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    आत्मनिर्भर भारत के सफर पर ब्रेक! चीन से बढ़ा ट्रेड डेफिसिट, जानें क्या है मामला

    4 months ago

    India Import Data 2025: वित्तीय वर्ष 2025-26 के दूसरे तिमाही अप्रैल-सितंबर में भारत के आयात में उछाल देखने को मिला है. पिछले वर्ष की तुलना में इस तिमाही में भारत ने 16.26 अरब डॉलर का अधिक सामान इम्पोर्ट किया है. पिछले वर्ष इस अवधि में देश का आयात 358.85 अरब डॉलर था. जो 2025 में 375.11 अरब डॉलर हो गया है. देश में मैन्युफैक्चरिंग की गति, घरेलू मांग ने इसे बढ़ाने का काम किया है.

    साथ ही इलेक्टॉनिक्स, मशीनरी के इंपोर्ट में तेजी आई है. इस आयात से भारत का चीन के साथ ट्रेड डेफिसिट भी बढ़ गया है. एक ओर तो, जहां भारत आत्मनिर्भर होने के लिए नए प्रयास कर रहा है. वहीं दूसरी ओर, चीन से आयात बढ़ना देश के लिए शुभ संकेत नहीं दे रही है. हालांकि, चीन दुनिया के सबसे बड़े आयातक देशों में से एक है, पर चीन भारत का अलग-अलग मंचों पर विरोध भी करता रहता है. 

    किन चीजों का बड़ा आयात?

    भारत ने इस तिमाही में इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और सिल्वर प्रोडक्ट की आयात सबसे ज्यादा किया हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स इम्पोर्ट्स में 16.78 प्रतिशत तो वहीं, मशीनरी इम्पोर्ट्स में 13.7 प्रतिशत की जबरदस्त उछाल देखने को मिली हैं. सिल्वर की मांग तो पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है. सिल्वर की खासियतों के कारण, इंडस्ट्री में इसकी मांग बढ़ती ही जा रही है. सिल्वर का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल्स और बैटरी बनाने में किया जाता है. इस कारण, भारत में भी सिल्वर की मांग तेज है. इसके आयात में 56 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई है. भारत ने 3.2 अरब डॉलर की चांदी इंपोर्ट की है. 

    चीन बना सबसे बड़ा निर्यातक

    भारत ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले छमाही में सबसे ज्यादा आयात चीन से किया है. भारत ने चीन से लगभग 62.89 अरब डॉलर का सामान इंपोर्ट किया. डेटा की बात करें तो, पिछले साल की तुलना में इसमें 11.2 प्रतिशत की उछाल है. दूसरे नंबर पर यूएई से भारत ने 33.03 अरब डॉलर का सामान आयात किया. वहीं, रूस देश का तीसरा सबसे बड़ा आयातक स्रोत बना हुआ है. हालांकि, रूस से इंपोर्ट में 7.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. भारत ने रूस से 31.12 अरब डॉलर का सामान मंगवाया है.  

    ट्रेड डेफिसिट में बढ़ोतरी

    चीन का सबसे बड़ा आयातक बनने से भारत और चाइना के बीच ट्रेड डेफिसिट में बढ़ोतरी हुई और यह 54.4 अरब डॉलर के आंकडें पर पहुंच गया. पिछले साल, इस अवधि में यह आंकड़ा 49.6 अरब डॉलर था. यानि कि देश से निर्यात होने वाली वस्तुओं और सर्विसेज और इंपोर्ट होने वाली वस्तुओं और सर्विसेज में एक बहुत बड़ा अंतर हैं. जब भी किसी देश की निर्यात होने वाला सामान, आयात होने वाली वस्तुओं से कम होता है, तो इसे ही ट्रेड डेफिसिट या व्यापार घाटा कहा जाता है. 

    यह भी पढ़ें: भारत और रूस मिलकर बदलेंगे रेयर अर्थ का गेम, चीन की बढ़ गई टेंशन

     

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