षेत्र में मजदूरी, दर्जी या रेहड़ी जैसे कामों में लगे हैं.
  • नवंबर 2025 में आई एक स्टडी के मुताबिक भारत में मुसलमानों में अत्यंत गरीबी घटकर सिर्फ 1.5% रह गई है, जो हिंदुओं के 2.3% से भी कम है.


पाकिस्तान के मुसलमानों पर है संकट!

  • पाकिस्तान की 97% आबादी मुस्लिम है, यानी वहां का हर आर्थिक संकट सीधे-सीधे वहां की मुस्लिम जनता पर असर डालता है.
  • ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में पाकिस्तान की 28.8% आबादी गरीबी रेखा से नीचे जा रही है. छह साल पहले यह आंकड़ा सिर्फ 21.9% था. World Bank की मानें तो नए मानकों के हिसाब से यह आंकड़ा 45% तक पहुंच जाता है. वहां अत्यंत गरीबी भी 4.9% से बढ़कर 16.5% हो गई है.
  • पाकिस्तान पर कर्ज का बोझ इतना है कि उसका debt-to-GDP ratio 70-80% तक पहुंच चुका है. लगातार IMF बेलआउट, बाढ़ और सियासी उठापटक ने वहां के आम आदमी की कमर तोड़ दी है.

भारत के टॉप 5 मुस्लिम कारोबारी इस तरह हैं...

विप्रो के मालिक अजीम प्रेमजी सबसे ऊपर हैं, उनकी दौलत करीब 11 से 15 अरब डॉलर आंकी जाती है. दूसरे नंबर पर यूसुफ अली हैं, जो लुलु ग्रुप चलाते हैं और मूल रूप से भारतीय हैं भले ही उनका कारोबार खाड़ी देशों में फैला है, उनकी संपत्ति करीब 8 से 8.5 अरब डॉलर है. तीसरे नंबर पर सिप्ला के यूसुफ हमीद हैं, जिनकी दौलत 2.5 से 4 अरब डॉलर के बीच है. चौथे और पांचवें नंबर पर VPS हेल्थकेयर के शमशेर व्यालिल और एस्टर के आजाद मूपन हैं, दोनों की संपत्ति 1.5 से 3 अरब डॉलर के दायरे में है.

अब पाकिस्तान के टॉप 5 कारोबारियों पर नजर डालिए

  • पाकिस्तानी मूल के शाहिद ख़ान सबसे अमीर हैं, जिनकी संपत्ति 13 से 15 अरब डॉलर है लेकिन वे अमेरिका में बस चुके हैं और वहीं से अपना कारोबार चलाते हैं.
  • पाकिस्तान में रहकर कारोबार करने वालों में सबसे अमीर मियां मुहम्मद मंशा हैं, जिन्हें 'पाकिस्तान का मुकेश अंबानी' भी कहा जाता है. उनकी दौलत 5 से 7.8 अरब डॉलर के बीच है.
  • तीसरे नंबर पर बेस्टवे ग्रुप के अनवर परवेज हैं, जिनकी संपत्ति करीब 3.5 से 4 अरब डॉलर है.
  • चौथे नंबर पर रियल एस्टेट कारोबारी मलिक रियाज हैं
  • और पांचवें नंबर पर हाशू ग्रुप के सादरुद्दीन हाशवानी हैं, जिनकी दौलत करीब 90 करोड़ डॉलर आंकी जाती है.

आंकड़े जो सबसे ज्यादा चौंकाते हैं

भारत में आज कुल 229 अरबपति हैं, जिनकी सामूहिक दौलत 1,000 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुकी है. पाकिस्तान में सिर्फ 15 अरबपति हैं, जिनकी कुल संपत्ति महज 71 अरब डॉलर है.

गौर करने वाली बात यह है कि अकेले मुकेश अंबानी की दौलत (करीब 115 अरब डॉलर) पाकिस्तान के सभी 15 अरबपतियों की कुल दौलत से भी ज्यादा है. वहीं भारत के सबसे अमीर मुसलमान अजीम प्रेमजी की दौलत, पाकिस्तान में रहने वाले सबसे अमीर शख़्स मियां मंशा से करीब दोगुनी बैठती है.

निचोड़: किसकी हालत बेहतर है?

आंकड़े साफ़ कहते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था और यहाx के अरबपति वर्ग, पाकिस्तान से कहीं आगे हैं चाहे वह मुस्लिम कारोबारी हों या ग़ैर-मुस्लिम.

लेकिन आम मुसलमान की बात करें तो भारत में यह समुदाय आज भी शिक्षा, रोजगार और संपत्ति के मामले में देश के बाकी समुदायों से पीछे है. वहीं पाकिस्तान में चूंकि पूरी आबादी ही मुस्लिम-बहुल है, वहाx का आर्थिक संकट सीधे वहाx की मुस्लिम जनता का संकट बन जाता है और वह संकट भारत के मुक़ाबले कहीं ज्यादा गहरा है.

यानी भारत का औसत मुसलमान, पाकिस्तान के औसत नागरिक से आर्थिक तौर पर बेहतर स्थिति में जरूर है, लेकिन भारत के भीतर वह अब भी सबसे पिछड़े तबकों में गिना जाता है. यह दोनों बातें एक साथ सच है.

(आर्टिकल World Bank, सच्चर कमेटी रिपोर्ट, NITI Aayog, Gallup सर्वे, UNDP, Forbes डेटा के आधार पर)

Click here to Read More
Previous Article
ITR: 1 करोड़ का टैक्स भरा, लेऑफ में चली गई शख्स की नौकरी, पोस्ट कर छलका दर्द, छिड़ी बहस
Next Article
सपनों का शहर या खर्चों की भट्टी? दिल्ली के PG-फ्लैट में रहने वाले युवाओं की हर महीने कितनी ढीली होती है जेब?

Related व्यापार Updates:

Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

Comments (0)

    Leave a comment

    //