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    15 साल बाद CGHS में बड़ा बदलाव, सरकार ने उठाया अहम कदम; जानें केंद्रीय कर्मचारियों को कैसे मिलेगा फायदा?

    4 months ago

    CGHS Big Change: सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य योजना सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) ने बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत पुराने पैकेज रेट्स में बदलाव किए गए हैं. सरकार के इस कदम से लगभग 46 लाख CGHS लाभार्थियों के साथ-साथ निजी अस्पतालों को भी राहत मिलने की उम्मीद है.

    क्या हुआ नया बदलाव?

    दरअसल, सरकार ने 2,000 मेडिकल पैकेज के नए रेट्स जारी किए हैं, जो 13 अक्टूबर से लागू होंगी. इससे पहले, लंबे समय से CGHS लाभार्थी यह शिकायत करते रहे हैं कि अस्पतालों से कैशलेस ट्रीटमेंट नहीं मिल पा रहा है. इसके लिए अपनी जेब से भारी-भरकम इलाज का खर्च उठाना पड़ता है और रिफंड के लिए भी महीनों इंतजार करना पड़ता है.

    निजी अस्पतालों का कहना है कि पैकेज में मौजूदा तय दरें पुरानी हो गई हैं और आज के हिसाब से मेडिकल ट्रीटमेंट के खर्चों को पूरा करने के लिए यह काफी नहीं है. पैकेज रेट के बढ़ने से मरीज को अब इलाज के लिए खुद से पैसे नहीं भरने पड़ेंगे और कैशलेस इलाज की भी सुविधा आराम से मिलेगी. हालांकि, सरकार का कहना है कि नई दरें अस्पतालों की क्वॉलिटी, शहरों की कैटेगरी, अस्पताल के प्रकार और मरीज के वार्ड के आधार पर बदलेंगी.

    2014 के बाद उठाया गया बड़ा कदम

    CGHS पैकेज रेट में आखिरी बार बड़ा बदलाव 2014 में हुआ था. इस बीच, छोटी-मोटी चीजें बदली गईं, लेकिन 10 साल से अधिक लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी कोई  व्यापक सुधार लागू नहीं किया गया. इस साल अगस्त में सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज यूनियन (GENC) ने सरकार को एक ज्ञापन सौंपा.

    इसमें कहा गया था कि कैशलेस इलाज की सुविधा की कमी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आर्थिक तंगी का कारण बन रही है, खासकर मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में.  इसके बाद, सरकार ने यह अहम फैसला लिया. CGHS 2000 मेडिकल पैकेज कोई एक सिंगल पैकेज नहीं है, बल्कि इसमें केंद्र सरकार के सवास्थ्य योजना (CGHS) के तहत लगभग 2,000 तरह के मेडिकल ट्रीटमेंट शामिल हैं. चूंकि इसमे मौजूद पुराने रेट्स आज के ट्रीटमेंट के हिसाब से काफी नहीं थे इसलिए निजी अस्पताल मरीजों को कैशलेस पेमेंट देने से कतराते थे. 

    क्या कुछ नया बदला?

    2,000 मेडिकल पैकेज की नई दरें शहर की श्रेणी (टियर-I, टियर-II, टियर-III) और NABH एक्रेडिटेशन जैसी अस्पतालों की गुणवत्ता पर आधारित है- 

    • टियर-II शहरों में पैकेज रेट बेस रेट से 19 परसेंट कम होंगी.
    • टियर-III शहरों में रेट बेस रेट से 20 परसेंट कम होंगी.
    • NABH एक्रेडिटेड अस्पताल बेस रेट पर सेवाएं देंगे. 
    • नॉन-NABH अस्पतालों को बेस रेट से 15 परसेंट कम दर मिलेगी.
    • 200 से ज्यादा बेड वाले सुपर-स्पेशियल्टी अस्पतालों को 15 परसेंट ज्यादा रेट मिलेंगे. 

     

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