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Anger And Heart Disease: बार-बार आता है गुस्सा तो हो जाइए सावधान, हो सकती है दिल की बीमारी

5 months ago

Can Anger Cause Heart Attack: अगर आपको बात-बात पर गुस्सा आता है और हर बात पर गुस्सा आता है, तो आपको सावधान होने की जरूरत है.  एक हालिया स्टडी ने गुस्से और दिल की सेहत के बीच संबंध को लेकर नई चिंता पैदा की है. रिसर्च में पाया गया कि सिर्फ आठ मिनट का तीव्र गुस्सा भी शरीर की ब्लड वेसल्स पर असर डाल सकता है. साइंटिस्ट के अनुसार, इतने कम समय की नाराजगी के बाद रब्लड वेसल्स के फैलने की क्षमता लगभग आधी रह गई और यह असर करीब 40 मिनट तक बना रहा. यानी गुस्सा केवल इमोशनल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि दिल के लिए शारीरिक खतरा भी बन सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे यह आपके शरीर पर असर करता है.

अमेरिका में हुआ रिसर्च

अमेरिका के कई संस्थानों के शोधकर्ताओं ने 280 स्वस्थ एडल्ट पर यह स्टडी किया. इन प्रतिभागियों को चार समूहों में बांटा गया. कुछ लोगों से कहा गया कि वे आठ मिनट तक किसी ऐसी घटना को याद करें जिससे उन्हें गुस्सा, उदासी या चिंता हुई हो, जबकि एक समूह को तटस्थ रहने के लिए केवल गिनती बोलने को कहा गया. इसके बाद वैज्ञानिकों ने उनकी ब्लड वेसल्स की कार्यक्षमता जांची, खासकर यह कि वे कितनी अच्छी तरह फैल सकती हैं.

क्या निकला रिजल्ट?

परिणाम चौंकाने वाले थे. जिन लोगों ने गुस्से वाली घटना को याद किया, उनमें ब्लड वेसल्स के फैलने की क्षमता में स्पष्ट गिरावट देखी गई. जबकि उदासी या चिंता महसूस करने वाले समूह में ऐसा असर नहीं पाया गया. इसका मतलब है कि गुस्सा अन्य नकारात्मक भावनाओं से अलग और अधिक प्रभावी ढंग से दिल पर दबाव डालता है. जब हम गुस्सा होते हैं, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन जैसे कोर्टिसोल और एड्रेनालिन तेजी से बढ़ जाते हैं. ये हार्मोन धमनियों की भीतरी परत को संकुचित कर देते हैं, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और रक्तचाप बढ़ सकता है। एक बार का गुस्सा स्थायी नुकसान नहीं करता, लेकिन अगर ऐसा बार-बार हो, तो ब्लड वेसल्स को सामान्य होने का पर्याप्त समय नहीं मिलता. लंबे समय में यह स्थिति प्लाक जमने, हार्ट अटैक या स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकती है.

क्या हो सकती है दिक्कत?

एक्सपर्ट का मानना है कि गुस्से को हल्के में लेना सही नहीं है. अगर कोई व्यक्ति अक्सर चिड़चिड़ा रहता है या छोटी-छोटी बातों पर भड़क जाता है, तो उसे तनाव को मैनेज करने के तरीके अपनाने चाहिए, गहरी सांस लेना, नियमित एक्सरसाइज, योग या ध्यान जैसी तकनीकें दिल को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती हैं. जरूरत पड़े तो काउंसलर या थेरेपिस्ट से बात करना भी फायदेमंद हो सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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