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आईसीएमआर की नई सलाह कार्ब्स नहीं, प्रोटीन है ज्यादा जरूरी, सफेद चावल छोड़ें, हेल्दी ग्रेन्स अपनाएं

8 months ago

आज भारत कई बढ़ती स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है. देश भर में लाखों लोग अब दिल की बीमारियों, डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर मेटाबॉलिक बीमारियों से जूझ रहे हैं. यह संकट अचानक नहीं आया, इसकी जड़ें हमारी बदलती लाइफस्टाइल और खाने की आदतों में छिपी हुई हैं. जहां पहले ट्रेडिशनल भारतीय लाइफस्टाइल जैसे हल्का-फुल्का खाना, फिजिकल एक्टिविटी और घर का बना खाना शामिल था, आज वह बदलकर ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, ज्यादा सफेद चावल और गेहूं आधारित डाइट और लगातार बैठने वाली लाइफस्टाइल में तब्दील हो गई है. इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए ICMR के जरिए कराए गए एक बड़े सर्वे ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या से नहीं, बल्कि बिना शोर के फैलती गंभीर बीमारियों के संकट से जूझ रहा है. 

सर्वे से चौंकाने वाले खुलासे
ICMR India Diabetes नाम की इस परियोजना के तहत 18,000 से ज्यादा लोगें  की जांच की गई. जिसके नतीजे हैरान कर देने वाले थे. इसमें 83 प्रतिशत भारतीयों में कम से कम एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या पाई गई, जैसे हाई बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या डायबिटीज. इसके अलावा 41 प्रतिशत में प्रीडायबिटीज, 26 प्रतिशत लोग मोटापे के शिकार, और 43 प्रतिशत का वजन जरूरत से ज्यादा मिला है. साथ ही इसमें 50 प्रतिशत लोगों में कोलेस्ट्रॉल इंबैलेंस है. यह अध्ययन बताता है कि अब ये बीमारियां सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहीं, ये गां वों तक फैल चुकी हैं. औरतें कम तंबाकू या शराब का सेवन करती हैं, फिर भी उनमें मोटापा और इन-एक्टिविटी ज्यादा पाई गई, वहीं पुरुषों में हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल की समस्याएं आम हैं. 

कार्बोहाइड्रेट बन गए हैं बड़ी समस्या
हमारी डाइट अब ऐसे खाने पर है जो पेट तो भरता है, लेकिन शरीर को ज्यादा नुकसान देता है. जैसे सफेद चावल, रिफाइंड गेहूं, ज्यादा चीनी और तला-भुना खाना. जो लोग ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाते हैं उनमें डायबिटीज और मोटापा होने का खतरा ज्यादा होता है. वहीं सिर्फ सफेद चावल को हटाकर साबुत अनाज लेने से बहुत फर्क नहीं पड़ता, जब तक कि कुल कार्बोहाइड्रेट की मात्रा न घटे. इस अध्ययन का सबसे बड़ी बात सामने आई है कि लोगों को अपने खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ़ानी चाहिए.  कार्ब्स की जगह प्रोटीन की मात्रा सही लेने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 9-11 प्रतिशत तक कम होता है, प्रीडायबिटीज का खतरा 6-18 प्रतिशत तक घटता है, और बिना एक्स्ट्रा कैलोरी लिए, सिर्फ प्रोटीन बढ़ाकर बेहतर हेल्थ पा सकते हैं. 

कौन से हेल्दी ग्रेन्स अपनाएं
रिपोर्ट के मुताबिक, खाने में एक्स्ट्रा कार्बोहाइड्रेट और खराब फैट को कम करें. लोगों को प्रोटीन युक्त डाइट अपनाने के लिए प्रेरित करें. फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ावा दिया जाए, चाहे पैदल चलना हो, खेलना हो या योग. सफेद चावल और मैदे का सेवन कम करें, दिन में एक बार दाल या प्रोटीन युक्त खाना जरूर लें. दूध, दही, अंडा या पनीर को डाइट में शामिल करें. साथ ही रोजाना कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी करें. 

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