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भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले बांग्लादेश को फिर पड़ी मदद की जरूरत, हिंदुस्तान ने फिर किया एहसान

3 months ago

Bangladesh: भारत के साथ बिगड़ते रिश्तों के बीच बांग्लादेश को एक बार फिर से मदद की जरूरत पड़ी. बांग्लादेश में प्राकृतिक गैस की कमी और बिजली की बढ़ती मांग  को देखते हुए अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पावर बांग्लादेश के लिए बिजली का एक्सपोर्ट बढ़ा रही है. दोनों देशों के सरकारी आंकड़ों में इसका खुलासा हुआ है. 

2023 से लगातार हो रही सप्लाई

भारतीय और बांग्लादेशी सरकार के डेटा के अनुसार, झारखंड के गोड्डा में अडानी के कोयला-बेस्ड पावर प्लांट से बांग्लादेश के लिए बिजली का एक्सपोर्ट काफी बढ़ गया है. दिसंबर तक के तीन महीनों में इसकी सप्लाई सालाना लगभग 38 परसेंट बढ़कर 2.25 बिलियन किलोवाट-घंटे (kWh) तक पहुंच गई है.

बांग्लादेश सरकार के मुताबिक, भारत से भेजी जाने वाली बिजली उसके टोटल पावर मिक्स का रिकॉर्ड 15.6 परसेंट तक हो चुकी है, जो 2024 में 12 परसेंट ही थी. अडानी पावर ने साल 2023 से बांग्लादेश को बिजली की सप्लाई शुरू की थी और तब से लेकर अब तक यह जारी है. यानी कि दोनों देशों के बीच खराब होते कूटनीतिक संबंधों के बावजूद बिजली का कारोबार या लेनदेन गजब फल-फूल रहा है. हालांकि, बांग्लादेश सरकार की तरफ से नियुक्त एक पैनल ने भारत से बिजली की सप्लाई को जरूरत से ज्यादा महंगा बताया है.

वहीं, ढाका के इंडिपेंडेंट एनर्जी एक्सपर्ट एजाज हुसैन ने कहा, "अडानी की बिजली अभी भी तेल से बनने वाली बिजली से सस्ती है। कमी के कारण, बांग्लादेश को तेल से चलने वाले पावर प्लांट इस्तेमाल करने पड़ रहे हैं।"दोनों देशों में इन दिनों तनाव इस कदर है कि दोनों ने ही वीजा सर्विस पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है. 

गैस संकट से जूझ रहा बांग्लादेश

बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन रेजाउल करीम ने रॉयटर्स को बताया कि कमी को कम करने के लिए पावर इम्पोर्ट की जरूरत है, जिसमें नेचुरल गैस (बांग्लादेश का मुख्य पावर सोर्स) की कमी भी शामिल है. ऐसे में 2026 में बिजली की मांग अनुमानित 6 परसेंट से 7 परसेंट तक बढ़ सकती है. 

करीम ने कहा कि बांग्लादेश गैस की कमी को पूरा करने के लिए इस साल देश में कोल बेस्ड पावर प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कोयले का इंपोर्ट भी बढ़ाएगा. एनालिटिक्स फर्म Kpler के डेटा से पता चला है कि 2025 में कोयले का इंपोर्ट 35 परसेंट से बढ़कर रिकॉर्ड 17.34 मिलियन मीट्रिक टन हो गया.

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