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7 महीने की प्रेग्नेंट सोनिका ने उठाया 145kg वजन, ऐसे समय में वेटलिफ्टिंग बेबी के लिए कितना बड़ा खतरा?

7 months ago

प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को उनके स्वास्थ्य का ज्यादा से ज्यादा ख्याल रखने के लिए कहा जाता है. इस समय प्रेग्नेंट महिलाओं को हेल्दी डाइट और केयर की काफी जरूरत होती है. साथ ही, भारी वजन उठाने से भी मना किया जाता है, क्योंकि ऐसा करने से मिसकैरेज का खतरा काफी बढ़ जाता है, लेकिन हाल ही में एक ऐसा कैसे सामने आया है, जिसने सबको हैरान कर दिया है.

दिल्ली पुलिस की एक महिला कांस्टेबल ने ऑल इंडिया पुलिस वेटलिफ्टिंग क्लस्टर में 145 किलो वजन उठाया है. इसमें हैरानी की बात यह है कि इतना भारी वजन उठाने वाली सोनिका 7 महीने क प्रेग्नेंट हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए वेटलिफ्टिंग सेफ होती है या नहीं?

प्रेग्नेंसी में क्यों खतरनाक होती है वेटलिफ्टिंग?

गाइनेकोलॉजिस्ट का कहना है कि प्रेगनेंसी के दौरान वेटलिफ्टिंग केवल डॉक्टर्स की सलाह के बाद ही करनी चाहिए. दरअसल, प्रेग्नेंसी के दौरान बॉडी में रिलैक्सेन नाम के हार्मोन्स बनते हैं, जो पेल्विस की लिगामेंट्स को सॉफ्ट कर सर्विक्स का एरिया बढ़ा देते हैं. ऐसे में वेटलिफ्टिंग जैसे भारी वजन उठाने वाले गेम में इंजरी होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. ऐसे में जरूरी है बेहतर ट्रेनिंग करना. इससे बॉडी स्ट्रेंथ को बढ़ाती है और इंजरी का रिस्क कम होता है. ऐसी महिलाओं को हर हफ्ते 150 मिनिट का मॉडरेट वर्कआउट करना चाहिए ताकि वेटलिफ्टिंग की प्रैक्टिस को जारी रख सकें.

प्रेगनेंसी के समय वेटलिफ्टिंग में किस चीज रखें ध्यान ?

डॉक्टर्स कहते हैं कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी में भी वेटलिफ्टिंग करना चाहती हैं, उन्हें इसकी इंटेंसिटी को पहले के मुकाबले थोड़ा कम देना चाहिए यानी कि हल्के वेट के साथ प्रैक्टिस करनी चाहिए. इस दौरान उन्हें अपने पिछले वेट का केवल 70 प्रतिशत वजन उठाना चाहिए और उसे ही रिपीट करके प्रैक्टिस करनी चाहिए. साथ ही, प्रेग्नेंसी के समय सेंटर ऑफ ग्रैविटी के चलते महिलाओं का वेट आगे की ओर शिफ्ट हो जाता है, जिससे पिछले हिस्से में इंजरी के चांसेज होते हैं. ऐसे में महिलाओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे को नुकसान न हो और उन्हें भी इंजरी न हो. साथ ही, शुरुआत के 5 महीने तक वेटलिफ्टिंग ठीक है पर इसके बाद इसे प्रैक्टिस करना खतरनाक हो सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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